Chirmiri MBBS Fraud: मेडिकल एडमिशन के नाम पर 22 लाख की कथित ठगी, एक साल से फरार आरोपी गिरफ्तार

एमसीबी/चिरमिरी। एमबीबीएस में एडमिशन दिलाने के नाम पर करीब 22 लाख रुपए की कथित ठगी (Chirmiri MBBS Fraud) के मामले में चिरमिरी पुलिस ने एक साल से फरार चल रहे आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान प्रिंस के रूप में की गई है। पुलिस अब मामले से जुड़े लेन-देन और अन्य पहलुओं की जांच आगे बढ़ा रही है।
एडमिशन दिलाने का दिया था भरोसा
मामला मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीट दिलाने के नाम पर पैसे लेने से जुड़ा है।
आरोप है कि एडमिशन का भरोसा दिलाकर बड़ी रकम ली गई, लेकिन तय प्रक्रिया के अनुसार प्रवेश नहीं कराया गया।
इसके बाद पीड़ित पक्ष की शिकायत पर मामला पुलिस तक पहुंचा।
कुल कथित रकम करीब 22 लाख रुपए बताई गई है।
एक साल से फरार था आरोपी
मामला दर्ज होने के बाद आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर चल रहा था।
करीब एक साल से उसकी तलाश की जा रही थी।
चिरमिरी पुलिस ने अब उसे गिरफ्तार कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि रकम किस माध्यम से ली गई और पूरे लेन-देन में कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।
मेडिकल एडमिशन के नाम पर ठगी का खतरा
NEET परीक्षा और काउंसलिंग के दौरान मेडिकल सीट दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों और उनके परिवारों को निशाना बनाने के मामले समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
ठगी करने वाले लोग अक्सर सरकारी या प्रतिष्ठित निजी मेडिकल कॉलेज में सीट दिलाने का दावा करते हैं।
कुछ मामलों में जल्द भुगतान करने का दबाव बनाकर उम्मीदवारों से बड़ी रकम मांगी जाती है।
केवल अधिकृत काउंसलिंग पर भरोसा करें
एमबीबीएस प्रवेश निर्धारित प्रवेश परीक्षा और अधिकृत काउंसलिंग प्रक्रिया से जुड़ा होता है।
अभ्यर्थियों को किसी निजी व्यक्ति के “गारंटीड एडमिशन” के दावे पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक वेबसाइट और काउंसलिंग अथॉरिटी से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीधे सीट दिलाने का दावा करे तो विशेष सावधानी की जरूरत है।
निजी खाते में भुगतान से पहले जांच जरूरी
फीस जमा करते समय यह देखना चाहिए कि बैंक खाता संबंधित संस्थान या अधिकृत संस्था के नाम पर है या नहीं।
किसी व्यक्ति के निजी खाते में लाखों रुपए भेजने से पहले उसकी वैधता जांचना जरूरी है।
भुगतान की रसीद, ईमेल, आवेदन और अन्य दस्तावेज भी सुरक्षित रखना चाहिए।
किसी विवाद की स्थिति में यही रिकॉर्ड पुलिस जांच में मदद कर सकते हैं।
डिजिटल साक्ष्य होंगे अहम
इस तरह के मामलों में मोबाइल चैट, बैंक ट्रांजैक्शन, कॉल रिकॉर्ड और भेजे गए दस्तावेज जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनते हैं।
यदि किसी व्यक्ति ने फर्जी प्रवेश पत्र, सीट अलॉटमेंट या कॉलेज से संबंधित नकली दस्तावेज भेजे हैं तो उनकी जांच भी की जा सकती है।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित तौर पर ली गई राशि कहां गई और क्या रकम की कोई बरामदगी संभव है।






