Kabirdham Dhan Scam: कबीरधाम में बड़ा धान घोटाला? कागजों में 70 हजार क्विंटल पेंडिंग, लेकिन उपार्जन केंद्र पूरी तरह खाली

कबीरधाम। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में धान खरीदी और उसके उठाव को लेकर एक बड़े फर्जीवाड़े और घोटाले की बू आने लगी है। जिले के कई धान उपार्जन केंद्रों (Paddy Procurement Centers) में दर्ज सरकारी स्टॉक और जमीनी हकीकत के बीच एक भारी अंतर देखने को मिल रहा है। जिन केंद्रों पर कुछ महीने पहले तक धान की बोरियों के ऊंचे-ऊंचे ढेर लगे हुए थे, वहां अब धान का एक भी बोरा नजर नहीं आ रहा है। सबसे हैरानी की बात यह है कि केंद्रों के खाली होने के बावजूद विभागीय रिकॉर्ड में अब भी 70 हजार क्विंटल धान का उठाव ‘लंबित’ (Pending) बताया जा रहा है।
ग्राउंड रिपोर्ट में खुली दावों की पोल
मीडिया (ईटीवी भारत) की टीम ने जब इस पूरे मामले की हकीकत जानने के लिए जमीनी स्तर पर पड़ताल की, तो स्थिति बेहद चौंकाने वाली मिली।
- टीम ने जिले के सूरजपुर, पेंड्रीकला, जुनवानी, रणवीरपुर, ऊसरवाही, समनापुर, तरेतगांव, कोदवागोड़ान और धरमगढ़ सहित कई उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण किया।
- निरीक्षण के दौरान ये अधिकांश केंद्र पूरी तरह से खाली पाए गए।
- जबकि, सरकारी दस्तावेजों और विभाग के रिकॉर्ड में इन केंद्रों पर करीब 70 हजार क्विंटल धान का उठाव शेष दर्ज है। रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति का यह भारी अंतर सीधे तौर पर एक बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है।
कलेक्टर की समीक्षा और विभाग का अल्टीमेटम
जिला प्रशासन ने मई माह के अंत तक धान उठाव की प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य तय किया था। इस संबंध में जिले के कलेक्टर ने हाल ही में एक सख्त समीक्षा बैठक भी ली थी।
- खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि धान उठाव की प्रक्रिया अभी जारी है।
- विभाग के मुताबिक, भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के दौरान जिन केंद्रों में स्टॉक में कमी पाई गई है, वहां के केंद्र प्रभारियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर इस कमी की भरपाई करने का अवसर दिया गया है।
- यदि तय समय में धान का पूरा स्टॉक जमा नहीं किया गया, तो संबंधित केंद्र प्रभारियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विपक्ष ने बोला हमला, मिलीभगत के लगाए आरोप
इस मामले के सामने आते ही जिले की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष ने सत्ता पक्ष और प्रशासनिक अधिकारियों पर सीधा निशाना साधते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह गड़बड़ी बिना अधिकारियों की मिलीभगत के संभव नहीं है। उपार्जन केन्द्र प्रभारियों को ऊपर से संरक्षण दिया जा रहा है और कागजों में हेरफेर कर करोड़ों रुपये के धान का भ्रष्टाचार किया गया है।
अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। 70 हजार क्विंटल धान के रिकॉर्ड में होने और जमीन से गायब रहने का यह मामला अब किसानों, जनप्रतिनिधियों और आम लोगों के बीच भारी चर्चा का विषय बन गया है।



