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Chhattisgarh Jail Overcrowding: 33 जेलों में क्षमता से करीब 8 हजार ज्यादा बंदी, हाईकोर्ट ने मांगी प्रगति

CG News (बिलासपुर): Chhattisgarh Jail Overcrowding का मुद्दा एक बार फिर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में उठा है। जेलों में क्षमता से ज्यादा कैदियों और बंदियों की बदहाल व्यवस्था को लेकर चल रही जनहित याचिका पर राज्य सरकार ने शपथपत्र पेश किया है। इसमें जो आंकड़े दिए गए हैं, वे बताते हैं कि प्रदेश की जेलें अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा बोझ उठा रही हैं।

शपथपत्र के मुताबिक 30 सितंबर 2026 की स्थिति में प्रदेश की 33 जेलों की कुल क्षमता 15,025 बंदियों की है, जबकि इनमें 22,980 बंदी रखे गए हैं। यानी क्षमता से करीब 7,955 बंदी ज्यादा हैं।

चीफ जस्टिस की बेंच में हुई सुनवाई

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस कृष्णा राम महापात्रा और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच में हुई। अदालत ने सरकार की ओर से दी गई जानकारी को रिकॉर्ड पर लिया और आगे की प्रगति रिपोर्ट मांगी। अगली सुनवाई 2 दिसंबर 2026 को होगी।

गौर करने वाली बात यह है कि सितंबर 2026 में इसी मामले में पेश जानकारी में जेलों की क्षमता 15,485 और बंदियों की संख्या 19,476 बताई गई थी। नए आंकड़ों में बंदियों की संख्या करीब साढ़े 3 हजार ज्यादा दिख रही है। आंकड़ों के इस अंतर पर भी आगे सुनवाई में सवाल उठ सकते हैं।

Chhattisgarh Jail Overcrowding और पथर्रा ओपन जेल का इंतजार

भीड़ कम करने के उपायों में बेमेतरा जिले के पथर्रा में बनी ओपन जेल का जिक्र अहम है। 200 बंदियों की क्षमता वाली यह खुली जेल अब तक शुरू नहीं हो पाई है। शपथपत्र में बताया गया कि सुरक्षा से जुड़े कुछ मुद्दों के कारण इसका संचालन रुका हुआ है।

ओपन जेल के लिए 48 पदों के प्रस्ताव पर विचार किया गया था। इनमें से 21 सितंबर 2026 के आदेश से 15 कर्मचारियों के पद मंजूर किए गए हैं। यानी स्टाफ की व्यवस्था अभी अधूरी है। ओपन जेल में अच्छे आचरण वाले सजायाफ्ता कैदियों को रखा जाता है, जो दिन में काम पर जाते हैं और कम निगरानी में रहते हैं। इससे बंद जेलों का बोझ भी घटता है और कैदियों को समाज में लौटने की तैयारी का मौका भी मिलता है।

कैदियों के लिए रोजगार प्रशिक्षण और कर्ज की व्यवस्था

सरकार ने शपथपत्र में बंदियों के पुनर्वास से जुड़े कदमों की जानकारी भी दी है। 17 अगस्त 2026 को जन शिक्षण संस्थान रायपुर के साथ समझौता हुआ है, जिसके तहत बंदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा 12 फरवरी 2026 को इंडियन ओवरसीज बैंक के साथ अनुबंध हुआ है, ताकि जेल से रिहा होने वाले लोगों को अपना काम शुरू करने के लिए कर्ज मिल सके।

जेलों में काम करने वाले बंदियों की मजदूरी दर में बदलाव पर भी विचार चल रहा है। लंबे समय से यह शिकायत रही है कि जेल में मिलने वाली मजदूरी बहुत कम है और इससे बंदी अपने परिवार की कोई मदद नहीं कर पाते।

भीड़भाड़ से क्या दिक्कतें आती हैं

क्षमता से ज्यादा बंदी होने पर बैरकों में सोने की जगह कम पड़ती है, साफ-सफाई बिगड़ती है और बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ता है। निगरानी के लिए प्रहरियों की संख्या भी कम पड़ जाती है, जिससे झगड़े और सुरक्षा में चूक की आशंका रहती है। जानकार मानते हैं कि भीड़ की सबसे बड़ी वजह विचाराधीन बंदी हैं, जो फैसले के इंतजार में सालों जेल में रहते हैं। छोटे अपराधों में जमानत और मुकदमों के तेज निपटारे से यह बोझ कम हो सकता है। देश की जेलों से जुड़े आंकड़े राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की प्रिजन स्टैटिस्टिक्स रिपोर्ट में देखे जा सकते हैं।

याचिका से अब तक क्या बदला

इस जनहित याचिका की वजह से जेलों की हालत लगातार अदालत की निगरानी में है। हर सुनवाई में सरकार को बंदियों की संख्या, नई बैरकों, स्टाफ और सुविधाओं की जानकारी देनी पड़ती है। ओपन जेल के लिए पदों की मंजूरी, प्रशिक्षण के लिए समझौता और रिहा बंदियों के लिए बैंक से कर्ज की व्यवस्था, ये सभी कदम इसी प्रक्रिया के दौरान सामने आए हैं। हालांकि आंकड़े बताते हैं कि जमीन पर बोझ अब भी कम नहीं हुआ है। जब तक नई जेलें और अतिरिक्त बैरकें नहीं बनतीं, तब तक हालात में बड़ा सुधार मुश्किल दिखता है।

Chhattisgarh Jail Overcrowding मामले में 2 दिसंबर की सुनवाई में ओपन जेल और नई जेलों की प्रगति पर अदालत का रुख अहम रहेगा। बिलासपुर से जुड़ी दूसरी खबर रतनपुर महामाया मंदिर में नवरात्र सुरक्षा भी पढ़ें। अदालत से जुड़ा एक और मामला बिलाईगढ़ नगर पंचायत केस में देखें।

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