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Anita Gupta, Sonhat:कभी हाट बाजारों में सब्जी बेचने को थीं मजबूर, आज ‘बिहान’ की मदद से किराना दुकान चलाकर सालाना कमा रहीं 2 लाख; पढ़िए अनीता की कहानी

Anita Gupta, Sonhat: कभी अपने पति के साथ साप्ताहिक हाट-बाजारों में सब्जियां बेचकर किसी तरह परिवार की आजीविका चलाने वाली श्रीमती अनीता गुप्ता आज आत्मनिर्भरता की एक मिसाल बन चुकी हैं। कोरिया (Korea) जिले के विकासखंड सोनहत के दूरस्थ ग्राम नटवाही की रहने वाली अनीता ने अपनी कड़ी मेहनत और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ (Bihan Yojana) के सहयोग से खुद की एक किराना दुकान खोल ली है। इस दुकान से अब उन्हें सालाना करीब डेढ़ से दो लाख रुपये की शानदार आमदनी हो रही है, जिससे उनके परिवार को एक बड़ा आर्थिक संबल मिला है।

हाट-बाजारों का संघर्ष नहीं था आसान(Anita Gupta, Sonhat)

अनीता के लिए साप्ताहिक हाट-बाजारों में जाकर सब्जियां बेचना कोई आसान काम नहीं था।

  • परिवहन का खर्च और नुकसान: सब्जियों को बाजार तक ले जाने में काफी परिवहन खर्च आता था। कई बार समय पर बिक्री नहीं होने के कारण सब्जियां खराब हो जाती थीं, जिसका सीधा नुकसान उन्हें उठाना पड़ता था।
  • कम बचत: दिन भर की हाड़-तोड़ मेहनत के मुकाबले बचत नाममात्र की होती थी, जिससे परिवार की बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी एक बड़ी चुनौती बनी रहती थी।

‘बिहान’ योजना बनी जीवन बदलने वाली किरण

संघर्ष के इसी दौर में अनीता गांव में ‘बिहान’ के अंतर्गत संचालित महिला स्व-सहायता समूह (Self Help Group) से जुड़ीं, जहां से उन्हें अपनी आजीविका बढ़ाने का एक सुनहरा अवसर मिला।

  • आर्थिक सहयोग: समूह को प्राप्त चक्रीय निधि और सामुदायिक निवेश निधि के सहयोग से अनीता को सबसे पहले 40 हजार रुपये का ऋण (Loan) मिला।
  • मुद्रा योजना का लाभ: इसके बाद अपने व्यवसाय को और बढ़ाने के लिए उन्हें मुद्रा योजना (Mudra Yojana) के तहत एक लाख रुपये का अतिरिक्त ऋण प्राप्त हुआ। इस आर्थिक सहायता की मदद से अनीता ने अपने ही घर पर एक शानदार किराना दुकान स्थापित कर ली।

अब घर बैठे हो रही नियमित आमदनी

किराना दुकान शुरू होने से अनीता की दिनचर्या और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में बहुत बड़ा और सकारात्मक बदलाव आया है।

  • अब उन्हें सामान बेचने के लिए दूर-दराज के हाट-बाजारों में भटकने की परेशानी नहीं उठानी पड़ती।
  • घर से ही दुकान का संचालन करते हुए वे अपने बच्चों और परिवार की जिम्मेदारियां भी बखूबी निभा रही हैं।
  • नियमित आमदनी होने से उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ा है और परिवार को एक मजबूत आर्थिक सुरक्षा मिली है।

अनीता का संदेश: “संघर्ष हुआ कम”

अपनी सफलता पर खुशी जताते हुए अनीता बताती हैं कि ‘बिहान’ योजना से मिली इस आर्थिक मदद ने उनके जीवन के संघर्ष को काफी कम कर दिया है।

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