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Women Reservation Bill Debate Chhattisgarh: विधानसभा के विशेष सत्र में गूंजा आधी आबादी का मुद्दा

छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में महिला आरक्षण के मुद्दे पर आज व्यापक चर्चा हुई। राजधानी रायपुर स्थित विधानसभा भवन में आयोजित इस महत्वपूर्ण सत्र में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले विधेयक के व्यावहारिक पहलुओं पर सत्ता पक्ष और विपक्ष ने अपने-अपने तर्क रखे। यह सत्र मुख्य रूप से राजनीति में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने और इस दिशा में आ रही तकनीकी बाधाओं पर केंद्रित रहा।

सत्ता पक्ष का स्पष्ट रुख सदन में सरकार की ओर से इस विधेयक को महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक और आवश्यक कदम बताया गया। सत्ता पक्ष के नेताओं ने कहा कि इससे न केवल पंचायत स्तर पर, बल्कि विधानसभा और लोकसभा तक महिलाओं की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित होगी। सरकार का तर्क है कि आधी आबादी को नीति-निर्माण में शामिल किए बिना राज्य और देश का संपूर्ण विकास संभव नहीं है।

विपक्ष के सवाल और आपत्तियां मुख्य विपक्षी दल ने आरक्षण के सैद्धांतिक विचार का तो पूर्ण समर्थन किया, लेकिन इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया को लेकर सरकार को घेरा। विपक्ष ने विशेष रूप से आरक्षण लागू करने की समय-सीमा, परिसीमन की प्रक्रिया और पिछड़े वर्ग (ओबीसी) तथा अनुसूचित जाति-जनजाति की महिलाओं के लिए कोटे के भीतर कोटे की मांग प्रमुखता से उठाई। विपक्ष का आरोप था कि बिना स्पष्ट रोडमैप के यह सिर्फ एक खोखला वादा साबित हो सकता है।

महिला विधायकों ने मजबूती से रखा पक्ष इस विशेष सत्र की सबसे खास बात यह रही कि सदन में उपस्थित सभी महिला विधायकों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस मुद्दे पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्णय लेने वाले सर्वोच्च मंचों पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि समय की सबसे बड़ी मांग है।

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