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US-Iran Peace Deal: इस्लामाबाद में बातचीत बेनतीजा, ट्रंप ने दी होर्मुज में नाकेबंदी की चेतावनी

वैश्विक भू-राजनीति में एक बार फिर से भारी तनाव (US-Iran Peace Deal) की स्थिति पैदा हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई उच्च स्तरीय शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद दोनों देशों के बीच यह सबसे ऊंचे स्तर की सीधी बातचीत थी, लेकिन दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई पाटी नहीं जा सकी।

इस्लामाबाद वार्ता विफल, ट्रंप का कड़ा एक्शन

दरअसल, इस्लामाबाद में लगभग 21 घंटे तक चली इस मैराथन बैठक के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद सख्त कदम उठाने का ऐलान किया है।

  • वार्ता विफल होने के तुरंत बाद ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिकी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तुरंत नाकेबंदी शुरू करेगी।
  • ट्रंप ने साफ किया कि जो भी व्यापारिक जहाज ईरान को अवैध टोल टैक्स चुकाएंगे, उन्हें अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिकी नौसेना द्वारा रोक दिया जाएगा।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के 20 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति का मुख्य मार्ग है, ऐसे में इस नाकेबंदी से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मचने की आशंका है।
  • अमेरिकी नौसेना के कुछ विध्वंसक जहाज पहले ही इस क्षेत्र में अपनी गश्त तेज कर चुके हैं।

वार्ता के विफल होने के मुख्य कारण

इसके अलावा, इस बातचीत के विफल होने के पीछे दोनों देशों की अपनी-अपनी सख्त शर्तें और ‘रेड लाइन्स’ रहीं।

  • अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान से अपने परमाणु कार्यक्रम को रोकने की ठोस गारंटी चाहता है।
  • वहीं, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ के नेतृत्व वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका पर अपनी सीमाएं लांघने का आरोप लगाया।
  • ईरान की मुख्य मांगों में उसके फ्रीज किए गए वित्तीय कोष को जारी करना और लेबनान में इजरायली हमलों को रोकना शामिल था, जिस पर अमेरिका सहमत नहीं हुआ।

सीजफायर की डेडलाइन और आगे का रास्ता

हालांकि, यह कूटनीतिक गतिरोध अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। पाकिस्तान दोनों देशों से 14 दिनों के उस नाजुक सीजफायर को बनाए रखने की अपील कर रहा है, जिसकी मियाद 22 अप्रैल को खत्म होने वाली है।

  • अगर 22 अप्रैल से पहले कोई समझौता नहीं होता है, तो मध्य पूर्व में फिर से भयंकर युद्ध भड़कने का खतरा है।
  • इस बीच, ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी फोन पर बातचीत की है और समुद्री सुरक्षा व होर्मुज जलडमरूमध्य के ताजा हालात पर चर्चा की है।
  • अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बातचीत का एक और दौर आयोजित किया जाएगा या फिर सैन्य टकराव ही अंतिम विकल्प बचेगा।

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