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Chhattisgarh Rain Alert 2026: बस्तर में इंद्रावती खतरे के निशान से ऊपर, बांधों से छोड़ा जा रहा पानी

चार रिपोर्टों से समझिए बारिश की स्थिति

रायपुर। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में लगातार बारिश के बाद शुक्रवार 25 सितंबर को बस्तर से लेकर धमतरी और महानदी बेसिन तक जलस्तर तेजी से बढ़ा है। Chhattisgarh Rain Alert 2026 की रिपोर्ट में अलग-अलग जिलों से सुबह 8:51 बजे के बाद सामने आए अपडेट को एक साथ पढ़ने पर सबसे गंभीर स्थिति बस्तर संभाग और बांधों के कैचमेंट क्षेत्रों में दिखाई देती है। यह स्वतंत्र ऑन-ग्राउंड एक्सक्लूसिव का दावा नहीं, बल्कि कई सत्यापित ताजा रिपोर्टों का डेटा-आधारित एक्सप्लेनर है।

जगदलपुर में इंद्रावती नदी का जलस्तर शुक्रवार सुबह पुराने पुल के पास खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया। रिपोर्ट के अनुसार खतरे का स्तर 8.300 मीटर है, जबकि सुबह 9:30 बजे नदी 9.500 मीटर पर बह रही थी। यानी जलस्तर खतरे के निशान से करीब 1.2 मीटर अधिक था।

जगदलपुर में सड़क संपर्क पर असर

लगातार बारिश के कारण जगदलपुर के निचले इलाकों में पानी भरने और कई मार्ग बाधित होने की खबर है। मेडिकल कॉलेज की ओर जाने वाले मार्ग सहित कुछ सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई। नेशनल हाईवे-30 के जगदलपुर-केशलूर हिस्से में भी व्यवधान की सूचना सामने आई है। बीजापुर में NH-63 के कुछ हिस्सों पर भी बारिश का प्रभाव बताया गया।

लालबाग और दूसरे निचले इलाकों में जलभराव से स्थानीय आवागमन प्रभावित हुआ। बस्तर में स्थिति इसलिए भी गंभीर बनी हुई है क्योंकि लगातार वर्षा से नदियों, छोटे नालों और खेतों का पानी तेजी से मुख्य जलधाराओं में पहुंच रहा है।

पांच लोगों के फंसे होने की सूचना, SDRF सक्रिय

दोपहर के एक अपडेट में जगदलपुर के नए इंद्रावती पुल के पास टोमास फार्म हाउस क्षेत्र में पांच लोगों के फंसे होने की सूचना दी गई और SDRF की टीम के सक्रिय होने की बात कही गई।

ऐसे हालात में स्थानीय स्तर पर प्रशासन द्वारा बंद किए गए पुल या जलमग्न सड़क पार करने की कोशिश सबसे बड़ा जोखिम बन सकती है। बहते पानी में सड़क की वास्तविक सतह, गड्ढे या पुलिया की स्थिति दिखाई नहीं देती। इसलिए पानी उतरने और प्रशासन से मार्ग खुलने की पुष्टि तक वैकल्पिक रास्ता ही सुरक्षित विकल्प है।

धमतरी में गंगरेल 98 प्रतिशत से ज्यादा भरा

धमतरी जिले में गंगरेल बांध का भराव 98.14 प्रतिशत बताया गया है। रिपोर्ट में 64,117 क्यूसेक पानी की आवक और कुल 54,950 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी दी गई है। इनमें 48,950 क्यूसेक पानी महानदी और करीब 6,000 क्यूसेक नहर की ओर छोड़ा जा रहा था।

इसी रिपोर्ट में मुरुमसिल्ली बांध को 100 प्रतिशत, दुधावा को 97.21 प्रतिशत और सोंढूर को 88.18 प्रतिशत भरा बताया गया। संबंधित बांधों से भी पानी छोड़े जाने के कारण नदी किनारे के गांवों के लिए सतर्कता बढ़ गई है।

स्कूलों की छुट्टी, परीक्षाएं भी प्रभावित

बालोद में भारी बारिश के कारण सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई। रिपोर्ट के मुताबिक निर्धारित परीक्षाओं को 28 सितंबर के लिए स्थानांतरित किया गया।

धमतरी जिले में भी सरकारी, निजी और अनुदान प्राप्त विद्यालयों को बंद रखने का आदेश सामने आया। यहां परीक्षा की नई तारीख अलग से घोषित किए जाने की बात कही गई। कोंडागांव, कांकेर और कुछ अन्य प्रभावित जिलों में भी स्कूल बंद रखने और राहत टीमों को सक्रिय करने की सूचना है।

अगले कुछ घंटे क्यों महत्वपूर्ण

बाढ़ की स्थिति केवल उस जगह हुई बारिश पर निर्भर नहीं करती जहां नदी बह रही है। ऊपरी कैचमेंट में हुई वर्षा और बांधों से पानी छोड़े जाने का असर कई घंटे बाद निचले क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है। इसी कारण बारिश कम हो जाने के बावजूद नदी का स्तर कुछ समय तक बढ़ सकता है।

बस्तर में इंद्रावती और धमतरी-महानदी क्षेत्र में प्रशासन की जलस्तर निगरानी महत्वपूर्ण रहेगी। बांधों के गेट से पानी छोड़े जाने की मात्रा बदल सकती है, इसलिए एक समय का डिस्चार्ज आंकड़ा पूरे दिन के लिए स्थायी नहीं माना जाना चाहिए।

25 सितंबर दोपहर तक उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर स्थिति का मुख्य संदेश स्पष्ट है, निचले इलाकों, नदी-नालों और जलमग्न सड़कों के आसपास अतिरिक्त सावधानी की जरूरत है और स्थानीय प्रशासन के ताजा निर्देश को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

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