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Naxal Case Withdrawal Bastar: नक्सल मामलों में बंद लोगों की रिहाई पर सरकार गंभीर, डिप्टी CM ने दिया भरोसा

बस्तर के उन परिवारों के लिए राहत भरी खबर है, जिनके सदस्य वर्षों से नक्सल प्रकरणों में जेल में बंद हैं। उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने विधानसभा में बस्तर क्षेत्र से आए जनप्रतिनिधियों, नक्सल प्रकरणों में निरुद्ध लोगों के परिजनों, नक्सल पीड़ितों और युवाओं से मुलाकात कर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार ऐसे प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

Naxal Case Withdrawal Bastar पर सरकार का रुख क्या है

उप मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों के खिलाफ गंभीर जनहानि का कोई मामला दर्ज नहीं है, उनके प्रकरणों की शीघ्र और न्यायसंगत समीक्षा की जाएगी। सरकार ऐसे सभी लोगों की जल्द रिहाई के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है और प्रत्येक पात्र मामले में विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि माओवादी हिंसा ने बस्तर के कई निर्दोष परिवारों को गहरी पीड़ा दी है।

बस्तर के युवाओं की सुनी गई बात

मुलाकात के दौरान बस्तर से आए युवाओं और परिजनों ने अपनी समस्याएं सीधे गृह मंत्री के सामने रखीं। कई परिवारों ने बताया कि उनके सदस्य वर्षों से मुकदमों का सामना कर रहे हैं, जिससे पूरे परिवार का जीवन प्रभावित हुआ है। सरकार का कहना है कि प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाना और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना प्राथमिकता में है।

बस्तर में बदलते हालात

बीते वर्षों में बस्तर संभाग में सुरक्षा और विकास दोनों मोर्चों पर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है, वहीं दूरस्थ गांवों तक सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के प्रयास तेज हुए हैं। पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को शासन की योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है।

नक्सल प्रकरणों की समीक्षा और रिहाई की प्रक्रिया आगे किस रफ्तार से बढ़ती है, इस पर बस्तर के हजारों परिवारों की निगाहें टिकी हैं।

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