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Bhatia Wine Factory Pollution: मुंगेली में भाटिया वाइन फैक्ट्री ने शिवनाथ नदी में घोला जहर, हजारों मछलियों की मौत

छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले से एक बेहद विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है जहाँ विकास के नाम पर विनाश का खेल खेला जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यहाँ स्थित भाटिया वाइन फैक्ट्री से निकलने वाले जहरीले स्पिरिट ने शिवनाथ नदी के पानी को जहर में तब्दील कर दिया है। परिणामस्वरूप, नदी में तैरती हजारों मृत मछलियाँ इस पर्यावरणीय अपराध की गवाह बन रही हैं। यह केवल जलीय जीवों की मौत नहीं है, बल्कि उन हजारों ग्रामीणों के जीवन पर भी सीधा प्रहार है जो इस नदी पर निर्भर हैं।

हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी और प्रशासनिक मिलीभगत

हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर मामले को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय पहले ही संज्ञान में ले चुका है। अदालत ने स्पष्ट रूप से फैक्ट्री को बंद करने और पर्यावरण विभाग से जवाब तलब करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद, ज़मीनी हकीकत यह है कि प्रशासनिक संरक्षण के चलते फैक्ट्री में शराब का उत्पादन धड़ल्ले से जारी है। प्रतिदिन सैकड़ों ट्रक यहाँ से शराब लेकर निकल रहे हैं और बदले में जहरीला पानी नदी में बहाया जा रहा है।

ग्रामीणों का आक्रोश अब चरम पर है और उनकी मांगें प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई हैं:

  • फैक्ट्री से होने वाले जहरीले रिसाव को तुरंत रोका जाए।
  • प्रदूषण के कारण बीमार हो रहे ग्रामीणों को उचित मुआवजा मिले।
  • शिवनाथ नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं।
  • दोषियों पर जवाबदेही तय कर उन पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो।

बिलासपुर संभाग के गाँवों में फैला बीमारियों का जाल

इस प्रदूषण का असर केवल नदी तक सीमित नहीं है, बल्कि भाटापारा, धूमा और झिरिया जैसे कई गाँव इसकी चपेट में आ चुके हैं। दरअसल, क्षेत्र का भूजल स्तर भी अब दूषित हो चुका है, जिससे लोगों को गंभीर त्वचा रोग और पेट की बीमारियाँ हो रही हैं। धूमा गाँव के निवासियों का कहना है कि उनकी फसलें नष्ट हो रही हैं और पशु भी इस जहरीले पानी को पीकर दम तोड़ रहे हैं। ग्रामीणों का तो यहाँ तक कहना है कि सरकार को पूरा गाँव ही कहीं और शिफ्ट कर देना चाहिए क्योंकि यहाँ सांस लेना भी अब मुमकिन नहीं रहा।

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