Raipur Fake Paneer: रायपुर में प्लाईवुड फैक्ट्री की आड़ में बन रहा था एनालॉग पनीर, खाद्य विभाग ने 6.5 क्विंटल माल जब्त किया
रायपुर में खाद्य विभाग ने नकली पनीर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए बड़ी मात्रा में एनालॉग पनीर (Raipur Fake Paneer) जब्त किया है। मामला बीरगांव इलाके का है, जहां एक प्लाईवुड फैक्ट्री की आड़ में पनीर तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई। खाद्य विभाग की कार्रवाई में करीब साढ़े छह क्विंटल एनालॉग पनीर जब्त किया गया है।
यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब खाद्य पदार्थों में मिलावट और नकली उत्पादों की बिक्री को लेकर लगातार निगरानी बढ़ाई जा रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार फैक्ट्री परिसर में पनीर का उत्पादन किया जा रहा था और इसके लिए सांवलिया सेठ मिल्क एंड प्रोडक्ट नाम का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।
प्लाईवुड फैक्ट्री में चल रहा था अलग कारोबार, Raipur Fake Paneer
मामला बीरगांव की एक प्लाईवुड फैक्ट्री से जुड़ा है। सामान्य तौर पर जिस परिसर का इस्तेमाल प्लाईवुड से संबंधित गतिविधियों के लिए होना चाहिए था, वहीं खाद्य विभाग को पनीर तैयार किए जाने की जानकारी मिली।
जांच के दौरान विभागीय टीम ने बड़ी मात्रा में तैयार उत्पाद बरामद किया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार जब्त सामग्री की मात्रा करीब 6.5 क्विंटल बताई गई है।
खाद्य विभाग की कार्रवाई के बाद अब इस बात की जांच की जा रही है कि तैयार किए जा रहे उत्पाद में किन सामग्रियों का इस्तेमाल किया जा रहा था और इसे बाजार में कहां-कहां भेजे जाने की तैयारी थी।
क्या होता है एनालॉग पनीर? Raipur Fake Paneer
एनालॉग पनीर को सामान्य दूध से तैयार पारंपरिक पनीर से अलग माना जाता है। खाद्य उत्पादों में किसी विकल्प या अन्य सामग्री का इस्तेमाल करके बनाए गए ऐसे उत्पादों को लेकर खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी है।
समस्या तब गंभीर हो जाती है जब किसी वैकल्पिक या गैर-अनुमोदित उत्पाद को वास्तविक दूध से बने पनीर के रूप में बाजार में बेचा जाए या उपभोक्ताओं को उसकी वास्तविक संरचना की जानकारी न दी जाए।
इसी कारण खाद्य विभाग ऐसे मामलों में उत्पाद के नमूने लेने, सामग्री की जांच कराने और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई करने की प्रक्रिया अपनाता है।
खाद्य विभाग ने क्यों की कार्रवाई?
रायपुर में खाद्य विभाग लगातार खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच करता है। खास तौर पर दूध, पनीर, मिठाई और अन्य जल्दी खराब होने वाले खाद्य पदार्थों को लेकर त्योहारी और सामान्य दोनों अवधि में जांच अभियान चलाए जाते हैं।
बीरगांव में हुई कार्रवाई भी इसी तरह की निगरानी से जुड़ी बताई गई है। विभागीय टीम को जब फैक्ट्री में पनीर तैयार किए जाने की जानकारी मिली तो वहां जांच की गई और बड़ी मात्रा में तैयार सामग्री बरामद की गई।
रिपोर्ट के अनुसार परिसर में अंशु बंसल नामक व्यक्ति के द्वारा सांवलिया सेठ मिल्क एंड प्रोडक्ट के नाम से पनीर तैयार किए जाने की बात सामने आई है।
अब आगे क्या होगी कार्रवाई?
किसी भी खाद्य उत्पाद को केवल देखने या प्रारंभिक जांच के आधार पर अंतिम रूप से मिलावटी अथवा असुरक्षित घोषित नहीं किया जाता। इसके लिए खाद्य सुरक्षा विभाग की निर्धारित प्रक्रिया के तहत नमूने और उत्पाद की जांच महत्वपूर्ण होती है।
इस मामले में जब्त किए गए उत्पाद की आगे जांच और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल से यह स्पष्ट होगा कि उत्पाद खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप था या नहीं और उसका उत्पादन एवं विपणन किस नियम के तहत किया जा रहा था।
यदि जांच में नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है तो संबंधित व्यक्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आगे कार्रवाई की जा सकती है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या जरूरी है?
पनीर खरीदते समय उपभोक्ताओं को केवल कीमत देखकर उत्पाद नहीं खरीदना चाहिए। पैकेटबंद पनीर की स्थिति में लेबल, निर्माता का नाम, उत्पादन तिथि, पैकिंग विवरण और संबंधित लाइसेंस की जानकारी देखना उपयोगी है।
खुले पनीर की खरीदारी करते समय भी साफ-सफाई और भंडारण की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। असामान्य गंध, रंग या बनावट दिखाई देने पर उत्पाद खरीदने से बचना बेहतर है।
रायपुर में सामने आया यह मामला इस बात की ओर भी ध्यान खींचता है कि खाद्य पदार्थों की आपूर्ति श्रृंखला पर निगरानी कितनी महत्वपूर्ण है। खासकर पनीर जैसे रोजमर्रा के खाद्य उत्पादों में गुणवत्ता की जांच सीधे उपभोक्ता सुरक्षा से जुड़ी होती है।






