Mor Gaon Mor Pani Mahabhiyan: ‘मोर गाँव मोर पानी महाभियान’ से बदल रही गांवों की तस्वीर, जल संरक्षण के साथ मिल रहा रोजगार

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन और ग्रामीण विकास को एक नई दिशा मिल रही है।(Mor Gaon Mor Pani Mahabhiyan) ‘वीबी जी राम जी योजना’ के अंतर्गत प्रदेश भर में चलाया जा रहा ‘मोर गाँव मोर पानी महाभियान’ (Mor Gaon Mor Pani Mahabhiyan) अब शानदार परिणाम दे रहा है। यह महाभियान न केवल जल संकट का स्थायी समाधान बन रहा है, बल्कि ग्रामीणों के लिए रोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण का एक बेहद प्रभावी माध्यम बनकर भी उभरा है।
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही का ‘सेमरदर्री’ गांव बना प्रेरणा, Mor Gaon Mor Pani Mahabhiyan
इस महाभियान की सफलता का सबसे शानदार और प्रेरणादायी उदाहरण गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की ग्राम पंचायत सेमरदर्री बन गई है। यहाँ वैज्ञानिक पद्धति से जल संरक्षण के कार्य किए गए हैं, जिसके चलते वर्षा जल बेकार बहने के बजाय सीधे भूमि में समाहित होकर भू-जल स्तर (Groundwater Level) को तेजी से बढ़ा रहा है।
मरवाही विकासखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सेमरदर्री के तीन प्रमुख क्षेत्रों— भाटा-टिकरा, शीतल गडहा, और पथरा कोड़ी— में बड़े स्तर पर जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया है।
अभियान के प्रमुख आंकड़े और सफलता (एक नजर में)
स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों की मेहनत से सेमरदर्री में जो परिणाम हासिल हुए हैं, वे पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल हैं:
- ट्रेंच का निर्माण: क्षेत्र में कुल 8,300 स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच (Staggered Contour Trenches) बनाए गए हैं।
- जल रिचार्ज क्षमता: वर्षा ऋतु में इन ट्रेंच के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 67 लाख 23 हजार लीटर पानी का भू-जल में रिचार्ज हो रहा है।
- रोजगार के अवसर: ट्रेंच निर्माण कार्य में रोजाना लगभग 100 से 120 श्रमिकों को काम मिला है।
- मानव दिवस: इस योजना के तहत अब तक 8,078 मानव दिवस का रोजगार सृजित किया जा चुका है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि को संजीवनी
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप यह अभियान केवल पानी बचाने तक सीमित नहीं है। बारिश के पानी का अपव्यय रुकने से मिट्टी की नमी लंबे समय तक बरकरार रह रही है, जिसका सीधा और व्यापक लाभ स्थानीय कृषि और वन क्षेत्र को मिल रहा है। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से ग्रामीण परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और उनकी अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।
जनभागीदारी से बना ‘जनआंदोलन’
जिला प्रशासन द्वारा इस महाभियान में जनभागीदारी को केंद्र में रखा गया है। विभिन्न ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण से जुड़े स्थायी कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसका लक्ष्य आने वाले वर्षों में:
- जल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाना।
- पर्यावरण संतुलन को मजबूती प्रदान करना।
‘मोर गाँव मोर पानी महाभियान’ प्रकृति संरक्षण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का एक सशक्त उदाहरण है। आने वाले समय में यह मॉडल आत्मनिर्भर गाँवों के निर्माण में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा और प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।






