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ED Raid CGPSC Scam: छत्तीसगढ़ में 7 ठिकानों पर ED की तलाशी, CGPSC मामले में जांच तेज

रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग से जुड़ी कथित भर्ती अनियमितताओं की जांच में प्रवर्तन निदेशालय ने मंगलवार को कार्रवाई तेज की है। ED Raid CGPSC Scam मामले में जांच एजेंसी राज्य में कुल सात ठिकानों पर तलाशी कर रही है। जांच के दायरे में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तत्कालीन निजी सहायक केके चंद्राकर से जुड़ा परिसर भी शामिल बताया गया है। कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम यानी PMLA के तहत चल रही जांच का हिस्सा है।

मंगलवार सुबह शुरू हुई इस कार्रवाई को लेकर शुरुआती स्तर पर जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार जांच एजेंसी कथित CGPSC भर्ती अनियमितता मामले से जुड़े वित्तीय पहलुओं की पड़ताल कर रही है। तलाशी के दौरान क्या दस्तावेज या सामग्री मिली है, इस संबंध में अंतिम आधिकारिक निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।

सात ठिकानों पर चल रही तलाशी

मीडिया रिपोर्टों में जांच अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि प्रवर्तन निदेशालय की टीमें छत्तीसगढ़ में सात स्थानों पर तलाशी कर रही हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निजी सहायक रहे केके चंद्राकर से जुड़ा परिसर भी शामिल है।

इस कार्रवाई को किसी व्यक्ति के दोषी साबित होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। तलाशी जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और संबंधित आरोपों पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष सक्षम अदालत और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निर्धारित होगा।

किस मामले की जांच कर रही ED?

मामला छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की कुछ भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। जांच एजेंसियों के सामने पूर्व में भर्ती प्रक्रिया में पक्षपात, कुछ उम्मीदवारों के चयन और कथित वित्तीय लेनदेन को लेकर आरोप सामने आए थे।

Moneycontrol की रिपोर्ट के मुताबिक जांच का संबंध मुख्य रूप से 2020 से 2022 के बीच की CGPSC भर्तियों से जुड़े आरोपों से है। प्रवर्तन निदेशालय इस मामले के आर्थिक और मनी लॉन्ड्रिंग पहलू की जांच कर रहा है।

यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि ये जांच एजेंसी की ओर से लगाए या जांचे जा रहे आरोप हैं। न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक संबंधित व्यक्तियों को दोषी घोषित नहीं किया जा सकता।

पूर्व CGPSC अध्यक्ष भी जांच के दायरे में

इस प्रकरण में पूर्व CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी के खिलाफ भी जांच एजेंसियां कार्रवाई कर चुकी हैं। रिपोर्ट के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें पहले गिरफ्तार किया था और कथित वित्तीय लेनदेन समेत मामले के विभिन्न पहलुओं को लेकर पूछताछ की गई थी।

ईडी की मौजूदा कार्रवाई इसी व्यापक जांच को आगे बढ़ाने के रूप में देखी जा रही है। सात ठिकानों की तलाशी से जांच एजेंसी वित्तीय रिकॉर्ड, संभावित लेनदेन और अन्य संबंधित दस्तावेजों के बारे में जानकारी जुटा सकती है। हालांकि मंगलवार सुबह तक तलाशी से हुई बरामदगी के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं थी।

CBI की FIR से जुड़ा है मनी लॉन्ड्रिंग केस

रिपोर्ट के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय की मनी लॉन्ड्रिंग जांच का आधार 2024 में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी CBI द्वारा दर्ज FIR है। CBI की जांच भी CGPSC की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से संबंधित है।

PMLA के तहत ED सामान्य तौर पर यह जांच करती है कि किसी अनुसूचित अपराध से कथित रूप से अपराध की आय पैदा हुई या नहीं, ऐसी रकम का लेनदेन किस तरह हुआ और क्या उससे संबंधित संपत्तियों या वित्तीय गतिविधियों का कोई लिंक सामने आता है।

इसी कारण मौजूदा तलाशी का केंद्र केवल भर्ती प्रक्रिया नहीं, बल्कि उसके कथित आर्थिक पहलुओं पर भी है।

पुराने भर्ती मामलों पर फिर बढ़ी हलचल

CGPSC भर्ती विवाद पिछले कुछ वर्षों से छत्तीसगढ़ के प्रमुख प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दों में शामिल रहा है। विभिन्न स्तरों पर जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई भी सामने आती रही है।

1 सितंबर की कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब ED ने जांच को कई ठिकानों तक विस्तारित किया है। आने वाले समय में तलाशी के आधार पर किसी को पूछताछ के लिए बुलाया जाता है या कोई नया दस्तावेज जांच में शामिल होता है, इसका पता एजेंसी की आधिकारिक जानकारी के बाद ही चलेगा।

अभी किन बातों का इंतजार?

इस समय तीन प्रमुख जानकारियों का इंतजार है, सातों तलाशी स्थलों का पूरा विवरण, कार्रवाई के दौरान बरामद सामग्री या दस्तावेजों की आधिकारिक जानकारी और जांच एजेंसी की आगे की प्रक्रिया।

सुबह सामने आई खबरों में यह बताया गया है कि तलाशी जारी है और अधिक विवरण की प्रतीक्षा की जा रही है। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे अपुष्ट दावों को अंतिम तथ्य मानने से बचना जरूरी है।

इस मामले से संबंधित आगे की खबर में जांच एजेंसी का आधिकारिक बयान, संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया और अदालत में होने वाली कानूनी कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।

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