कामधेनु विश्वविद्यालय की भर्ती पर राजभवन की रोक, इंटरव्यू और नियुक्ति अगले आदेश तक स्थगित

दुर्ग। दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय, अंजोरा में शैक्षणिक पदों की चल रही भर्ती प्रक्रिया पर राजभवन ने रोक लगा दी है। राज्यपाल सचिवालय की ओर से 1 अक्टूबर को जारी आदेश के आधार पर भर्ती, साक्षात्कार और नियुक्ति की प्रक्रिया को अगले आदेश तक स्थगित करने की जानकारी सामने आई है। विश्वविद्यालय में भर्ती और निर्माण संबंधी कार्यों को लेकर राजभवन तक शिकायतें पहुंची थीं। इन शिकायतों के आधार पर जांच की प्रगति की निगरानी करने और तब तक भर्ती प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। रोक का अर्थ यह नहीं है कि शिकायतों में लगाए सभी आरोप साबित हो चुके हैं; जांच के निष्कर्ष आने बाकी हैं।
राज्यपाल सचिवालय का 1 अक्टूबर का आदेश
रिपोर्ट के मुताबिक राज्यपाल सचिवालय ने विश्वविद्यालय में शैक्षणिक पदों की भर्ती, साक्षात्कार और नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से रोकने के निर्देश दिए हैं।
राज्यपाल विश्वविद्यालय के कुलाधिपति भी होते हैं। इस भूमिका में राजभवन विश्वविद्यालय प्रशासन से संबंधित मामलों में नियमों और वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत जानकारी मांग सकता है और जरूरी निर्देश जारी कर सकता है।
फिलहाल विश्वविद्यालय को अगले आदेश तक चयन प्रक्रिया रोकनी होगी। जो उम्मीदवार इंटरव्यू या अगले चरण की तैयारी कर रहे थे, उनके लिए आगे की तारीख नई प्रशासनिक अनुमति के बाद ही स्पष्ट होगी।
130 पदों की भर्ती का मामला
रिपोर्ट में विश्वविद्यालय के करीब 130 पदों की भर्ती पर रोक का उल्लेख किया गया है। उस रिपोर्ट के मुताबिक कार्यपरिषद के कुछ सदस्यों और जनप्रतिनिधियों की ओर से शिकायतें सामने आने के बाद मामला राजभवन तक पहुंचा।
अलग स्रोतों में पदों की संख्या और शिकायतों के विवरण को अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया है, लेकिन भर्ती प्रक्रिया के स्थगन की मूल सूचना कई मीडिया संस्थानों ने समान रूप से दी है।
निर्माण और रखरखाव कार्यों पर भी शिकायतें
भर्ती के साथ विश्वविद्यालय में भवन निर्माण और रखरखाव से जुड़ी कथित अनियमितताओं की शिकायतों का भी उल्लेख है। राजभवन ने संबंधित जांच की प्रगति को देखने के निर्देश दिए हैं।
भर्ती में किन बातों पर उठे सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक शिकायतों में रोस्टर निर्धारण, बैकलॉग पदों, पदों की संख्या और चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए थे। कुछ शिकायतों में यह भी आरोप था कि औपचारिक अनुमोदन से जुड़े प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।
ये शिकायतकर्ताओं के आरोप हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का पूरा पक्ष और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही यह तय होगा कि नियमों का वास्तव में उल्लंघन हुआ या नहीं।
उम्मीदवारों पर क्या असर
भर्ती स्थगित होने का सबसे सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा जो आवेदन कर चुके हैं और साक्षात्कार या आगे के चरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अभी भर्ती रद्द नहीं बताई गई है, बल्कि अगले आदेश तक स्थगित की गई है।
इसलिए उम्मीदवारों को अफवाह या सोशल मीडिया संदेश के बजाय विश्वविद्यालय और राजभवन से जारी आधिकारिक सूचनाओं पर निर्भर रहना चाहिए। नई इंटरव्यू तारीख या भर्ती की बहाली होती है तो उसका औपचारिक आदेश जारी होना आवश्यक होगा।
जांच पूरी होने के बाद तय होगा अगला कदम
अब आगे दो स्तर पर स्थिति साफ होनी है। पहला, भर्ती प्रक्रिया से संबंधित शिकायतों पर जांच का निष्कर्ष। दूसरा, राजभवन का अगला आदेश।
यदि जांच में प्रक्रियागत कमी मिलती है तो भर्ती प्रक्रिया में सुधार, नया रोस्टर, संशोधित विज्ञापन या अन्य प्रशासनिक कदम संभव हो सकते हैं। यदि शिकायतें प्रमाणित नहीं होतीं तो मौजूदा प्रक्रिया बहाल करने का विकल्प रह सकता है। वास्तविक निर्णय सक्षम प्राधिकरण के आदेश से ही होगा।






