PM Modi US Iran Peace Deal: अमेरिका-ईरान शांति समझौते का पीएम मोदी ने किया स्वागत, जानिए भारत के लिए क्यों है यह बड़ी खुशखबरी?

पश्चिम एशिया से सोमवार को एक बेहद बड़ी और राहत भरी खुशखबरी सामने आई है। ईरान और अमेरिका के बीच पिछले 4 महीनों से जारी भीषण जंग अब आखिरकार खत्म होने जा रही है। दोनों देशों के बीच एक शांति समझौते पर सहमति बन गई है, जिसकी पुष्टि अमेरिका और ईरान दोनों ने कर दी है। इस ऐतिहासिक खबर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) का रिएक्शन भी सामने आया है। उन्होंने इस कदम पर खुशी जताते हुए इसका पुरजोर स्वागत किया है।
पीएम मोदी ने उम्मीद जताई है कि इस समझौते से न केवल पश्चिम एशिया में स्थिरता वापस आएगी, बल्कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी एक बार फिर से सुनिश्चित हो सकेगी।
पीएम मोदी ने ‘X’ पर दी प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के जरिए इस समझौते पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जोर देते हुए बताया कि कैसे इस युद्ध ने पूरी दुनिया को आर्थिक मोर्चे पर परेशान कर रखा था।
पीएम मोदी ने लिखा:
“मैं पश्चिम एशिया में संघर्ष को समाप्त करने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करता हूं। इस युद्ध की वजह से दुनिया के कई देशों में आर्थिक संकट पैदा हुआ और कई निर्दोष लोगों की जानें भी गईं।”
समुद्री व्यापार पर पीएम का जोर पीएम मोदी ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने की ओर संकेत करते हुए आगे लिखा:
“भारत को उम्मीद है कि इस डील से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने में मदद मिलेगी और समुद्री आवाजाही और व्यापार करने की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी। हम अन्य मुद्दों पर बातचीत के जरिए एक स्थायी अंतिम समझौते तक पहुंचने की उम्मीद करते हैं।”
भारत के लिए क्यों बेहद अहम है यह शांति समझौता?
अमेरिका और ईरान के बीच हुआ यह शांति समझौता भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक, दोनों मोर्चों पर एक बहुत बड़ी राहत लेकर आया है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुलना: युद्ध शुरू होने के बाद से ही दुनिया के सबसे प्रमुख जलमार्गों में से एक ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ लगभग ठप पड़ा था। यहां से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई थी, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन टूट गई थी।
- कच्चे तेल (Crude Oil) का आयात: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल विदेशों (मुख्य रूप से खाड़ी देशों) से आयात करता है।
- ईंधन संकट से मिलेगी राहत: सप्लाई चेन में आई बाधा और युद्ध की स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार आसमान छू रही थीं। अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दोबारा खुलने से ईंधन की सुचारू सप्लाई सुनिश्चित होगी और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों (ईंधन संकट) से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर यह डील दुनिया के साथ-साथ भारत की अर्थव्यवस्था को भी वापस पटरी पर लाने में एक ‘बूस्टर’ का काम करेगी।






