Chhattisgarh Congress PCC Chief: बैज के ‘उम्र’ वाले तंज पर गरमाई सियासत, बघेल बोले- ‘यह हाईकमान का फैसला’

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में पीसीसी चीफ की कुर्सी पर घमासान
रायपुर। छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की राजनीति में एक बार फिर कांग्रेस संगठन के भीतर भारी हलचल देखने को मिल रही है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के मौजूदा अध्यक्ष दीपक बैज (Deepak Baij) का कार्यकाल इसी अगस्त महीने में खत्म हो रहा है। ऐसे में अगले पीसीसी चीफ को लेकर पार्टी के भीतर बयानबाजी, गुटबाजी और दावेदारी का दौर तेज हो गया है। यह पद इसलिए भी बेहद अहम है, क्योंकि जो भी नया अध्यक्ष बनेगा, उसी के नेतृत्व में कांग्रेस अगला विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ेगी।
भूपेश बघेल का बड़ा बयान
इस पूरे सियासी घटनाक्रम और अध्यक्ष पद की रेस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी है।
- हाईकमान पर छोड़ा फैसला: बघेल ने स्पष्ट किया कि पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज बने रहेंगे या टीएस सिंहदेव (TS Singh Deo) को कमान मिलेगी, यह पूरी तरह से पार्टी हाईकमान के अधिकार क्षेत्र का मामला है।
- टिप्पणी से इनकार: उन्होंने कहा, “दिल्ली जो तय करेगा वही होगा, फिर हमको इस पर बात क्यों करनी है?” इसके साथ ही बघेल ने टीएस सिंहदेव के बयानों पर किसी भी तरह की सीधी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
उम्र बनाम अनुभव की बहस: बैज और सिंहदेव आमने-सामने
कांग्रेस की राजनीति में ‘उम्रदराज नेताओं का दौर बनाम युवाओं को मौका’ की बहस फिर से छिड़ गई है। इसकी शुरुआत दीपक बैज के उस बयान से हुई जिसमें उन्होंने टीएस सिंहदेव पर तंज कसा था।
- बैज का बयान: बैज ने कहा था कि ‘बाबा साहेब’ (टीएस सिंहदेव) को अब दिल्ली जाना चाहिए और यहां प्रदेश में युवाओं को मौका दिया जाना चाहिए।
- सिंहदेव का पलटवार: इस पर टीएस सिंहदेव ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनमें अभी भी युवाओं जैसी ऊर्जा बाकी है। सिंहदेव गुट का मानना है कि उनकी सबको साथ लेकर चलने की शैली आज भी प्रासंगिक है। पार्टी को ऐसे नेता की जरूरत है जो गुटबाजी खत्म कर सके और सर्वमान्य हो।
दीपक बैज के नेतृत्व पर उठ रहे सवाल
वर्तमान अध्यक्ष दीपक बैज की स्वाभाविक दावेदारी तो है, लेकिन उनके ट्रैक रिकॉर्ड को लेकर पार्टी के अंदर ही कई सवाल खड़े हो रहे हैं:
- चुनावी हार का सिलसिला: बैज के नेतृत्व में कांग्रेस न सिर्फ 2023 का विधानसभा चुनाव हारी, बल्कि बैज खुद भी अपना चुनाव हार गए।
- लोकसभा और स्थानीय चुनाव: लोकसभा में कांग्रेस 11 में से केवल 1 सीट जीत पाई (जिसका श्रेय भी चरणदास महंत की व्यक्तिगत छवि को दिया गया)। इसके अलावा, नगर निगम चुनाव में सभी मौजूदा महापौर हार गए और रायपुर के विधानसभा उपचुनाव में भी पार्टी को शिकस्त झेलनी पड़ी।
- संगठनात्मक विफलता: अपना कार्यकाल पूरा होने के कगार पर होने के बावजूद, बैज अब तक अपनी कार्यकारिणी का गठन नहीं कर पाए हैं, जिससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी है।
पीसीसी चीफ के प्रमुख दावेदार
आगामी चुनावों को देखते हुए कांग्रेस को क्षेत्रीय और जातीय समीकरण साधने वाले एक मजबूत चेहरे की तलाश है। फिलहाल अध्यक्ष पद की रेस में तीन प्रमुख नाम चर्चा में हैं:
- दीपक बैज: मौजूदा अध्यक्ष होने के नाते स्वाभाविक दावेदार।
- टीएस सिंहदेव: अपने अनुभव और सर्वमान्य छवि के आधार पर मजबूत दावेदार।
- उमेश पटेल: पूर्व सीएम भूपेश बघेल के खेमे से युवा चेहरे के रूप में इनका नाम भी तेजी से उभर रहा है।
बहरहाल, अध्यक्ष की कुर्सी किसे मिलेगी यह तो दिल्ली दरबार तय करेगा, लेकिन इस खींचतान ने रायपुर के राजनीतिक हलकों में पारा जरूर चढ़ा दिया है।



