Baloda Belmundi Diamond Project: छत्तीसगढ़ बनेगा प्रमुख हीरा उत्पादक राज्य

छत्तीसगढ़ की आर्थिक प्रगति और खनिज विकास की दिशा में 1 बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। राज्य जल्द ही देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों की सूची में शीर्ष पर अपनी जगह बना सकता है। महासमुंद जिले में स्थित Baloda Belmundi Diamond Project (बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक) में हीरों की पुष्टि के बाद अब यहां खनन की दिशा में तेजी से काम शुरू हो गया है।
लार्ज डायमीटर ड्रिलिंग को मिली मंजूरी, Baloda Belmundi Diamond Project
छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह ने बताया कि खनिज संसाधनों का सही उपयोग उद्योगों के संतुलित विकास के लिए बहुत जरूरी है। हाल ही में एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (NCL) के निदेशक मंडल की बैठक हुई, जिसमें बलौदा-बेलमुंडी परियोजना के अगले चरण को हरी झंडी दे दी गई है। अब इस ब्लॉक में ‘लार्ज डायमीटर’ (Large Diameter) ड्रिलिंग शुरू करने का निर्णय लिया गया है। यह नई और उन्नत तकनीक किम्बरलाइट पाइप में मौजूद हीरों के वास्तविक भंडार का वैज्ञानिक और सटीक आकलन करने में मदद करेगी।
टेस्टिंग में मिले 1.22 कैरेट के 5 असली हीरे
Baloda Belmundi Diamond Project: NCL ने इस क्षेत्र में भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और लक्षित ड्रिलिंग के माध्यम से किम्बरलाइट पाइप की पहचान की थी। इसके बाद लगभग 200 टन बल्क सैंपल को निकालकर एनएमडीसी के पन्ना डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट में परीक्षण के लिए भेजा गया था। इस टेस्टिंग के दौरान 1.22 कैरेट के 5 प्राकृतिक हीरे प्राप्त हुए। इस शानदार नतीजे ने 100 प्रतिशत पुष्टि कर दी है कि महासमुंद के इस क्षेत्र में हीरा युक्त भू-संरचना मौजूद है। विस्तृत रिपोर्ट तैयार होने के बाद व्यावसायिक हीरा खदान विकसित करने पर अंतिम मुहर लगेगी।
लौह अयस्क परियोजनाओं के नए लक्ष्य तय
NCL के निदेशक मंडल के सदस्य अमिताभ मुखर्जी और आशीष चटर्जी की मौजूदगी में हुई इस बैठक में हीरों के साथ-साथ लौह अयस्क परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। बैलाडीला डिपॉजिट के लिए नए उत्पादन लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, जिन्हें आप नीचे देख सकते हैं:
| परियोजना का नाम | वर्तमान वित्तीय वर्ष का लक्ष्य | भविष्य की वार्षिक क्षमता का लक्ष्य |
| बैलाडीला डिपॉजिट 4 | 10 लाख टन | 70 लाख टन |
| बैलाडीला डिपॉजिट 13 | क्षमता विकास जारी | 1 करोड़ टन (100 लाख टन) |
बलौदा-बेलमुंडी की यह प्रारंभिक सफलता बोत्सवाना और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों की तरह छत्तीसगढ़ में बड़े व्यावसायिक भंडार मिलने का मजबूत संकेत दे रही है।






