Gold Smuggling Route: कैसे कोलकाता से छत्तीसगढ़ आ रहा है विदेशी सोना? DRI और ED की रडार पर 260 करोड़ का नेटवर्क

स्वतंत्रता दिवस में अलर्ट के कारण गुरुवार को (Gold Smuggling Route) रायपुर और नागपुर रेलवे सुरक्षा बल क्राइम ब्रांच की टीम ने DRI (राजस्व खुफिया निदेशालय) के साथ मिलकर हावड़ा-मुंबई दुरंतो एक्सप्रेस से 1.242 किलो सोना जब्त किया है।
ट्रेन के बी-12 कोच में तलाशी के दौरान 7 सोने के बिस्किट और एक सोने की छड़ बरामद किया गया, जिसकी कीमत करीब 2 करोड़ बताई जा रही है। इस गोल्ड के साथ महाराष्ट्र के सुरेश कुमार और धैर्यशील को भी गिरफ्तार किया गया है। (Gold Smuggling Route) यह पहली बार नहीं जब छत्तीसगढ़ में विदेशी सोने की तस्करी का मामला सामने आया है। वर्ष 2016 में रायपुर में राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) का जोनल कार्यालय शुरू होने के बाद से अब तक 37 किलो सोना और 5 हजार किलो से ज्यादा चांदी जब्त की गई। जांच एजेंसियों लगातार आरोपियों पर कार्रवाई कर रही है। लेकिन छत्तीसगढ़ में सोना तस्करी रुकने का नाम नहीं ले रही है। 25 से ज्यादा तस्करों को किया जा चुका गिरफ्तार
डीआरआई के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले छह वर्षों में 25 से अधिक तस्करों (Gold Smuggling Route) को गिरफ्तार किया गया है। जब्त किए गए सोने की कीमत डीआरआई अधिकारियों द्वारा करोड़ो की बताई जा रही है।इस रूट से हो रही सोने की तस्करी
जांच एजेंसियों के अनुसार, तस्करी का सोना बांग्लादेश और म्यांमार से कोलकाता पहुंचता था।
इसके बाद इसे सड़क और रेल मार्ग के जरिए छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों में पहुंचाया जाता है।
छत्तीसगढ़ में रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव इस नेटवर्क के प्रमुख केंद्र बन गए थे। यहां से सोना मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा तक पहुंचाया जाता था।
तस्करों ने बनाया था पूरा डिलीवरी नेटवर्क
डीआरआई की जांच में अब तक सामने आया है, कि तस्करी का पूरा नेटवर्क कई स्तरों पर काम करता था। इसमें सरगना, सप्लायर, पैडलर और स्थानीय खरीदार शामिल थे।
पैडलर का काम केवल माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना होता था। गिरोह के सदस्य माल को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग लोगों के जरिए भेजते थे, ताकि पकड़े जाने की स्थिति में नुकसान कम हो।
हुलिया बदलकर करते थे तस्करी
तस्कर पुलिस और जांच एजेंसियों से बचने के लिए लगातार नए तरीके अपनाते थे। कभी सोने को बेल्ट में छिपाया जाता था तो कभी बैग, तकिए, टिफिन, कमरबंद और अंडरगारमेंट में रखकर परिवहन किया जाता था। अधिकांश मामलों में रेल और सड़क मार्ग का इस्तेमाल किया गया। सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान
विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने की तस्करी से केंद्र सरकार को सीमा शुल्क और जीएसटी के रूप में मिलने वाले राजस्व का बड़ा नुकसान होता है। तस्करी का सोना बिना बिल और दस्तावेज के कम कीमत पर बेचा जाता है। इससे वैध कारोबार भी प्रभावित होता है।
सूचना देने वालों को मिलता है इनाम
डीआरआई ने तस्करी रोकने के लिए सूचना तंत्र को भी मजबूत किया है। विभाग की ओर से तस्करी से संबंधित सटीक सूचना देने वाले व्यक्ति को जब्त माल की कीमत का 20 प्रतिशत तक इनाम देने का प्रावधान है। साथ ही, सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
ED जब्त कर चुकी संपत्ति
गोल्ड तस्करी के मामलें में DRI के अलावा ईडी ने भी छत्तीसगढ़ (Gold Smuggling Route) के कारोबारियों पर कार्रवाई की है। ED की जांच में दुबई का 260 करोड़ का सोना छत्तीसगढ़ में खपाए जाने का इनपुट है।
ED के अफसरों ने गोल्ड तस्करी सिंडिकेट में शामिल छत्तीसगढ़ के कारोबारियों कीअब तक 64 करोड़ 14 लाख करोड़ की संपत्तियां जब्त/अटैच की जा चुकी हैं। इस मामलें में ED की जांच अभी भी जारी है।






