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CG ITI Upgrade: छत्तीसगढ़ के 30 सरकारी ITI की बदलेगी तस्वीर, 1,446 करोड़ रुपये से तैयार होंगे आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में तकनीकी शिक्षा की व्यवस्था बदलने जा रही है। प्रदेश के 30 सरकारी ITI को आधुनिक प्रशिक्षण केंद्रों के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की गई है। प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लायबिलिटी ट्रांसफार्मेशन थ्रू अपग्रेडेड ITI यानी पीएम-सेतु योजना के अंतर्गत इन संस्थानों के उन्नयन पर लगभग 1,446 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना में प्रदेश के छह प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

इस परियोजना की खास बात यह है कि प्रशिक्षण संस्थानों के विकास में सरकारी विभागों के साथ बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठानों की भी भागीदारी रहेगी। इससे छात्रों को ऐसे उपकरणों और तकनीकों पर प्रशिक्षण देने की व्यवस्था विकसित होगी, जिनका वास्तविक उपयोग कारखानों और औद्योगिक इकाइयों में होता है।

छह क्लस्टरों में विकसित होंगे 30 सरकारी ITI

प्रदेश में CG ITI Upgrade योजना के लिए दुर्ग, कोरबा, सरगुजा, बस्तर, रायगढ़ और रायपुर को क्लस्टर के रूप में चुना गया है।

इन छह क्लस्टरों में कुल 30 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान शामिल होंगे। इनमें छह संस्थान हब और 24 संस्थान स्पोक के रूप में विकसित किए जाएंगे।

हब संस्थान संबंधित क्लस्टर में प्रशिक्षण और तकनीकी संसाधनों के प्रमुख केंद्र होंगे। उनसे जुड़े अन्य चार संस्थानों को स्पोक के रूप में विकसित किया जाएगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य संसाधनों का ऐसा उपयोग करना है, जिससे एक बड़े प्रशिक्षण केंद्र में स्थापित आधुनिक सुविधाओं का लाभ आसपास के दूसरे संस्थानों तक भी पहुंच सके।

एक क्लस्टर पर 241 करोड़ रुपये का प्रावधान

प्रस्तावित वित्तीय ढांचे के अनुसार प्रत्येक क्लस्टर के लिए लगभग 241 करोड़ रुपये निर्धारित हैं।

इसमें मुख्य हब ITI के विकास के लिए 81 करोड़ रुपये और प्रत्येक स्पोक ITI के उन्नयन के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान बताया गया है।

छह क्लस्टरों के लिए निर्धारित कुल राशि लगभग 1,446 करोड़ रुपये होगी।

योजना के वित्तपोषण में केंद्र सरकार की 50 प्रतिशत, राज्य सरकार की 33 प्रतिशत और औद्योगिक भागीदारों की 17 प्रतिशत हिस्सेदारी निर्धारित की गई है।

दुर्ग में भिलाई स्टील प्लांट बनेगा प्रमुख औद्योगिक भागीदार

दुर्ग क्लस्टर के लिए भिलाई स्टील प्लांट को प्रमुख औद्योगिक भागीदार बनाया गया है।

इस क्लस्टर में शासकीय ITI दुर्ग को मुख्य हब के रूप में विकसित किया जाएगा।

इसके साथ भिलाई, महिला ITI भिलाई, राजनांदगांव और डौंडीलोहारा के संस्थान जुड़े रहेंगे।

भिलाई स्टील प्लांट देश के प्रमुख इस्पात उत्पादन प्रतिष्ठानों में शामिल है। यहां उपयोग की जाने वाली औद्योगिक तकनीकें प्रशिक्षण की आवश्यकताओं को समझने में उपयोगी हो सकती हैं।

योजना का उद्देश्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों को उद्योगों की जरूरतों के अधिक अनुकूल बनाना है।

बस्तर के युवाओं के लिए NMDC के साथ समझौता

बस्तर क्लस्टर में राष्ट्रीय खनिज विकास निगम यानी NMDC को औद्योगिक भागीदार बनाया गया है।

यहां शासकीय ITI बस्तर को मुख्य हब बनाया जाएगा। जगदलपुर, गीदम, कोंडागांव और नारायणपुर के प्रशिक्षण संस्थान इससे जुड़े रहेंगे।

बस्तर में खनन और उससे संबंधित तकनीकी गतिविधियों की बड़ी उपस्थिति है। ऐसे में औद्योगिक प्रशिक्षण को स्थानीय रोजगार की जरूरतों के साथ जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की उपस्थिति में 13 अक्टूबर को मंत्रालय, महानदी भवन में दुर्ग और बस्तर क्लस्टर के लिए भिलाई स्टील प्लांट तथा NMDC के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

सरगुजा, कोरबा और रायगढ़ में भी तैयारी

सरगुजा क्लस्टर के लिए साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड यानी SECL ने भागीदारी पर सहमति दी है। टाटा IIS को परिचालन भागीदार चुना गया है। समझौते की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

कोरबा क्लस्टर में NTPC कोरबा की सहमति मिली है, जबकि परिचालन भागीदार के चयन की प्रक्रिया जारी है।

रायपुर और रायगढ़ क्लस्टर के लिए औद्योगिक भागीदारों के चयन को लेकर निविदा प्रक्रिया चल रही है।

छात्रों को क्या लाभ मिलेगा?

सरकारी ITI में प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं के लिए आधुनिक मशीनों, प्रयोगशालाओं और तकनीकी उपकरणों की उपलब्धता महत्वपूर्ण होगी।

अभी तकनीकी शिक्षा में एक प्रमुख चुनौती प्रशिक्षण और उद्योगों की वास्तविक कार्यप्रणाली के बीच अंतर को कम करना है।

नई व्यवस्था में प्रशिक्षण का ढांचा उद्योगों की मांग के अनुसार विकसित करने पर जोर रहेगा।

इससे मशीन संचालन, तकनीकी रखरखाव और संबंधित औद्योगिक कौशल के प्रशिक्षण की गुणवत्ता बेहतर करने में मदद मिल सकती है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उद्योगों की भागीदारी को युवाओं के रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता के अवसर बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया है।

तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने भी योजना को प्रदेश के युवाओं के लिए उपयोगी पहल बताया।

अब संस्थानों के आधुनिकीकरण पर रहेगी नजर

योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण केंद्रों के उन्नयन के लिए वित्तीय और औद्योगिक ढांचा निर्धारित किया गया है। दुर्ग और बस्तर में उद्योगों के साथ समझौते हो चुके हैं।

अब संस्थानों में आवश्यक उपकरण स्थापित करने, आधुनिक प्रयोगशालाएं विकसित करने और प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों को उद्योगों की मांग से जोड़ने का काम महत्वपूर्ण होगा।

प्रदेश के युवाओं के लिए इस परियोजना का वास्तविक लाभ तब सामने आएगा, जब नई सुविधाएं प्रशिक्षण संस्थानों में उपलब्ध होंगी और छात्र उनका उपयोग कर सकेंगे।

छत्तीसगढ़ में तकनीकी शिक्षा तथा रोजगार से संबंधित अन्य खबरें जनदखल के छत्तीसगढ़ समाचार और अंबिकापुर शिक्षा विभाग से जुड़े मामले में पढ़ सकते हैं।

योजना से जुड़ी जानकारी के लिए कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय, भिलाई स्टील प्लांट की मूल कंपनी SAIL और NMDC की आधिकारिक वेबसाइटों पर भी संबंधित जानकारी उपलब्ध है।

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