BJP Chief Ministers: दूसरी पार्टियों से आए नेताओं को 6 साल में कैसे मिला सत्ता का शिखर?

BJP Chief Ministers:भारतीय राजनीति में इन दिनों एक बेहद दिलचस्प और नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी में अब सिर्फ अंदरूनी कैडर ही नहीं बल्कि बाहर से आए नेता भी सत्ता के शीर्ष पर पहुंच रहे हैं। हालांकि पहले ऐसा माना जाता था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि वाले नेताओं को ही मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलती है। इसके बावजूद हाल के वर्षों में यह धारणा पूरी तरह से बदल गई है। दूसरी पार्टियों से आए कई प्रभावशाली नेताओं ने अपनी काबिलियत के दम पर लगभग छह साल के भीतर अपने-अपने राज्यों में मुख्यमंत्री का पद हासिल कर लिया है। परिणामस्वरूप यह साबित होता है कि बीजेपी में प्रतिभा और चुनाव जीतने की क्षमता को सबसे ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।
असम और त्रिपुरा में बाहरी नेताओं का दबदबा
पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी की रणनीति का सबसे बड़ा उदाहरण असम और त्रिपुरा हैं। हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस छोड़कर अगस्त 2015 में बीजेपी का दामन थामा था। इसके अलावा उन्होंने पार्टी को असम में प्रचंड जीत दिलाई और सर्वानंद सोनोवाल सरकार में नंबर दो की भूमिका निभाई। लगभग छह साल के इंतजार के बाद मई 2021 में उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया गया। हाल ही में 2026 के चुनावों में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल की है।
- मानिक साहा भी 2016 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे।
- उन्हें 2022 में बिप्लब देब की जगह त्रिपुरा का मुख्यमंत्री बनाया गया।
- इसके बाद 2023 के चुनावों में भी पार्टी ने उन पर भरोसा जताया और वे दोबारा सीएम बने।
- पेमा खांडू और एन बीरेन सिंह जैसे नेता भी दल बदलकर मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने में सफल रहे।
बिहार और बंगाल में सत्ता परिवर्तन
पूर्वी भारत में भी बीजेपी ने इसी सफल फॉर्मूले को लागू किया है। सम्राट चौधरी कभी आरजेडी और जेडीयू का हिस्सा हुआ करते थे। उन्होंने 2017 में बीजेपी की सदस्यता ली थी। पार्टी ने उन्हें विधान परिषद का नेता और फिर प्रदेश अध्यक्ष जैसी अहम जिम्मेदारियां दीं। नीतीश कुमार के एनडीए में लौटने पर वे डिप्टी सीएम बने। हालांकि उन्होंने धैर्य रखा और 15 अप्रैल 2026 को वे बिहार में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बन गए। इसी तरह पश्चिम बंगाल में टीएमसी का मजबूत स्तंभ रहे शुभेंदु अधिकारी दिसंबर 2020 में बीजेपी में आए। उन्होंने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराकर अपनी ताकत का अहसास कराया। लगातार पांच साल तक संघर्ष करने के बाद 2026 के चुनावों में उन्होंने टीएमसी के गढ़ को ध्वस्त कर दिया। अंततः 9 मई 2026 को शुभेंदु पश्चिम बंगाल के नौवें मुख्यमंत्री बन गए। इन चारों नेताओं का सफर यह स्पष्ट करता है कि बीजेपी में अब बाहरी नेताओं के लिए भी शिखर तक पहुंचने के दरवाजे पूरी तरह से खुले हुए हैं।



