Chhattisgarh High Court: जंगलों के 10 KM दायरे में नहीं चलेंगी आरा मशीनें; हाईकोर्ट ने 19 याचिकाएं खारिज कर कहा- “पर्यावरण से खिलवाड़ मंजूर नहीं”

State News (Bilaspur): छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (Chhattisgarh High Court) ने जंगलों और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए एक बेहद अहम फैसला सुनाया है।
हाईकोर्ट ने अधिसूचित (Notified) जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों से 10 किलोमीटर के दायरे में आरा मिलों (लकड़ी चीरने की मशीनों) के संचालन पर लगी रोक को बरकरार रखा है। अदालत ने इस मामले में मिल संचालकों द्वारा दायर 19 अलग-अलग याचिकाओं को खारिज करते हुए राज्य सरकार के फैसले को पूरी तरह वैध और जरूरी माना है।
खबर की मुख्य बातें (Chhattisgarh High Court)
- क्या है फैसला: जंगलों से 10 KM के दायरे (बफर जोन) में आरा मिलों के संचालन और उनके लाइसेंस नवीनीकरण पर रोक जारी रहेगी।
- याचिकाएं खारिज: शाही ट्रेडर्स, अग्रवाल सॉ मिल सहित कई लकड़ी उद्योग संचालकों की 19 याचिकाएं HC ने खारिज कीं।
- सरकार की दलील: अवैध कटाई रोकने और जंगलों को बचाने के लिए यह फैसला लिया गया है।
- हाईकोर्ट की टिप्पणी: राज्य में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना सबसे जरूरी, बड़े शहरों जैसा प्रदूषण नहीं होने देंगे।
क्या है पूरा मामला और सरकार का आदेश?
यह पूरा मामला उस अधिसूचना से जुड़ा है, जिसे राज्य सरकार ने 25 सितंबर 2025 को छत्तीसगढ़ काष्ठ चिरान (विनियमन) अधिनियम, 1984 की धारा 5(1) के तहत जारी किया था।
इस अधिसूचना के अनुसार, अधिसूचित जंगलों और संरक्षित वन क्षेत्रों से हवाई दूरी के आधार पर 10 किलोमीटर तक के क्षेत्र (Buffer Zone) को तीन वर्षों के लिए प्रतिबंधित घोषित किया गया था। आदेश के बाद वन विभाग ने इस दायरे में आने वाली आरा मिलों (Saw Mills) को बंद करने और उनका लाइसेंस रिन्यू (Renew) न करने का आदेश जारी किया था। इसके खिलाफ 19 मिल संचालकों ने Chhattisgarh High Court का दरवाजा खटखटाया था।
मिल संचालकों की दलील और सरकार का जवाब
मिल संचालकों का तर्क था: उनकी आरा मशीनें साल 1996 से पहले से वैध लाइसेंस के साथ चल रही हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के टी.एन. गोदावर्मन थिरुमुल्पद मामले का हवाला देते हुए कहा कि पुराने लाइसेंसधारी प्रतिष्ठानों को अचानक बंद करना न्यायसंगत नहीं है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और कर्मचारियों पर बुरा असर पड़ेगा।
राज्य सरकार ने जवाब दिया: जंगलों के आसपास लकड़ी आधारित गतिविधियों पर लगाम लगाना बहुत जरूरी है। यह रोक केवल उद्योगों को सीमित करने के लिए नहीं, बल्कि अवैध कटाई रोकने और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए है। सरकार ने यह भी बताया कि नगर निगम/नगर पालिका की सीमा और औद्योगिक क्षेत्रों को इस प्रतिबंध से पहले ही छूट दी गई है।
हाईकोर्ट बोला- “जंगल सिर्फ लकड़ी का स्रोत नहीं”
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकल पीठ ने दोनों पक्षों की लंबी बहस सुनने के बाद राज्य सरकार के फैसले को उचित और तार्किक ठहराया। अदालत ने अपनी तल्ख टिप्पणी में कहा:
- “जंगल केवल लकड़ी का स्रोत नहीं हैं, बल्कि यह जलवायु संतुलन और जैव विविधता के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।”
- “पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक गतिविधियों के बीच संतुलन बनाना सरकार की जिम्मेदारी है।”
- “प्रदेश को ऐसी स्थिति से बचाना जरूरी है जहां पर्यावरण को अपूरणीय (कभी न भर पाने वाला) नुकसान पहुंचे।”
क्या होगा फैसले का असर?
Chhattisgarh High Court के इस फैसले के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि जंगलों के 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाली किसी भी आरा मिल को छूट नहीं मिलेगी और उन्हें बंद करना होगा। वन विभाग अब इन मिलों के खिलाफ अपनी आगे की कानूनी और मैदानी कार्रवाई बेरोकटोक जारी रख सकेगा। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर बस्तर, सरगुजा और गरियाबंद जैसे घने वन क्षेत्रों वाले जिलों में पड़ेगा।






