CG Forest Plastic Ban: संरक्षित वनक्षेत्रों में प्लास्टिक कचरा फैलाने वालों की खैर नहीं; PCCF ने जारी किया जुर्माने का सख्त आदेश

छत्तीसगढ़ के संरक्षित वनक्षेत्रों (CG Forest Plastic Ban) को प्रदूषण मुक्त और साफ-सुथरा बनाए रखने के लिए वन विभाग ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है।
पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ मुख्यालय (PCCF Wildlife Headquarters), रायपुर ने जंगलों में सिंगल यूज प्लास्टिक (Single Use Plastic) ले जाने और कचरा फैलाने वालों के खिलाफ भारी जुर्माने का आदेश जारी किया है। 19 अगस्त 2026 को जारी इस नए आदेश के तहत अब जंगलों में प्लास्टिक कचरा फेंकते पाए जाने पर आम पर्यटकों से लेकर दुकानदारों और निर्माताओं तक पर कड़ा जुर्माना लगाया जाएगा।
खबर की मुख्य बातें (CG Forest Plastic Ban)
- प्रतिबंध लागू: संरक्षित वनक्षेत्रों में सिंगल यूज प्लास्टिक की बिक्री, वितरण और उपयोग पर पूर्ण रूप से रोक।
- जुर्माना तय: कचरा फैलाने पर आम लोगों पर 500 से 1000 रुपये तक का फाइन।
- दुकानदारों पर कड़ा एक्शन: वनक्षेत्र में कारोबार करने वाले अगर कचरा फैलाते हैं तो 25 हजार रुपये तक का जुर्माना।
- किसे मिला अधिकार: वन रक्षक (Forest Guard) से लेकर डिप्टी रेंजर तक को जुर्माना वसूलने का अधिकार दिया गया है।
जानिए किस पर लगेगा कितना जुर्माना? (CG Forest Plastic Ban)
वन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, प्लास्टिक कचरा फैलाने वालों पर अलग-अलग श्रेणियों में जुर्माने का प्रावधान किया गया है:
- आम पर्यटकों/व्यक्तियों के लिए: पहली बार प्लास्टिक कचरा फैलाते पकड़े जाने पर ₹500 का जुर्माना और दूसरी बार पकड़े जाने पर ₹1,000 का जुर्माना वसूला जाएगा।
- दुकानदारों के लिए: संरक्षित वनक्षेत्र के भीतर या आसपास कारोबार करने वाले दुकानदारों द्वारा प्लास्टिक कचरा फैलाए जाने पर ₹25,000 तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
- विनिर्माताओं (Manufacturers) के लिए: बड़े स्तर पर नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माताओं पर ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) तक जुर्माना वसूलने का कड़ा प्रावधान किया गया है।
क्यों उठाना पड़ा यह सख्त कदम?
वन विभाग को यह आदेश (CG Forest Plastic Ban) इसलिए जारी करना पड़ा क्योंकि संरक्षित वनक्षेत्रों में प्लास्टिक कचरे पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा था।
- वन्यजीवों की जान को खतरा: जंगल में फेंके गए प्लास्टिक कचरे (जैसे खाने के पैकेट) की गंध से शाकाहारी वन्यजीव आकर्षित होते हैं। प्लास्टिक खा लेने से जानवर गंभीर रूप से बीमार पड़ जाते हैं और उनमें जानलेवा संक्रमण फैलने का खतरा रहता है।
- पारिस्थितिकी तंत्र का नुकसान: नॉन-बायोडिग्रेडेबल (Non-biodegradable) प्लास्टिक मिट्टी और जंगल के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को खराब कर रहा था, जिसका सीधा असर अन्य वन्यजीवों और वनस्पतियों पर पड़ रहा है।
मध्य प्रदेश (MP) की तर्ज पर हो रहा काम
पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के सभी राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिजर्वों में सिंगल यूज प्लास्टिक (CG Forest Plastic Ban) पहले से ही पूरी तरह प्रतिबंधित है। वहां उल्लंघन करने पर ₹500 से ₹5000 तक का जुर्माना लगता है।
एमपी मॉडल के तहत, पर्यटकों की सुविधा के लिए पार्क प्रबंधन द्वारा बायोडिग्रेडेबल पानी की बोतलें और कपड़े के बैग सशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं। ये कपड़े के बैग स्थानीय स्व-सहायता समूहों (SHGs) द्वारा तैयार किए जाते हैं, जिससे ईको-टूरिज्म के साथ-साथ स्थानीय समुदाय को रोजगार भी मिलता है। छत्तीसगढ़ वन विभाग भी इसी दिशा में अपने जंगलों को प्लास्टिक मुक्त (CG Forest Plastic Ban)बनाने की तैयारी कर रहा है।






