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Bhanupratappur Ganja Farming: अरहर की आड़ में पनप रहा था ‘सफेद जहर’, खेत से उखाड़े गए 844 गांजे के पौधे, 4.25 लाख का माल जब्त

छत्तीसगढ़ में पुलिस का गांजे की अवैध खेती और तस्करी (Bhanupratappur Ganja Farming) के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। इसी कड़ी में कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर थाना क्षेत्र के ग्राम भूसरासटहुल में पुलिस ने एक खेत में दबिश देकर गांजे की अवैध खेती का बड़ा खुलासा किया है। आरोपी किसान ने पुलिस और ग्रामीणों की नजरों से बचने के लिए बेहद शातिराना तरीका अपनाया था; उसने गांजे के पौधे अरहर और चेंच भाजी की फसल के ठीक बीच में लगाए थे। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में गांजे के पौधे जब्त कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

अरहर और चेंच भाजी के बीच छिपा था गांजा, Bhanupratappur Ganja Farming

मुखबिर से अवैध गांजे की खेती की पुख्ता सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने भूसरासटहुल गांव के उस खेत में दबिश दी।

  • शातिराना तरीका: आरोपी ने गांजे के पौधों को अलग से नहीं लगाया था, बल्कि उन्हें अरहर (तुअर) और चेंच भाजी की घनी फसल के बीच छिपाकर लगाया था ताकि सामान्य तौर पर किसी की नजर उन पर न पड़े।
  • जब्ती: पुलिस टीम ने खेत की बारीकी से तलाशी ली और मौके से गांजे के 844 पौधे उखाड़कर जब्त कर लिए।
  • वजन और कीमत: पुलिस के अनुसार, जब्त किए गए इन हरे पौधों का कुल वजन करीब 8.50 किलोग्राम है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 4.25 लाख रुपये आंकी गई है।

4 महीने पहले तैयार किए थे बीज, बेचने की थी पूरी तैयारी

Bhanupratappur Ganja Farming: कार्रवाई के दौरान पुलिस ने खेत के मालिक (किसान) को भी गिरफ्तार कर लिया है और उसके मोबाइल फोन को जांच के लिए जब्त कर लिया है। पूछताछ में आरोपी किसान ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं:

  • उसने गांजे की इस अवैध खेती के लिए करीब चार महीने पहले बीज तैयार किए थे।
  • इसके बाद बारिश के मौसम में खेत में उनकी रोपाई की गई थी।
  • आरोपी इन पौधों के बड़े होने के बाद, इनसे गांजा निकालकर उसे बेचने की पूरी तैयारी में था।

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (NDPS Act) के तहत गंभीर अपराध दर्ज कर लिया है।

नेटवर्क और गिरोह की तलाश में जुटी पुलिस, Bhanupratappur Ganja Farming

भारत में 1985 से ही NDPS एक्ट के तहत गांजे की खेती और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके बावजूद वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में चोरी-छिपे इसकी खेती की जा रही है। अब पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है:

  1. आरोपी किसान को इतनी बड़ी मात्रा में गांजे के उन्नत बीज कहां से मिले?
  2. इस अवैध खेती के पीछे किसी बड़े गिरोह या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं है?
  3. तैयार किए जा रहे गांजे को किन-किन तस्करों या किन शहरों में सप्लाई किया जाना था?

आपको बता दें कि कांकेर पुलिस पिछले कुछ महीनों से नशे के खिलाफ सख्त है। (Bhanupratappur Ganja Farming) इससे पहले 20 फरवरी को अंतागढ़ में 17 लाख रुपये, 7 अप्रैल को कोरनार में 16.50 लाख रुपये और 24 अप्रैल को मचांदुर में 48,500 रुपये का गांजा पुलिस द्वारा जब्त किया जा चुका है।

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