छत्तीसगढ़ से मानसून की विदाई के संकेत, रायपुर में 34 डिग्री तक पारा; अगले दो दिन शुष्क रह सकता है मौसम

रायपुर। लगातार बारिश के दौर के बाद छत्तीसगढ़ में अब मौसम का मिजाज बदल रहा है। प्रदेश के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनने की जानकारी सामने आई है। बारिश की गतिविधियां कम होने के साथ दिन में गर्मी और उमस महसूस की जा रही है। राजधानी रायपुर में अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। मौसम संबंधी रिपोर्टों के मुताबिक अगले दो दिनों में प्रदेश के बड़े हिस्से में मौसम शुष्क रह सकता है। उत्तर छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में रात के तापमान में गिरावट के संकेत भी दिखाई देने लगे हैं।
मानसून वापसी की प्रक्रिया कैसे तय होती है
भारत मौसम विज्ञान विभाग केवल बारिश बंद होने के आधार पर मानसून की वापसी घोषित नहीं करता। IMD के निर्धारित मानकों में लगातार शुष्क मौसम, निचले वायुमंडल में हवा की व्यवस्था और नमी में कमी जैसे संकेत देखे जाते हैं। मानसून की आगे की वापसी में भौगोलिक निरंतरता और वातावरण में नमी की कमी भी अहम कारक होती है।
यही वजह है कि किसी शहर में दो-तीन दिन बारिश नहीं होने का मतलब अपने आप मानसून की आधिकारिक विदाई नहीं होता। मौसम विभाग की औपचारिक घोषणा क्षेत्रवार मौसम प्रणाली का आकलन करने के बाद की जाती है।
रायपुर में गर्मी और उमस
राजधानी रायपुर में 2 अक्टूबर को अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री सेल्सियस दर्ज होने की जानकारी है, जो सामान्य से लगभग 1.6 डिग्री अधिक था। न्यूनतम तापमान करीब 25.2 डिग्री सेल्सियस रहा। 3 अक्टूबर के लिए भी आसमान मुख्य रूप से साफ और अधिकतम तापमान लगभग 34 डिग्री रहने की संभावना बताई गई है।
मानसून के आखिरी चरण में बारिश थमने के तुरंत बाद वातावरण की नमी पूरी तरह समाप्त नहीं होती। इस कारण तापमान बहुत ज्यादा न होने पर भी उमस के कारण गर्मी अधिक महसूस हो सकती है। हवा की दिशा और नमी कम होने के साथ रात के तापमान में धीरे-धीरे गिरावट शुरू होती है।
अंबिकापुर में रात अपेक्षाकृत ठंडी
उत्तर छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान करीब 19.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किए जाने की जानकारी है। यह मैदानी हिस्सों की तुलना में काफी कम है।
अक्टूबर के शुरुआती दिनों में मानसून वापसी के साथ सरगुजा जैसे उत्तरी क्षेत्रों में सुबह और रात में हल्की ठंड महसूस होना सामान्य मौसमी बदलाव का हिस्सा है। हालांकि इसे पूरे प्रदेश में सर्दी की शुरुआत नहीं माना जा सकता। रायपुर, दुर्ग और अन्य मैदानी हिस्सों में अभी दिन का तापमान अधिक बना रह सकता है।
इस मानसून में औसत से अधिक बारिश
आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 30 सितंबर के दौरान प्रदेश में करीब 1195.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य औसत लगभग 1142.1 मिलीमीटर बताया गया। यानी राज्य स्तर पर बारिश सामान्य से करीब पांच प्रतिशत अधिक रही।
लेकिन राज्य का औसत सभी जिलों की स्थिति नहीं बताता। नारायणपुर में बारिश सामान्य से काफी अधिक रही, जबकि सरगुजा, जशपुर और बेमेतरा जैसे जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज किए जाने की जानकारी है। इस तरह एक ही मानसून सीजन में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में वर्षा का वितरण काफी असमान रहा।
जुलाई और सितंबर में बदली तस्वीर
जून में मानसून की शुरुआत कमजोर रही। जुलाई में बारिश तेजी से बढ़ी और सितंबर में भी सामान्य से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई। सितंबर के आखिरी दिनों की तेज बारिश का असर जलाशयों और नदियों पर भी दिखाई दिया।
अब बारिश की गतिविधि कमजोर होने के बाद तापमान कुछ समय के लिए ऊपर जा सकता है। इसके बाद वातावरण की नमी घटने और हवाओं की दिशा बदलने पर रात के तापमान में कमी आने की संभावना रहती है।
किसानों और आम लोगों के लिए क्या मायने
धान और दूसरी खरीफ फसलों के लिए मानसून की वापसी का समय महत्वपूर्ण होता है। खेतों में पानी की जरूरत, कटाई की तैयारी और फसल की स्थिति जिले तथा किस्म के हिसाब से अलग होती है। इसलिए किसानों के लिए स्थानीय कृषि एवं मौसम सलाह को प्राथमिकता देना बेहतर होगा।
शहरी क्षेत्रों में फिलहाल दिन की धूप और उमस से राहत तुरंत मिलने की संभावना कम है। रात के तापमान में धीरे-धीरे गिरावट के बाद ही मौसम में स्पष्ट बदलाव महसूस होगा।






