Nifty September Fall:शेयर बाजार में 25 साल की सबसे बड़ी गिरावट: सितंबर सीरीज में 6.7% टूटा Nifty, 22,600 का अहम स्तर भी हुआ ध्वस्त

Nifty September Fall:”भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) के निवेशकों के लिए सितंबर महीने की डेरिवेटिव सीरीज बेहद निराशाजनक और कमजोर साबित हुई है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के प्रमुख सूचकांक निफ्टी (Nifty 50) ने सितंबर सीरीज में करीब 6.7 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की है। यह पिछले 25 वर्षों में सितंबर महीने में दर्ज की गई सबसे बड़ी गिरावट है।
इससे पहले सितंबर 2001 में निफ्टी 6.5 प्रतिशत गिरा था। इस बार बाजार पर चौतरफा दबाव रहा, जिसके चलते निफ्टी में 1,400 से ज्यादा अंकों की भारी-भरकम गिरावट देखने को मिली।
22,600 का मजबूत सपोर्ट टूटा, 2020 के बाद सबसे लंबी साप्ताहिक गिरावट(Nifty September Fall)
बाजार में लगातार विदेशी बिकवाली, महंगा कच्चा तेल, कमजोर रुपया और ऊंची बॉन्ड यील्ड के दबाव ने निवेशकों का सेंटिमेंट बिगाड़ दिया। इस चौतरफा बिकवाली के कारण निफ्टी साल 2020 के बाद से अपने सबसे लंबे साप्ताहिक गिरावट के दौर में पहुंच गया।
सितंबर के आखिरी कारोबारी सत्रों में निफ्टी अपने ‘200-वीक मूविंग एवरेज’ (200-WMA) के आसपास मौजूद 22,600 के अहम स्तर से भी नीचे फिसल गया। मंगलवार के सत्र में इस इंडेक्स ने 22,569 का इंट्राडे (Intraday) निचला स्तर छू लिया। टेक्निकल एनालिस्ट्स की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या निफ्टी वापस 22,600 के ऊपर टिक पाता है या नहीं। अगर इसके ऊपर वापसी होती है, तो सुधार की गुंजाइश बनेगी, अन्यथा दबाव आगे भी जारी रह सकता है।
शेयर बाजार (Nifty) में भारी गिरावट के 3 मुख्य कारण
बाजार में मचे इस कोहराम के पीछे मुख्य रूप से वैश्विक (Global) कारक जिम्मेदार रहे हैं:
- महंगा कच्चा तेल (Crude Oil): सितंबर की गिरावट में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों ने अहम भूमिका निभाई है। ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने के बाद लगभग 105 डॉलर के आसपास बना रहा। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए महंगे तेल से देश का आयात बिल, महंगाई और रुपये पर भारी दबाव बढ़ रहा है।
- कमजोर रुपया और ऊंची बॉन्ड यील्ड: सितंबर में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक रूप से कमजोर होकर 96.2 के स्तर तक पहुंच गया। इसके साथ ही भारत की 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 7.17 प्रतिशत हो गई, जबकि अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5 प्रतिशत से ऊपर बनी रही।
- विदेशी निवेशकों (FIIs) की ताबड़तोड़ बिकवाली: बाजार में विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली सबसे बड़ा सिरदर्द बनी हुई है। रॉयटर्स के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 2.17 अरब डॉलर से ज्यादा की भारी-भरकम निकासी की है।
घरेलू अर्थव्यवस्था से मिल रही थोड़ी राहत
वैश्विक दबावों के बावजूद, घरेलू अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर कुछ सकारात्मक संकेत भी हैं जो बाजार को सहारा दे रहे हैं। अगस्त महीने में भारत का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) सालाना आधार पर 8 प्रतिशत बढ़ा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू आर्थिक गतिविधियां वैश्विक नकारात्मक झटकों के असर को कुछ हद तक कम कर सकती हैं।
क्या अक्टूबर में संभलेगा बाजार? इन अहम लेवल्स पर रहेगी नजर
अक्टूबर सीरीज के लिए निफ्टी के सपोर्ट और रेजिस्टेंस जोन बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं। ट्रेडर्स और निवेशकों को बाजार की दिशा समझने के लिए इन लेवल्स पर पैनी नजर रखनी होगी:
| निफ्टी लेवल्स (Nifty Levels) | बाजार के लिए महत्व (Significance) |
| 23,000 – 23,100 | अगला महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस (Major Resistance) |
| 22,800 – 22,900 | पहला प्रमुख रेजिस्टेंस (Initial Resistance) |
| 22,600 | अहम ‘200-वीक मूविंग एवरेज’ (Make or Break Level) |
| 22,500 – 22,550 | शुरुआती सपोर्ट (Initial Support) |
| 22,400 – 22,500 | बेहद मजबूत सपोर्ट जोन (Strong Support) |






