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Raigarh Land Scam: बिना नक्शे के बिकी 526 एकड़ जमीन, 5 बड़े सवाल

रायगढ़। जनदखल। रायगढ़ जिले के नक्शाविहीन ग्राम नटवरपुर और चक्रधरपुर की 526 एकड़ यानी 219.424 हेक्टेयर भूमि की खरीद-बिक्री (Raigarh Land Scam) पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि जिन गांवों का अधिकृत राजस्व नक्शा पिछले करीब 15 वर्षों से आईआईटी रुड़की के माध्यम से तैयार ही हो रहा है, वहां 157 खसरा नंबरों की जमीन का सौदा शेल कंपनियों के नाम पर दर्ज भूमि के जरिए पूरा कर उसे महाराष्ट्र पावर जनरेशन कंपनी यानी महाजेंको को सौंप दिया गया। पीएमओ में शिकायत के बाद महाराष्ट्र सरकार ने महाजेंको से इस मामले में रिपोर्ट मांगी है।

क्या है पूरा मामला, Raigarh Land Scam

दस्तावेजों के अनुसार महाजेंको ने रायपुर की लर्न नेचर कंसल्टेंट्स को क्षतिपूर्ति वनीकरण (सीए) के लिए भूमि उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी थी। कंपनी ने नटवरपुर, चक्रधरपुर और बंगुरसिया क्षेत्र की जमीन खरीदकर महाजेंको को हस्तांतरित कर दी। इसके बाद वन विभाग ने डीजीपीएस सर्वे के आधार पर करीब 214 हेक्टेयर भूमि का सीमांकन कर कब्जा ले लिया और घेराव तथा पौधरोपण का काम भी शुरू कर दिया है।

बिना अंतिम नक्शे के कैसे हुआ सौदा

भू-अभिलेख विभाग के अनुसार जिले के 15 गांव नक्शाविहीन हैं। इनमें से 8 गांवों के नक्शे अंतिम प्रकाशन के लिए भेजे जा चुके हैं। नटवरपुर में सत्यापन कार्य जारी है, जबकि चक्रधरपुर का प्रारंभिक प्रकाशन होना अभी बाकी है। नियमानुसार पहले एसडीएम कार्यालय से प्रारंभिक प्रकाशन, फिर दावा-आपत्ति और अंत में कलेक्टर द्वारा अंतिम प्रकाशन होता है। इसके बावजूद राजस्व विभाग ने बिक्री नकल जारी कर दी और खरीद-बिक्री केवल नजरी नक्शे और मौके के कब्जे के आधार पर हो गई।

शेल कंपनियों की आशंका क्यों

पीएमओ में की गई शिकायत और आरटीआई से मिले दस्तावेजों के अनुसार इन गांवों में आधा दर्जन से अधिक कंपनियों के नाम पर भूमि दर्ज थी। कई कंपनियों में इंद्रपाल सिंह भाटिया डायरेक्टर हैं, जबकि अन्य कंपनियों में अलग-अलग निदेशक होने के बावजूद पावर ऑफ अटॉर्नी इंद्रपाल सिंह भाटिया के नाम पर है। कई कंपनियों का पता भी एक ही है। दावा किया जा रहा है कि इन कंपनियों की वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियां धरातल पर नहीं दिखतीं। एक और तथ्य यह सामने आया है कि उप पंजीयन विभाग के जिस तत्कालीन कर्मचारी एस.के. बेहरा को पहले नटवरपुर में एक जमीन खरीदी के पंजीयन मामले में निलंबित किया गया था, बाद में इन्हीं कंपनियों और महाजेंको के बीच हुए अनुबंध के लिए स्टाम्प की खरीद उनके ही माध्यम से हुई और कई रजिस्ट्रियों में वे गवाह के रूप में भी दर्ज हैं।

अधिकारियों का पक्ष

रायगढ़ वन मंडल के डीएफओ अरविंद पीएम ने कहा कि कंपनी द्वारा प्रस्तावित भूमि की उपयोगिता की जांच के बाद राजस्व और अन्य विभागों से सहमति ली गई है। उनके अनुसार महाजेंको द्वारा दी गई सीए भूमि का डीजीपीएस सर्वे कराकर चिन्हांकन किया गया है और 214 हेक्टेयर भूमि कब्जे में ली गई है।

आगे क्या होगा

आईआईटी रुड़की का अंतिम नक्शा आने पर यदि वास्तविक सीमाएं और कब्जे मौजूदा स्थिति से अलग पाए जाते हैं, तो महाजेंको को दी गई यह सीए भूमि प्रशासन और वन विभाग के लिए बड़ी कानूनी और प्रशासनिक चुनौती बन सकती है। फिलहाल महाराष्ट्र सरकार की मांगी गई रिपोर्ट पर नजर रहेगी।

एक नजर में:

  • भूमि: 526 एकड़ (219.424 हेक्टेयर), 157 खसरा नंबर
  • गांव: नटवरपुर और चक्रधरपुर (नक्शाविहीन), जिला रायगढ़
  • खरीदार: महाजेंको (महाराष्ट्र पावर जनरेशन कंपनी), उद्देश्य क्षतिपूर्ति वनीकरण
  • वन विभाग का कब्जा: डीजीपीएस सर्वे के आधार पर करीब 214 हेक्टेयर
  • शिकायत: पीएमओ में, महाराष्ट्र सरकार ने महाजेंको से रिपोर्ट मांगी

यह मामला राजस्व रिकॉर्ड और जमीन के सौदों के बीच के अंतर को सामने रखता है। नक्शा अंतिम रूप से प्रकाशित हुए बिना इतने बड़े रकबे की खरीद-बिक्री और हस्तांतरण पर उठे सवालों का जवाब अब जांच और आईआईटी रुड़की के अंतिम नक्शे से ही मिलेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: रायगढ़ में कितनी जमीन की खरीद-बिक्री पर सवाल उठे हैं?

उत्तर: नक्शाविहीन ग्राम नटवरपुर और चक्रधरपुर की 526 एकड़ यानी 219.424 हेक्टेयर भूमि पर सवाल उठे हैं। यह जमीन 157 खसरा नंबरों में दर्ज है और इसे शेल कंपनियों के जरिए महाजेंको को सौंपे जाने का आरोप है।

प्रश्न 2: सीए भूमि क्या होती है?

उत्तर: सीए यानी क्षतिपूर्ति वनीकरण (Compensatory Afforestation) वह भूमि है, जो किसी परियोजना के लिए वन भूमि के उपयोग के बदले वनीकरण के लिए वन विभाग को दी जाती है। इसी उद्देश्य से महाजेंको ने यह भूमि वन विभाग को सौंपी है।

प्रश्न 3: इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?

उत्तर: पीएमओ में शिकायत की गई है, जिसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने महाजेंको से रिपोर्ट मांगी है। वहीं रायगढ़ डीएफओ का कहना है कि भूमि की उपयोगिता जांच और विभागीय सहमति के बाद ही डीजीपीएस सर्वे कर 214 हेक्टेयर भूमि कब्जे में ली गई है।

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