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PM Modi Economic Appeal: क्या देश की अर्थव्यवस्था किसी बड़े संकट की ओर बढ़ रही है?

क्या आपने कभी सोचा था कि जिस देश को लगातार विश्व की सबसे तेज और मजबूत अर्थव्यवस्था बताया जा रहा हो वहां अचानक जनता से अपने खर्चों में कटौती करने को कहा जाएगा। दरअसल चुनाव खत्म होते ही प्रधानमंत्री की तरफ से एक ऐसी सलाह आई है जिसने सबको चौंका दिया है। मिडल ईस्ट में चल रहे तनाव का हवाला देते हुए देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की गई है। इसके अलावा लोगों से विदेश यात्राओं से बचने और पेट्रोल डीजल का इस्तेमाल कम करने को भी कहा गया है। हालांकि इस अचानक आई सलाह ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पीएम मोदी की अपील के मुख्य बिंदु

प्रधानमंत्री ने सिर्फ पेट्रोल और विदेश यात्राओं पर ही बात नहीं की बल्कि सोने की खरीदारी को भी सीमित करने की सलाह दी है। इसके अलावा उन्होंने वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की वकालत की है ताकि ईंधन की खपत को कम किया जा सके।

  • ट्रकों की जगह मालगाड़ियों से सामान की ढुलाई पर जोर दिया गया है।
  • लोगों से निजी वाहनों के बजाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने को कहा गया है।
  • किसानों को रासायनिक खाद कम करने और प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी गई है।
  • विदेशी पर्यटन की जगह घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने की बात कही गई है।

परिणामस्वरूप इन सात अपीलों को लेकर देश में एक अजीब सी बेचैनी देखने को मिल रही है। एक तरफ जहां कुछ लोग इसे समय की मांग और राष्ट्रहित में उठाया गया कदम बता रहे हैं वहीं आलोचक इसे सरकार की आर्थिक मोर्चे पर विफलता के रूप में देख रहे हैं।

राहुल गांधी और विपक्ष का तीखा प्रहार

इस पूरे मामले पर विपक्ष ने सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे व्यवस्था की पूरी तरह से विफलता करार दिया है। उनका साफ कहना है कि यह कोई प्रेरणा देने वाला संदेश नहीं है बल्कि सरकार की नाकामी का सबसे बड़ा सबूत है। राहुल गांधी ने सवाल दागा है कि एक दशक से ज्यादा समय तक सत्ता में रहने के बाद देश ऐसे मोड़ पर क्यों आ गया है जहां जनता को यह बताना पड़े कि क्या खरीदना है और क्या नहीं।

दरअसल राहुल गांधी का आरोप है कि सरकार हर बड़े संकट का बोझ चुपचाप आम जनता के कंधों पर डाल देती है। इसके अलावा कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने भी मांग की है कि अगर हालात इतने ही खराब हैं तो संसद का विशेष सत्र बुलाकर देश के सामने सच्चाई रखी जानी चाहिए। बहरहाल अब देखना यह होगा कि सरकार विपक्ष के इन सवालों का क्या जवाब देती है और आने वाले दिनों में देश की अर्थव्यवस्था किस करवट बैठती है।

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