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Stock Market Crash:शेयर बाजार में 2001 जैसा हाहाकार: सेंसेक्स 1200 अंक धड़ाम, निवेशकों के 10 लाख करोड़ डूबे; जानें गिरावट के 6 बड़े कारण

Stock Market Crash:सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन (गुरुवार) भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में एक बार फिर से भारी सुनामी देखने को मिली। दोपहर 1 बजे के बाद बाजार में बिकवाली का ऐसा दबाव बना कि बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 1200 अंक से ज्यादा टूटकर 71,300 के स्तर से नीचे आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) भी 350 अंक से अधिक लुढ़ककर 22,300 अंक के नीचे पहुंच गया।

इस चौतरफा बिकवाली के कारण महज कुछ ही घंटों में शेयर बाजार के निवेशकों के करीब 10 लाख करोड़ रुपये डूब गए। इंट्रा-डे ट्रेडिंग के दौरान सेंसेक्स ने 71,292.88 अंक का गोता लगाया, जो इस इंडेक्स का 52 हफ्ते का सबसे निचला स्तर (52-Week Low) है। हालांकि, दोपहर 3 बजे के आसपास निचले स्तरों से हल्की रिकवरी देखने को मिली, जिसके बाद सेंसेक्स 500 अंक और निफ्टी 200 अंक के नुकसान के साथ ट्रेड कर रहा था।

2001 के ‘डॉट-कॉम क्रैश’ जैसे बने हालात(Stock Market Crash)

बाजार में यह लगातार चौथा कारोबारी दिन है, जब लाल निशान पर ट्रेडिंग हो रही है। इस लगातार बिकवाली के कारण भारतीय बाजार लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद होने की ओर बढ़ रहा है। शेयर बाजार के इतिहास में साल 2001 के ‘डॉट-कॉम क्रैश’ (Dot-com Crash) के बाद ऐसा पहली बार हो रहा है, जब लगातार इतने हफ्तों तक बाजार गिरा हो। इस गिरावट की स्ट्रीक ने साल 2020 के कोविड-19 क्रैश और 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस (Global Financial Crisis) को भी पीछे छोड़ दिया है।

बाजार में मची इस भारी बिकवाली के 6 मुख्य कारण

शेयर बाजार के इस क्रैश के पीछे घरेलू और वैश्विक स्तर के कई बड़े कारक जिम्मेदार हैं:

  • 1. विदेशी निवेशकों (FIIs) की ताबड़तोड़ निकासी: बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह विदेशी निवेशकों का मोहभंग होना है। बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजारों से करीब ₹10,148 करोड़ निकाले। इससे एक दिन पहले (मंगलवार) को भी उन्होंने ₹10,743 करोड़ की बिकवाली की थी। यानी सिर्फ दो दिनों में FIIs ने ₹20,891 करोड़ भारतीय बाजार से निकाल लिए।
  • 2. 2007 के उच्चतम स्तर पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड: विदेशी निवेशक अब अमेरिकी बॉन्ड मार्केट की ओर रुख कर रहे हैं। अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.31 फीसदी तक पहुंच गई है, जो 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। अमेरिकी डेट मार्केट से बिना जोखिम के मिल रहा यह ऊंचा रिटर्न विदेशी निवेशकों को भारत से पैसा निकालने के लिए प्रेरित कर रहा है।
  • 3. घरेलू निवेशकों (DIIs) का ठंडा उत्साह: बीते कुछ सालों में जब भी FIIs ने बिकवाली की, तब घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने खरीदारी कर बाजार को संभाला। लेकिन इस बार घरेलू निवेशकों की ओर से भी वैसी आक्रामक खरीदारी नहीं हो रही है, जिससे बाजार सपोर्ट खो रहा है।
  • 4. अमेरिका-ईरान तनाव और महंगा क्रूड ऑयल: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव में सुलह के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इस भू-राजनीतिक संकट (Geopolitical Tension) के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगातार उछाल बना हुआ है, जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए नकारात्मक है।
  • 5. ऑटो सेक्टर में भारी गिरावट: बाजार को गिराने में ऑटो शेयरों ने अहम भूमिका निभाई है। सितंबर महीने की गाड़ियों की बिक्री के आंकड़े बाजार की उम्मीदों से काफी कमजोर रहे। इसके चलते महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) और मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) जैसे दिग्गजों में भारी बिकवाली हुई। गुरुवार को Nifty Auto इंडेक्स 4 फीसदी से ज्यादा टूट गया।
  • 6. रुपये में कमजोरी: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये (INR) की कमजोरी ने भी सेंटिमेंट बिगाड़ा है। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के लिए निवेश की लागत और जोखिम दोनों को बढ़ा देता है।

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