Chhattisgarh NewsExclusive

CG Congress Politics: क्या कांग्रेस में खत्म होगा बुजुर्गों का दौर? युवाओं को मौका देने की उठी मांग

क्या देश की सबसे पुरानी पार्टी की राजनीति में उम्रदराज नेताओं का समय अब पूरी तरह से समाप्त होने वाला है? दरअसल एक बार फिर से यह गंभीर बहस छिड़ गई है कि संगठन की कमान अब पूरी तरह से युवाओं के हाथों में सौंपी जानी चाहिए। CG Congress Politics में इस ताजा विवाद की शुरुआत प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के उस बयान से हुई है जिसमें उन्होंने पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव को दिल्ली जाने की स्पष्ट नसीहत दी है। परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ के साथ-साथ मध्य प्रदेश और राजस्थान के दिग्गज नेताओं के राजनीतिक भविष्य पर भी कई बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं।

छत्तीसगढ़ और राजस्थान में 2 पावर सेंटर की स्थिति

प्रदेश में टीएस सिंहदेव चरणदास महंत और कवासी लखमा जैसे दिग्गज नेता मौजूद हैं जिनका आज भी सियासत में एक बड़ा और गहरा प्रभाव है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक उचित शर्मा का मानना है कि भाजपा का मुकाबला करने के लिए पार्टी को अपने निष्क्रिय खातों को अब बंद करना होगा। इसके अलावा राजस्थान में भी अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच वर्चस्व की लड़ाई लंबे समय से चल रही है। वहां भी 2 पावर सेंटर लगातार काम कर रहे हैं जिससे संगठन को हमेशा नुकसान उठाना पड़ता है और सत्ता की हिस्सेदारी पर बहस होती रहती है।

मध्य प्रदेश में युवाओं को कमान और 50 प्रतिशत फॉर्मूला

पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश भी दशकों से चले आ रहे दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के प्रभाव से पूरी तरह उबर नहीं पाया है। दरअसल वहां आज भी कई नेता इन्हीं 2 दिग्गजों की कृपा पर निर्भर हैं जिनमें से एक सांसद हैं तो एक विधायक हैं। हालांकि वहां जीतू पटवारी को प्रदेश अध्यक्ष और उमंग सिंघार को नेता प्रतिपक्ष बनाकर युवा राजनीति की एक नई शुरुआत जरूर की गई है।

संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि पार्टी में 50 प्रतिशत पदों पर युवाओं को मौका देने की गाइडलाइन पर तेजी से काम चल रहा है। दरअसल जानकारों का भी यह स्पष्ट मानना है कि भाजपा के मजबूत संगठन से लड़ने के लिए युवाओं के हाथों में सक्रिय बागडोर और बुजुर्गों के पास सिर्फ मार्गदर्शन की जिम्मेदारी होनी चाहिए।

Related Articles

Back to top button