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Omar Abdullah:जम्मू-कश्मीर विधानसभा में गूंजा पूर्ण राज्य का मुद्दा: प्रस्ताव पास होने पर उमर अब्दुल्ला का केंद्र पर तीखा प्रहार, बोले- ‘हम भिखारी नहीं, अपना अधिकार मांग रहे हैं’

Omar Abdullah:जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर पूर्ण राज्य (Statehood) की बहाली का मुद्दा गरमा गया है। सोमवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भारी हंगामे और बीजेपी (BJP) विधायकों के वॉकआउट के बीच ‘पूर्ण राज्य का दर्जा’ बहाल करने की मांग वाला प्रस्ताव ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद, सूबे के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (Omar Abdullah) ने केंद्र सरकार (NDA Government) के रुख पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर की जनता कोई भीख नहीं मांग रही है, बल्कि वह अपना छीना हुआ अधिकार मांग रही है।

“यथाशीघ्र का मतलब क्या दो साल होता है?”(Omar Abdullah)

प्रस्ताव पारित होने से पहले विधानसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्य का दर्जा बहाल करने में हो रही देरी को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधा।

उन्होंने दिसंबर 2023 के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले का हवाला देते हुए कहा, “अदालत ने जम्मू-कश्मीर में सितंबर 2024 तक विधानसभा चुनाव कराने और जल्द से जल्द राज्य का दर्जा बहाल करने का स्पष्ट निर्देश दिया था।” उन्होंने तंज कसते हुए आगे कहा, “अध्यक्ष महोदय, मुझे बताइए कि अंग्रेजी के किस डिक्शनरी में ‘जितनी जल्दी हो सके’ (As early as possible) का मतलब दो साल होता है? हमारी सरकार चुनाव के बाद किए गए केंद्र के वादे के पूरा होने का इंतजार कर रही है।”

‘क्या राज्य का दर्जा पाकिस्तान तय करेगा?’

उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार द्वारा राज्य के दर्जे को आतंकवाद खत्म होने (Security Situation) से जोड़ने पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।

उन्होंने पूछा, “क्या आप पूर्ण राज्य के दर्जे को आतंकवाद से जोड़ रहे हैं? क्या आप कह रहे हैं कि जब तक जम्मू-कश्मीर में बंदूकें शांत नहीं हो जातीं, तब तक राज्य का दर्जा बहाल नहीं किया जाएगा? आप खुद कहते हैं कि पाकिस्तान पिछले 35 सालों से यहां आतंकवाद फैला रहा है। तो जब आप कहते हैं कि बंदूकें शांत होने पर दर्जा मिलेगा, तो इसका सीधा मतलब यह है कि आप यह फैसला पाकिस्तान के हाथ में दे रहे हैं। क्या हमारे राज्य के बारे में फैसला नई दिल्ली नहीं, बल्कि इस्लामाबाद (Islamabad) करेगा? अगर ऐसा है, तो यह देश के लिए बहुत दुखद बात है।”

“हम भिखारी नहीं हैं, अपना हक मांग रहे हैं”

अपने भाषण के अंत में उमर अब्दुल्ला ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि जम्मू-कश्मीर केंद्र से कोई एहसान या रियायत नहीं मांग रहा है। “जम्मू-कश्मीर को किसी के एहसान की जरूरत नहीं है, और न ही हम भिखारी हैं। हम सिर्फ अपना अधिकार और न्याय मांग रहे हैं। यह कोई उपहार नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार ने खुद यहां की जनता से इसका वादा किया है। अब समय आ गया है कि केंद्र को अपना वादा पूरा करना चाहिए।”

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पेश किए गए इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव का भारतीय जनता पार्टी (BJP) को छोड़कर राज्य के सभी राजनीतिक दलों ने पूरा समर्थन किया। बीजेपी ने इसका विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट कर लिया।

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