जिंदा इंसान को मृत बताकर सौंपा शव, रायपुर के मित्तल हॉस्पिटल पर जांच कमेटी गठित, तीन दिन में मांगी रिपोर्ट

रायपुर। किसी के लिए भी यह कल्पना करना मुश्किल है कि जिस परिवार ने अपने किसी अपने को अंतिम विदाई देने की तैयारी कर ली हो, वही इंसान अचानक एंबुलेंस में जिंदा हो उठे। लेकिन रायपुर के लोधीपारा चौक स्थित मित्तल हॉस्पिटल में ठीक ऐसा ही हुआ। इस चौंकाने वाले Mittal Hospital Raipur negligence मामले ने पूरे छत्तीसगढ़ को हिलाकर रख दिया है।
क्या है पूरा मामला?
पुरानी भिलाई के देवबलोदा निवासी रामअवतार रात्रे तीन जून को अपने घर के बाथरूम में गिर गए थे। गंभीर रूप से घायल रामअवतार को परिजन मित्तल हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि उनकी पसली टूट गई है और हालत बेहद नाजुक है। इलाज के दौरान अस्पताल ने रामअवतार को मृत घोषित कर दिया और शव परिजनों को सौंप दिया।
परिजन एंबुलेंस में शव रखकर अंतिम संस्कार के लिए निकले ही थे कि तभी कुछ ऐसा हुआ जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। मृत घोषित रामअवतार के हाथ-पैर हिलने लगे। परिजनों ने तत्काल उन्हें पानी पिलाया और बेहतर इलाज के लिए रायपुर के मेकाहारा अस्पताल ले गए। हालांकि मेकाहारा में इलाज के दौरान रामअवतार की मौत हो गई। परिजनों ने इस पूरे घटनाक्रम को मोबाइल से रिकॉर्ड किया, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
सीएमएचओ ने गठित की जांच कमेटी
Mittal Hospital Raipur negligence के इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी यानी सीएमएचओ ने चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। इस टीम में डॉ. संजीव वोहरा, डॉ. विनाश चतुर्वेदी, डॉ. श्वेता सोनवानी और सनत कुमार पटेल शामिल हैं। सीएमएचओ ने तीन दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
परिवार का सवाल, क्या मिलेगा न्याय?
मृतक के परिजनों ने मित्तल हॉस्पिटल की घोर लापरवाही को रामअवतार की मौत के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। अब सबकी नजरें जांच कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं। देखना यह होगा कि Mittal Hospital Raipur negligence के इस मामले में दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है और पीड़ित परिवार को न्याय मिलता है या नहीं।



