छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला: NEET UG में General Category चुनने के बाद EWS लाभ नहीं

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने NEET UG 2026 की राज्य स्तरीय काउंसिलिंग से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में याचिका खारिज कर दी है। मामला एक 17 वर्षीय छात्रा की उस मांग से संबंधित था जिसमें उसने सामान्य वर्ग से EWS श्रेणी में बदलाव की अनुमति मांगी थी। अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और प्रक्रिया को देखते हुए याचिका स्वीकार नहीं की।
किस मामले पर हुई सुनवाई?
बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में NEET UG 2026 की राज्य स्तरीय काउंसिलिंग से संबंधित मामला पहुंचा था। याचिकाकर्ता छात्रा ने अपनी श्रेणी सामान्य वर्ग से EWS में बदलने की मांग की थी।
मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने की। अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
Category चयन क्यों महत्वपूर्ण है?
NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश प्रक्रिया में आरक्षण श्रेणी का चयन उम्मीदवार के लिए महत्वपूर्ण होता है। General, EWS, OBC, SC और ST जैसी श्रेणियों के तहत पात्रता और दस्तावेजों की अलग-अलग आवश्यकताएं होती हैं।
एक बार आवेदन प्रक्रिया में किसी श्रेणी का चयन करने के बाद उसे बदलने की अनुमति हर चरण में नहीं मिलती। यही वजह है कि काउंसिलिंग के दौरान category से जुड़े विवाद सामने आते हैं।
EWS श्रेणी का लाभ कैसे जुड़ा है?
EWS यानी Economically Weaker Section श्रेणी आर्थिक आधार पर निर्धारित आरक्षण व्यवस्था से संबंधित है। इसके लिए उम्मीदवार को निर्धारित पात्रता और प्रमाण-पत्र संबंधी शर्तें पूरी करनी होती हैं।
लेकिन केवल आर्थिक रूप से पात्र होना ही पर्याप्त नहीं होता। प्रवेश प्रक्रिया में निर्धारित समय पर सही श्रेणी का चयन और जरूरी दस्तावेज जमा करना भी महत्वपूर्ण है।
हाईकोर्ट का निर्णय क्यों महत्वपूर्ण है?
NEET UG की काउंसिलिंग में लाखों उम्मीदवार अलग-अलग श्रेणियों के तहत प्रवेश प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं। यदि काउंसिलिंग के बाद category बदलने की अनुमति हर मामले में दी जाए तो मेरिट और आरक्षण व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला इस बात की ओर संकेत करता है कि प्रवेश प्रक्रिया में निर्धारित नियमों और समयसीमा का पालन महत्वपूर्ण है।
हालांकि किसी एक मामले के फैसले को सभी परिस्थितियों पर स्वतः लागू मानना उचित नहीं होगा। प्रत्येक मामले में तथ्य और संबंधित नियमों की स्थिति अलग हो सकती है।
छात्रों के लिए क्या सीख?
NEET या किसी अन्य प्रतियोगी प्रवेश परीक्षा के आवेदन में category चुनते समय उम्मीदवारों को बेहद सावधानी बरतनी चाहिए। आवेदन करने से पहले अपनी पात्रता, प्रमाण-पत्र और संबंधित काउंसिलिंग नियमों की जांच करना जरूरी है।
विशेष रूप से EWS या अन्य आरक्षित श्रेणियों में आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके पास निर्धारित अवधि के भीतर वैध प्रमाण-पत्र उपलब्ध हो।
कानूनी प्रक्रिया का महत्व
हाईकोर्ट का फैसला केवल एक छात्रा के मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे प्रवेश प्रक्रिया में नियमों के महत्व पर भी चर्चा होती है। अदालतों के सामने ऐसे मामले तब आते हैं जब उम्मीदवार प्रशासनिक निर्णय या काउंसिलिंग प्रक्रिया में बदलाव की मांग करते हैं।
ऐसे मामलों में अदालत नियम, अधिसूचना, दस्तावेज और संबंधित परिस्थितियों का परीक्षण करती है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने NEET UG 2026 राज्य स्तरीय काउंसिलिंग में General Category से EWS Category में बदलाव की मांग करने वाली 17 वर्षीय छात्रा की याचिका खारिज कर दी है।
इस फैसले के बाद NEET उम्मीदवारों के लिए एक बार फिर यह स्पष्ट होता है कि आवेदन और काउंसिलिंग के दौरान category चयन तथा संबंधित प्रमाण-पत्रों की जानकारी को गंभीरता से लेना जरूरी है।






