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सुकमा में विस्फोट से CRPF के चार जवान घायल, दो की हालत गंभीर; नक्सल प्रभावित इलाके में अभियान जारी

सुकमा/रायपुर: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में विस्फोटक सामग्री को निष्क्रिय करने के दौरान हुए हादसे में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के चार जवान घायल हो गए। इनमें दो जवानों की हालत गंभीर बताई गई है। घटना गुरुवार शाम भेज्जी थाना क्षेत्र के अंतर्गत सुरक्षा शिविर के पास हुई थी। शुक्रवार, 9 अक्टूबर को यह घटना फिर चर्चा में है, क्योंकि घायल जवानों के उपचार और क्षेत्र में सुरक्षा अभियान को लेकर चिंता बनी हुई है।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा बलों की टीम इलाके में मौजूद अनुपयोगी और पहले से बरामद विस्फोटक सामग्री को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करने के काम में जुटी थी। इसी दौरान विस्फोटक का एक टुकड़ा पास में गिरा और उसमें धमाका हो गया।

कैसे हुआ हादसा?

घटना सुकमा जिले में भेज्जी थाना क्षेत्र के अंतर्गत एलारमाडगु सुरक्षा शिविर के पास बोडराजपदर नाला इलाके में हुई। यह स्थान सुरक्षा शिविर से लगभग 200 मीटर की दूरी पर बताया गया है।

जानकारी के अनुसार, CRPF की 50वीं बटालियन और एम्युनिशन टेक्निकल टीम के जवान इलाके में मौजूद अनुपयोगी विस्फोटकों को निष्क्रिय करने की प्रक्रिया में लगे थे।

ऐसे अभियानों में विस्फोटक सामग्री की पहचान, उसकी स्थिति का आकलन और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया के तहत उसे निष्क्रिय करना शामिल होता है। इस दौरान अत्यधिक सावधानी बरतना आवश्यक होता है, क्योंकि पुराने या क्षतिग्रस्त विस्फोटकों की स्थिति अप्रत्याशित हो सकती है।

इसी प्रक्रिया के दौरान विस्फोटक का एक टुकड़ा पास में गिरने के बाद फट गया। धमाके की चपेट में आने से चार सुरक्षाकर्मी घायल हो गए।

चार जवान घायल, दो की हालत गंभीर

घायल जवानों में CRPF की एम्युनिशन टेक्निकल टीम से जुड़े सहायक उपनिरीक्षक एम.के. तिवारी और निरीक्षक अमरनाथ मिश्रा शामिल हैं। इसके अलावा 50वीं बटालियन में तैनात सहायक उपनिरीक्षक अनीस खान और हेड कांस्टेबल कुलदीप राज भी घायल हुए हैं।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, दोनों सहायक उपनिरीक्षकों को गंभीर चोटें आई हैं। हादसे के बाद सभी घायल जवानों को प्राथमिक उपचार दिया गया और फिर अस्पताल पहुंचाया गया।

गंभीर रूप से घायल जवानों को बेहतर उपचार के लिए दूसरे चिकित्सा केंद्र में स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जा रही थी। इस घटना ने एक बार फिर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुराने विस्फोटकों को निष्क्रिय करने के दौरान मौजूद जोखिम को सामने ला दिया है।

बस्तर में विस्फोटक निष्क्रिय करना क्यों जरूरी?

बस्तर संभाग के सुकमा, बीजापुर और आसपास के कुछ क्षेत्रों में सुरक्षा बलों को समय-समय पर IED और अन्य विस्फोटक सामग्री मिलने की घटनाएं सामने आती रही हैं।

IED यानी इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस का इस्तेमाल सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। ऐसी सामग्री रास्तों, जंगलों या दूरस्थ क्षेत्रों में छिपाई जा सकती है।

विस्फोटक मिलने के बाद उसे सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करना जरूरी होता है, ताकि भविष्य में किसी नागरिक या सुरक्षाकर्मी को नुकसान न पहुंचे।

लेकिन यह काम अपने आप में जोखिम भरा होता है। पुरानी विस्फोटक सामग्री में तकनीकी खराबी या अप्रत्याशित प्रतिक्रिया का खतरा बना रहता है।

नक्सल विरोधी अभियान के बीच सुरक्षा चुनौती

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान के साथ-साथ सुरक्षा बलों के सामने विस्फोटक सामग्री का पता लगाने और उसे सुरक्षित करने की चुनौती भी रहती है।

दूरस्थ इलाकों में सड़क, संचार और चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता कई बार सीमित होती है। ऐसे में किसी भी दुर्घटना के बाद घायल जवानों को बेहतर चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाना महत्वपूर्ण हो जाता है।

इस घटना में भी प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल जवानों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाने की तैयारी की गई।

स्थानीय सुरक्षा पर क्या असर?

विस्फोटक सामग्री को निष्क्रिय करने का अभियान स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यदि ऐसी सामग्री लंबे समय तक जमीन में पड़ी रहे तो जंगलों में जाने वाले ग्रामीणों, पशुपालकों और सुरक्षा बलों के लिए खतरा बना रह सकता है।

इसलिए ऐसे अभियानों में जोखिम के बावजूद विस्फोटकों को सुरक्षित करना आवश्यक है। हालांकि हर घटना के बाद सुरक्षा प्रक्रिया की समीक्षा करना भी उतना ही जरूरी है, ताकि भविष्य में दुर्घटनाओं की संभावना कम की जा सके।

आगे क्या महत्वपूर्ण होगा?

घायल जवानों की स्थिति, उनके उपचार और घटना की तकनीकी समीक्षा इस मामले में आगे महत्वपूर्ण रहेगी। उपलब्ध शुरुआती जानकारी इसे विस्फोटक निष्क्रिय करने के दौरान हुआ हादसा बताती है। इसे बिना अतिरिक्त प्रमाण के नया नक्सली हमला कहना सही नहीं होगा।

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