World News Live: ईरान ने सीजफायर के लिए रखी नई शर्त, ट्रंप बोले- बिना ‘न्यूक्लियर डील’ कोई बात नहीं, होर्मुज में तनाव

Iran US War Ceasefire:अमेरिका (US) और ईरान (Iran) के बीच चल रहे विनाशकारी युद्ध को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं, लेकिन सीजफायर (Ceasefire) की राह में दोनों देशों की शर्तें एक बड़ी दीवार बन गई हैं। जहां एक ओर पूरी दुनिया वैश्विक व्यापार को बचाने के लिए शांति की अपील कर रही है, वहीं ईरान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अपनी-अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। लाइव अपडेट्स के अनुसार, शांति वार्ता में सबसे बड़ा पेंच ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) और ईरान की ‘परमाणु डील’ (Nuclear Deal) पर फंसा हुआ है।
ईरान की सीजफायर के लिए क्या है शर्त?
ईरान ने अमेरिका के सामने युद्ध रोकने और वैश्विक तेल आपूर्ति बहाल करने के लिए कुछ कड़ी शर्तें रखी हैं।
- ईरानी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि जब तक अमेरिका और इजरायल (Israel) उसके सैन्य ठिकानों पर हमले पूरी तरह बंद नहीं करते, तब तक सीजफायर संभव नहीं है।
- ईरान की सबसे बड़ी शर्त यह है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को वैश्विक व्यापार के लिए तभी दोबारा खोला जाएगा, जब अमेरिका उस पर लगे सभी कड़े आर्थिक प्रतिबंधों (Economic Sanctions) को हटा ले।
- ईरान ने बातचीत की मेज पर आने की इच्छा जताई है, लेकिन उसने अपने परमाणु कार्यक्रम पर किसी भी तरह का समझौता करने या उस पर चर्चा करने से साफ इनकार कर दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख: ‘न्यूक्लियर डील’ पर हो बात
दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की इन शर्तों को सिरे से खारिज कर दिया है।
- व्हाइट हाउस (White House) से जारी रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने अपनी नेशनल सिक्योरिटी टीम को साफ निर्देश दिए हैं कि ईरान के ‘परमाणु कार्यक्रम’ (Nuclear Program) पर लगाम लगाए बिना कोई भी शांति समझौता (Peace Deal) नहीं होगा।
- ट्रंप का मानना है कि अगर ईरान को आर्थिक छूट दी गई, तो वह इसका इस्तेमाल अपने परमाणु हथियारों को विकसित करने में करेगा।
- अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से अपनी नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाता है, तो अमेरिकी नौसेना (US Navy) बलपूर्वक रास्ता साफ करने के लिए बड़ा सैन्य ऑपरेशन लॉन्च कर सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर फंसा वैश्विक व्यापार
इन दोनों महाशक्तियों के अहम के टकराव में पूरी दुनिया पिस रही है।
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की भारी किल्लत पैदा हो गई है, जिससे दुनिया भर में महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही है।
- समुद्र में फंसे जहाजों के कारण एशिया और यूरोप के कई देशों में सप्लाई चेन (Supply Chain) बुरी तरह प्रभावित हुई है।
जब तक ‘न्यूक्लियर डील’ और ‘होर्मुज के रास्ते’ पर दोनों देशों के बीच कोई आम सहमति नहीं बन जाती, तब तक पश्चिम एशिया (Middle East) में युद्ध के बादल और गहरे होते जाएंगे।



