Global Oil Market: अमेरिका-ईरान समझौते की उम्मीदों से कच्चे तेल के दाम औंधे मुंह गिरे, 3 महीने के निचले स्तर पर क्रूड; जानें भारत को क्या होगा फायदा

नई दिल्ली: ग्लोबल ऑयल मार्केट (Global Oil Market) में इन दिनों भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए संभावित समझौते की खबरों के बीच कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में तगड़ी गिरावट आई है और यह तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में पिछले चार कारोबारी सत्रों में करीब 16% की गिरावट आ चुकी है, जिसे इस साल की सबसे लंबी गिरावट माना जा रहा है।
- WTI क्रूड: अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 77 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार कर रहा है।
- ब्रेंट क्रूड: वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड भी 79 डॉलर प्रति बैरल के नीचे बंद हुआ है।
अमेरिका-ईरान समझौते का क्या होगा असर?
शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर होने की पूरी संभावना है।
- इस समझौते के तहत ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना तेल निर्यात फिर से शुरू करने की मंजूरी मिल सकती है।
- बाजार के जानकारों को उम्मीद है कि ईरान के बाजार में लौटने से वैश्विक सप्लाई बढ़ेगी और तेल की उपलब्धता काफी बेहतर होगी।
- युद्धविराम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (जो दुनिया के करीब 20% समुद्री तेल व्यापार का प्रमुख मार्ग है) के खुलने से एनर्जी मार्केट पर बना दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा।
अभी भी बनी हुई हैं ये चुनौतियां
हालांकि इस समझौते से बाजार को बड़ी राहत की उम्मीद है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि तेल की आवाजाही को पूरी तरह सामान्य होने में अभी कुछ समय लग सकता है।
- शुरुआती हफ्तों में अमेरिकी नौसेना के जहाजों को तेल टैंकरों की सुरक्षा करनी पड़ सकती है और समुद्री मार्गों की गहन जांच भी जारी रहेगी।
- ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगले एक महीने तक जहाजों की आवाजाही सामान्य गति से कम रह सकती है। इसके बावजूद फ्यूचर्स मार्केट आगे की संभावनाओं को देखते हुए तेल में कमजोरी दिखा रहा है।
दूसरी ओर तेजी से घट रहा अमेरिकी तेल भंडार
तेल कीमतों में इस गिरावट के बीच एक दिलचस्प आंकड़ा यह भी सामने आया है कि अमेरिका के कच्चे तेल भंडार तेजी से घट रहे हैं।
- उद्योग से जुड़े हालिया आंकड़ों के अनुसार, पिछले सप्ताह अमेरिकी तेल भंडार में करीब 83 लाख बैरल की बड़ी कमी दर्ज की गई है।
- ओक्लाहोमा के कुशिंग हब में भी स्टॉक में बड़ी गिरावट आई है। यानी, सप्लाई बढ़ने की उम्मीद और घटते भंडार के बीच बाजार फिलहाल संतुलन बनाने की जद्दोजहद कर रहा है।
🇮🇳 भारत के लिए कैसे है यह फायदे का सौदा?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक (Oil Importer) देश है, जो अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है। ऐसे में क्रूड ऑयल का सस्ता होना भारत के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं है:
- सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल: कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव कम होगा और आने वाले समय में इनके दाम घट सकते हैं।
- आयात बिल में कमी: तेल सस्ता होने से सरकार का विदेशी मुद्रा आयात बिल घटेगा।
- मजबूत होगा रुपया: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये को मजबूती मिलेगी और देश में महंगाई दर को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।






