Jashpur Apple Farming: जशपुर में सेब की खेती से बदल रही किसानों की किस्मत, बंजर जमीन पर उगा रहे ‘लाल सोना’

Jashpur Apple Farming;रायपुर। छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) का जशपुर जिला (Jashpur District), जो कभी सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पहाड़ियों के लिए जाना जाता था, अब कृषि के क्षेत्र में एक नई क्रांति का गवाह बन रहा है। राज्य सरकार की जनसंपर्क विभाग (DPRCG) की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, जशपुर के किसान अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर सेब की खेती (Apple Farming) कर रहे हैं। सेब की खेती ने न केवल यहां की बंजर जमीनों को हरे-भरे बागानों में बदल दिया है, बल्कि किसानों की आय दोगुनी कर उनकी किस्मत भी चमका दी है।
कैसे शुरू हुई जशपुर में सेब की खेती?
जशपुर का मौसम और भौगोलिक स्थिति अन्य जिलों से थोड़ी अलग और ठंडी है। इसी का फायदा उठाते हुए यहां एक विशेष किस्म के सेब का परीक्षण किया गया:
- HRMN-99 किस्म का कमाल: जशपुर में सेब की जो किस्म उगाई जा रही है, उसका नाम HRMN-99 है। इसे हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर निवासी ‘एप्पल मैन’ हरिमन शर्मा (Hariman Sharma) ने विकसित किया था।
- गर्म जलवायु के अनुकूल: यह किस्म विशेष रूप से उन इलाकों के लिए विकसित की गई है, जहां का तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। इसी कारण यह जशपुर की जलवायु में शानदार तरीके से पनप रही है।
- शुरुआती प्रयोग: उद्यानिकी विभाग (Horticulture Department) के मार्गदर्शन में कुछ साल पहले जशपुर के बगीचा और कांसाबेल विकासखंडों में इसका प्रयोग शुरू किया गया था, जो पूरी तरह सफल रहा।
किसानों की आय में भारी उछाल
सेब की खेती से जशपुर के किसानों को सीधा आर्थिक लाभ हो रहा है:
- बंजर जमीन का उपयोग: जिन पथरीली और बंजर जमीनों पर पहले कुछ नहीं उगता था, आज वहां सेब के लहलहाते पेड़ खड़े हैं।
- प्रति पेड़ बंपर पैदावार: तीन से चार साल पुराने एक पेड़ से औसतन 20 से 30 किलो सेब की पैदावार हो रही है।
- लाखों की कमाई: स्थानीय बाजार में यह सेब 100 से 150 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। एक एकड़ में सेब की खेती करने वाले किसान अब सालाना लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं।
सरकार का सहयोग और भविष्य की योजनाएं
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (CM Vishnu Deo Sai) के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों को बागवानी की तरफ मोड़ने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है।
- सरकारी अनुदान: उद्यानिकी विभाग के माध्यम से किसानों को सेब के पौधे, ड्रिप इरिगेशन सिस्टम और फर्टिलाइजर के लिए सब्सिडी प्रदान की जा रही है।
- ट्रेनिंग और तकनीकी मदद: किसानों को समय-समय पर विशेषज्ञों द्वारा ट्रेनिंग दी जा रही है।
जशपुर में सेब की खेती की यह सफलता राज्य के अन्य किसानों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बन गई है। यह साबित करता है कि सही तकनीकी मार्गदर्शन और मजबूत इच्छाशक्ति से बंजर जमीन से भी ‘लाल सोना’ उगाया जा सकता है।



