TMC Crisis: पश्चिम बंगाल में बड़ा सियासी भूचाल! ममता बनर्जी की जगह अरूप रॉय बने अध्यक्ष, अभिषेक पर भड़के बागी

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस (TMC) में इस वक्त बहुत बड़ी बगावत देखने को मिल रही है। TMC Crisis (टीएमसी संकट) के बीच बागी नेताओं ने सोमवार को पार्टी नेतृत्व को तगड़ा झटका दिया है। बागी गुट ने ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को हटाकर अरूप रॉय (Arup Roy) को पार्टी का नया अध्यक्ष घोषित कर दिया है।
हालांकि, बागी नेता पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रति नरम रुख अपना रहे हैं, लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) के खिलाफ उनका गुस्सा साफ नजर आ रहा है। अटकलें तेज हैं कि यह बागी गुट खुद को ‘असली टीएमसी’ बताते हुए जल्द ही भारत निर्वाचन आयोग (ECI) का रुख कर सकता है।
ममता को ‘सलाहकार’ बनने का ऑफर, अभिषेक से छीना अधिकार!
बागी गुट के प्रमुख चेहरे रिताब्रता बनर्जी ने ममता बनर्जी के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि यदि वह पार्टी की ‘मुख्य सलाहकार’ बनना चाहें, तो उनका स्वागत है। वहीं, इस गुट ने प्रभावी रूप से सांसद अभिषेक बनर्जी के सभी अधिकार छीन लिए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रिताब्रता ने साफ कर दिया कि सोमवार को हुई विशेष मीटिंग में अभिषेक बनर्जी को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा- “कौन हैं अभिषेक?” बता दें कि बंगाल चुनाव में हार के बाद से ही अभिषेक के काम करने के तरीके पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
रिताब्रता ने स्पष्ट किया, “यह असली या नकली होने का सवाल नहीं है। हम ही तृणमूल कांग्रेस हैं और आज के विशेष सत्र की कार्यवाही की पूरी जानकारी निर्वाचन आयोग (ECI) को देंगे।”
बागी गुट की नई टीम: फिरहाद हकीम समेत इन्हें मिले बड़े पद
न्यू टाउन के एक होटल में बागी विधायकों, पार्षदों और अन्य नेताओं की मौजूदगी में एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में सर्वसम्मति से नई नियुक्तियां की गईं:
- अध्यक्ष: अरूप रॉय
- उपाध्यक्ष: फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन
- महासचिव: रिताब्रता बनर्जी, जावेद खान और संदीपन साहा
- कोषाध्यक्ष: अखरुज्जमां अंसारी (रघुनाथगंज के विधायक)
विधानसभा का गणित: टीएमसी के पास बचे महज 16 विधायक!
इस भारी बगावत के बाद विधानसभा में टीएमसी के आंकड़े बुरी तरह बिगड़ गए हैं।
- 4 मई को आए विधानसभा चुनाव के नतीजों में टीएमसी को 80 सीटें मिली थीं। (पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को अपने गढ़ भवानीपुर से हार का सामना करना पड़ा था)।
- मई के अंत में ही पार्टी विधायक दल में फूट पड़ने लगी। रिताब्रता बनर्जी की अगुवाई में अब तक 64 से ज्यादा विधायकों ने बागी रुख अपना लिया है।
- चूंकि पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में टीएमसी ने रिताब्रता और संदीपन साहा को पहले ही निष्कासित कर दिया था, इस लिहाज से देखा जाए तो अब ममता बनर्जी के खेमे में महज 16 विधायक ही बचे हैं।
दिल्ली में भी बड़ा झटका: 20 सांसद दूसरी पार्टी में शामिल
ममता बनर्जी को लगे झटके केवल कोलकाता तक सीमित नहीं हैं; दिल्ली में भी पार्टी बिखर गई है।
- लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसदों में से 20 सांसद बागी हो गए हैं।
- ये सभी बागी सांसद एक छोटे दल ‘नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (National Citizens Party of India) में शामिल हो गए हैं।
- अब लोकसभा में ममता गुट के सांसदों की संख्या घटकर केवल 8 रह गई है।
इस बगावत की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि बागी सांसदों में ममता बनर्जी की बेहद करीबी मानी जाने वालीं सायोनी घोष और काकोली घोष दस्तीदार जैसे कद्दावर नाम भी शामिल हैं। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस घटनाक्रम को टीएमसी के इतिहास (गठन 1998) का सबसे बड़ा संकट माना जा रहा है।






