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Share Market Crash: शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 600 अंक धड़ाम; मिडिल ईस्ट के तनाव से डूबे निवेशकों के पैसे, जानिए 4 बड़े कारण

Business News (Mumbai, 14 जुलाई): भारतीय शेयर बाजार में आज जबरदस्त उतार-चढ़ाव और बिकवाली का दबाव देखने को मिला है। गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) के शुरुआती संकेतों ने ही साफ कर दिया था कि आज बाजार का मूड खराब रहने वाला है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ग्लोबल चिंताओं के कारण निवेशकों में दहशत फैल गई, जिससे शेयर बाजार भरभरा कर गिर गया (Share Market Crash)। दोपहर 1:50 बजे तक प्रमुख इंडेक्स निफ्टी (Nifty) 160 अंकों की भारी गिरावट के साथ 24,050 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि सेंसेक्स (Sensex) 600 पॉइंट फिसलकर 77,069 के स्तर पर आ गया।

खबर की मुख्य बातें (Highlights)

  • बाजार धड़ाम: सेंसेक्स में 600 अंक और निफ्टी में 160 अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई।
  • मिडिल ईस्ट का असर: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव ने ग्लोबल मार्केट को डराया।
  • कच्चा तेल महंगा: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव उछलकर 86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
  • सेक्टोरल हाल: बैंकिंग, ऑटो और आईटी सेक्टर में बिकवाली; जबकि मेटल और फार्मा में खरीदारी रही।

किन सेक्टर्स में हुई बिकवाली, कहां हुई खरीदारी?

आज के कारोबारी सत्र में बाजार का सेंटीमेंट पूरी तरह से कमजोर नजर आया। बड़े शेयरों में गिरावट के कारण कई प्रमुख सेक्टर्स लाल निशान में चले गए:

लाल निशान वाले सेक्टर (बिकवाली)हरे निशान वाले सेक्टर (खरीदारी)
निफ्टी ऑटो (Nifty Auto)निफ्टी मेटल (Nifty Metal)
निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेजनिफ्टी फार्मा (Nifty Pharma)
निफ्टी FMCG और निफ्टी ITनिफ्टी हेल्थकेयर (Nifty Healthcare)
पीएसयू बैंक (PSU Bank)

Share Market Crash: बाजार गिरने के 4 मुख्य कारण

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आज भारतीय बाजार में आई इस भारी गिरावट के पीछे मुख्य रूप से 4 कारण जिम्मेदार हैं:

1. मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान का तनाव: शेयर बाजार पर सबसे बड़ा असर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का पड़ा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने दुनियाभर के निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे माहौल में निवेशक शेयर बाजार (जोखिम वाले निवेश) से पैसा निकालकर सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर भाग रहे हैं।

2. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आग: भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। मिडिल ईस्ट के तनाव से ब्रेंट क्रूड का भाव 86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की लागत बढ़ सकती है, जिससे कंपनियों का मुनाफा घटेगा और देश में महंगाई बढ़ेगी।

3. विदेशी निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली: हाल के दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया है। ग्लोबल हालात को देखते हुए विदेशी निवेशक काफी सावधानी बरत रहे हैं। जब FII बड़े पैमाने पर शेयर बेचते हैं, तो बाजार पर भारी दबाव पड़ता है।

4. महंगाई और RBI की ब्याज दरें: देश में रिटेल महंगाई (Retail Inflation) के आंकड़े एक बार फिर बढ़े हैं। निवेशकों को डर है कि अगर महंगाई लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रही, तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना सकता है। कर्ज महंगा होने से कंपनियों की कमाई और विस्तार योजनाओं पर सीधा असर पड़ता है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक ग्लोबल हालात (विशेषकर मिडिल ईस्ट) सामान्य नहीं होते और विदेशी निवेशकों का भरोसा वापस नहीं लौटता, तब तक भारतीय शेयर बाजार में यह उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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