IRDAI New Rules:बीमा ग्राहकों के लिए बड़ी खबर: अब लोन के साथ जबरन इंश्योरेंस नहीं चिपका पाएंगे बैंक; IRDAI ने तैयार किया नया कमीशन ढांचा

IRDAI New Rules:अगर आप बैंक से लोन लेने या कोई नई बीमा पॉलिसी (Insurance Policy) खरीदने का मन बना रहे हैं, तो आपके लिए एक बेहद अच्छी खबर है। भारत में बीमा खरीदने और बेचने के पूरे सिस्टम में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है।
भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमा वितरण व्यवस्था में सुधार लाने और ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए दो हिस्सों वाला एक नया ‘कंसल्टेशन पेपर’ (परामर्श पत्र) जारी किया है। इसमें एजेंटों के कमीशन, बैंकों द्वारा की जाने वाली जबरन बिक्री (मिस-सेलिंग) और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की कार्यप्रणाली को लेकर कई अहम प्रस्ताव रखे गए हैं।
लोन के साथ बीमा लेना अब नहीं होगा अनिवार्य(IRDAI New Rules)
इस परामर्श पत्र में ग्राहकों के लिए सबसे बड़ी राहत का प्रस्ताव ‘लोन के साथ बीमा’ को लेकर है। अक्सर देखा गया है कि बैंक या NBFC ग्राहकों को होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन देने की एवज में अपनी ही किसी बीमा पॉलिसी को खरीदना अनिवार्य (Mandatory) कर देते हैं। IRDAI ने इस जबरन बिक्री (Forced Selling) पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है।
- प्रस्ताव के मुताबिक, किसी भी ग्राहक को बीमा लेने के लिए उसी बैंक या वित्तीय संस्था से जुड़ना जरूरी नहीं होगा।
- अगर ग्राहक बीमा नहीं लेना चाहता है, तो इस स्थिति में भी बैंक को लोन की ब्याज दर स्पष्ट रूप से बतानी होगी।
मोटर और लाइफ इंश्योरेंस में कमीशन का नया खेल
नियामक ने बीमा एजेंटों और डिस्ट्रीब्यूटर्स के कमीशन (Agent Commission) स्ट्रक्चर में भी भारी बदलाव का खाका खींचा है:
- थर्ड-पार्टी मोटर बीमा: इस तरह के जरूरी कवर पर अब बहुत कम या बिल्कुल भी कमीशन न देने का प्रस्ताव रखा गया है।
- लोन-लिंक्ड इंश्योरेंस: जो बैंक या लेंडर लोन के साथ बीमा बेचते हैं, उनके कमीशन को 2% से 5% तक सीमित (Cap) किया जा सकता है।
- लाइफ इंश्योरेंस: IRDAI चाहता है कि डिस्ट्रीब्यूटर सिर्फ नई पॉलिसी बेचने (और पहले साल का मोटा कमीशन खाने) पर ध्यान न दें, बल्कि वे पॉलिसी को लंबे समय तक चालू रखवाने (Renewal) में भी ग्राहकों की मदद करें। इसलिए प्रीमियम भुगतान अवधि (PPT) के हिसाब से अलग-अलग कमीशन तय किया जाएगा। सिंगल-प्रीमियम पॉलिसी पर कमीशन भी कम किया जाएगा।
हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस को लेकर क्या हैं प्रस्ताव?
- हेल्थ इंश्योरेंस: नई हेल्थ पॉलिसी बेचने पर एजेंट का कमीशन अधिकतम 15% से 20% तक तय किया जा सकता है। वहीं, अगर ग्राहक पॉलिसी रिन्यू कराता है या दूसरी कंपनी में पोर्ट (Port) कराता है, तो एजेंट को 5% से 10% तक ही कमीशन मिलेगा।
- पर्सनल एक्सीडेंट कवर: मोटर इंश्योरेंस में पर्सनल एक्सीडेंट कवर पर एजेंट के कमीशन को 5% से 10% तक सीमित किया जाएगा।
- टर्म इंश्योरेंस: प्योर-टर्म इंश्योरेंस में ग्राहक द्वारा प्रीमियम भुगतान के तरीके (मासिक, छमाही, सालाना) के आधार पर एजेंट का कमीशन तय होगा।
बीमा सुगम और बिना मोबाइल नंबर दिए चेक कर सकेंगे प्रीमियम
IRDAI ने बीमा कंपनियों की वेबसाइट्स पर इस्तेमाल होने वाले ‘डार्क पैटर्न’ (Dark Patterns) पर भी सख्त रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है। अब कोई भी वेबसाइट किसी पॉलिसी की कीमत, प्रीमियम या उसके फीचर्स दिखाने से पहले ग्राहक का मोबाइल नंबर या निजी जानकारी (Personal Data) नहीं मांग सकेगी।
इसके अलावा, बीमा खरीदने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और आसान बनाने के लिए ‘बीमा सुगम’ (Bima Sugam) प्लेटफॉर्म को एक मजबूत डिजिटल मार्केटप्लेस के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि ग्राहकों को सभी कंपनियों के प्लान एक ही जगह मिल सकें।
ध्यान दें: फिलहाल ये सिर्फ प्रस्ताव हैं और अंतिम नियम नहीं हैं। IRDAI ने इन प्रस्तावों पर सभी हितधारकों से 25 अक्टूबर 2026 तक उनकी प्रतिक्रियाएं मांगी हैं। इसके बाद ही इन्हें लागू किया जाएगा।






