झीरम घाटी मामले में नया मोड़, 10 दोषियों की सजा को हाईकोर्ट में चुनौती

जगदलपुर: छत्तीसगढ़ के चर्चित झीरम घाटी मामले में विशेष NIA अदालत के फैसले के बाद अब कानूनी लड़ाई हाईकोर्ट तक पहुंच गई है। बचाव पक्ष की ओर से 10 दोषियों को सुनाई गई मृत्युदंड की सजा के खिलाफ छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपील की अर्जी दायर की गई है। यह जानकारी 24 सितंबर को सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार बचाव पक्ष के वकील अरविंद चौधरी ने दोषियों के परिजनों से चर्चा के बाद हाईकोर्ट में अपील की अर्जी दाखिल की है। अब आगे की प्रक्रिया में हाईकोर्ट की ओर से नोटिस और मामले की सुनवाई से जुड़ी कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
NIA अदालत ने सुनाई थी मृत्युदंड की सजा
झीरम घाटी मामले में विशेष NIA अदालत ने सुनवाई के बाद 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। इसके बाद सजा के निर्धारण की प्रक्रिया पूरी हुई और अदालत ने सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई।
मामले की सुनवाई के दौरान कुल 11 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई चली थी। ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई, जिसके बाद बाकी 10 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही।
रिपोर्ट के अनुसार NIA ने वर्ष 2015 में करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट पेश की थी। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
अब बचाव पक्ष ने अदालत के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की प्रक्रिया शुरू की है।
2013 में हुआ था झीरम घाटी हमला
झीरम घाटी की घटना 25 मई 2013 को हुई थी। उस समय कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला सुकमा के दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी से गुजर रहा था।
NIA के रिकॉर्ड के अनुसार शाम करीब 4:15 बजे काफिले को निशाना बनाया गया। हमले में बड़ी संख्या में लोग मारे गए और कई घायल हुए।
इस घटना में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की मौत हुई थी। इनमें तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा और पूर्व विधायक उदय मुदलियार सहित कई लोग शामिल थे।
यह घटना छत्तीसगढ़ के राजनीतिक और सुरक्षा इतिहास की सबसे गंभीर घटनाओं में गिनी जाती है।
अदालत के फैसले के बाद अब हाईकोर्ट की प्रक्रिया
निचली अदालत के फैसले के बाद किसी भी दोषी पक्ष के पास उच्च न्यायालय में अपील का कानूनी रास्ता उपलब्ध होता है। झीरम मामले में बचाव पक्ष ने इसी प्रक्रिया के तहत हाईकोर्ट में अपील की अर्जी दायर की है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि अपील दाखिल होना निचली अदालत के फैसले के अंतिम रूप से लागू हो जाने के समान नहीं है। उच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई के बाद आगे की न्यायिक स्थिति तय होगी।
इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि मृत्युदंड की सजा का अंतिम परिणाम क्या होगा।
मामले में आगे क्या हो सकता है?
हाईकोर्ट में अपील की प्रक्रिया के दौरान रिकॉर्ड, निचली अदालत के फैसले, अभियोजन और बचाव पक्ष के तर्क तथा उपलब्ध साक्ष्यों पर न्यायिक परीक्षण होगा।
अदालत की प्रक्रिया के दौरान दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। इसके बाद हाईकोर्ट मामले में आगे का आदेश जारी करेगा।
फिलहाल बचाव पक्ष की ओर से अपील दायर किए जाने की जानकारी सामने आई है और अगली कानूनी प्रक्रिया का इंतजार है।
झीरम मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
झीरम घाटी हमला केवल एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक ऐतिहासिक घटना है। हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं समेत अन्य लोगों की मौत हुई थी।
घटना के बाद वर्षों तक जांच, न्यायिक प्रक्रिया और राजनीतिक बहस चलती रही। अब विशेष NIA अदालत के फैसले के बाद मामला उच्च न्यायालय की प्रक्रिया में पहुंच गया है।
इस मामले में आगे होने वाली हर न्यायिक कार्रवाई का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि घटना को कई वर्ष बीत चुके हैं और पीड़ित परिवार लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े रहे हैं।
अब हाईकोर्ट के अगले कदम पर नजर
झीरम घाटी मामले में बचाव पक्ष की अपील दाखिल होने के बाद अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। अदालत अपील पर सुनवाई से संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।






