Manikpur Pokhari Korba: बंद कोयला खदान बनेगी 45 करोड़ का पर्यटन केंद्र, जिपलाइन से फ्लोटिंग रेस्तरां तक मिलेंगी सुविधाएं

CG News (कोरबा): Manikpur Pokhari Korba अब शहर की नई पहचान बनने जा रही है। जिला प्रशासन और साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की साझा पहल से इस ऐतिहासिक पोखरी को पर्यटन और मनोरंजन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। पहले इस योजना का बजट 11 करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर अब 45 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
कोरबा की पहली ओपनकास्ट खदान थी मानिकपुर
मानिकपुर पोखरी कभी कोरबा जिले की पहली ओपनकास्ट कोयला खदान थी। करीब 23 एकड़ में फैली इस खदान में 1966 में सोवियत रूस की तकनीकी मदद से खनन शुरू हुआ था। करीब 24 साल तक खुदाई के बाद जब खदान 100 मीटर गहरी हुई, तब अचानक जमीन से पानी का तेज स्रोत फूट पड़ा और खदान पानी में डूब गई।
बंद खदान बनी हरी झील
1990-91 में खदान का यह हिस्सा बंद कर दिया गया। अब यह करीब 1 किलोमीटर लंबी और 300 मीटर चौड़ी खूबसूरत झील बन चुकी है, जिसका पानी दूर से हरे रंग का दिखता है। अभी तक इसका इस्तेमाल सिर्फ निस्तारी और त्योहारों पर मूर्ति विसर्जन के लिए होता था।
पर्यटकों को मिलेंगी ये सुविधाएं
- जिपलाइन, क्लाइंबिंग और रैपेलिंग वॉल
- रोलर राइडर और म्यूजिकल फाउंटेन
- बच्चों के लिए पार्क और प्ले जोन
- फैमिली चौपाटी और फ्लोटिंग रेस्तरां
- मॉडर्न कैफेटेरिया, सेल्फी जोन और वॉक वे
कलेक्टर ने क्या कहा?
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बताया कि यह विकास SECL के माइन क्लोजर प्लान के तहत किया जा रहा है। SECL ने 40 करोड़ से ज्यादा की योजना पेश की है और अभी इसकी निविदा प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है कि अगले 3 महीने में वर्क ऑर्डर जारी कर काम शुरू हो जाएगा।
सालों से अटकी थी योजना
यह परियोजना तत्कालीन कलेक्टर रानू साहू के कार्यकाल में शुरू हुई थी, लेकिन बाद में फाइल अटक गई। अब कलेक्टर दुदावत ने पोखरी का निरीक्षण कर इसे प्राथमिकता से आगे बढ़ाया है। इससे शहर के लोगों को पास में ही नया पर्यटन स्थल मिलेगा और स्थानीय युवाओं को रोजगार के मौके भी मिलेंगे।
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