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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सिंगापुर दौरे पर, 6 अक्टूबर तक निवेशकों से बैठक; उद्योग और निवेश संभावनाओं पर रहेगा फोकस

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय 3 अक्टूबर से सिंगापुर प्रवास पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक यह दौरा 6 अक्टूबर तक चलेगा। मुख्यमंत्री की अगुवाई वाला राज्य प्रतिनिधिमंडल सिंगापुर में उद्योग समूहों, संस्थागत प्रतिनिधियों और संभावित निवेशकों के साथ बैठक करेगा। बातचीत का मुख्य विषय छत्तीसगढ़ में उपलब्ध औद्योगिक अवसर, निवेश की संभावना और राज्य की नई औद्योगिक प्राथमिकताएं रहेंगी। मुख्यमंत्री का यह दौरा निवेश प्रस्ताव जुटाने की प्रक्रिया का हिस्सा है; किसी बैठक या प्रस्ताव को वास्तविक निवेश मानने से पहले परियोजना की मंजूरी, पूंजी निवेश, निर्माण और उत्पादन जैसे आगे के चरण पूरे होना जरूरी होगा।

3 से 6 अक्टूबर तक सिंगापुर कार्यक्रम

पूर्व में जारी दौरा कार्यक्रम के अनुसार विदेश मंत्रालय के नामांकन पर छत्तीसगढ़ के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल को 3 से 6 अक्टूबर के बीच सिंगापुर जाना है। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय कर रहे हैं। इसमें सिंगापुर-इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ यानी SING Forum 2026 से जुड़ी गतिविधियों का भी उल्लेख है।

3 अक्टूबर की सुबह प्रकाशित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री को सिंगापुर में विभिन्न उद्योग समूहों और संभावित निवेशकों से मुलाकात करनी है। बैठकों में राज्य के संसाधनों और उद्योगों के लिए उपलब्ध संभावनाओं को प्रस्तुत किया जाएगा।

किन क्षेत्रों पर छत्तीसगढ़ का जोर

छत्तीसगढ़ की औद्योगिक पहचान लंबे समय से स्टील, सीमेंट, खनिज और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों से जुड़ी रही है। नई औद्योगिक नीति में सरकार ने इस दायरे को फार्मा, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, खाद्य प्रसंस्करण और दूसरे उभरते क्षेत्रों तक बढ़ाने की रणनीति रखी है।

राज्य के आधिकारिक निवेश पोर्टल पर भी औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के तहत फार्मा, टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी समेत कई क्षेत्रों को निवेश के लिए प्राथमिकता वाले सेक्टर के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

सिंगापुर की बैठकों में यही व्यापक औद्योगिक प्रोफाइल विदेशी निवेशकों के सामने रखने की संभावना है।

निवेश बैठक और वास्तविक निवेश में अंतर

निवेश संबंधी विदेश दौरों में कंपनियां शुरुआती स्तर पर किसी परियोजना में रुचि दिखा सकती हैं, बैठक कर सकती हैं या प्रस्ताव दे सकती हैं। इसके बाद वास्तविक परियोजना के लिए जमीन, बिजली, पानी, पर्यावरण और अन्य वैधानिक मंजूरियों की जरूरत हो सकती है।

इसके साथ कंपनी की अपनी वित्तीय मंजूरी, प्रोजेक्ट डिजाइन, निर्माण और उत्पादन शुरू करने के चरण आते हैं। इसलिए किसी निवेश सम्मेलन में घोषित रकम को तत्काल जमीन पर आया निवेश समझना सही नहीं होता।

छत्तीसगढ़ के लिहाज से इस दौरे के बाद देखने वाली मुख्य बात यह होगी कि कितने प्रस्ताव औपचारिक परियोजना में बदलते हैं और उनसे वास्तविक उत्पादन तथा रोजगार कब शुरू होता है।

सरकार निवेशकों को क्या व्यवस्था दिखा रही है

राज्य ने हाल के वर्षों में उद्योगों के लिए ऑनलाइन मंजूरी और सिंगल विंडो व्यवस्था को आगे बढ़ाया है। Invest Chhattisgarh पोर्टल पर भूमि प्रबंधन, आवश्यक अनुमतियों की पहचान और निवेश प्रोत्साहनों से जुड़ी सेवाएं प्रदर्शित की गई हैं।

विदेशी निवेशक किसी राज्य का आकलन केवल प्राकृतिक संसाधनों के आधार पर नहीं करते। जमीन की उपलब्धता, लॉजिस्टिक्स, बाजार से दूरी, बिजली, कुशल श्रम, अनुमति प्रक्रिया और नीति की स्थिरता जैसे कारक भी निवेश निर्णय में अहम होते हैं।

स्थानीय रोजगार भी रहेगा महत्वपूर्ण सवाल

यदि सिंगापुर दौरे के बाद कोई बड़ा निवेश प्रस्ताव आता है तो राज्य के लिए केवल निवेश राशि नहीं, उससे पैदा होने वाला स्थानीय रोजगार भी अहम होगा।

फैक्ट्री स्थापित होने और उत्पादन शुरू होने के बीच लंबा समय लग सकता है। इसलिए आने वाले महीनों और वर्षों में परियोजनाओं की प्रगति को जमीन आवंटन, निर्माण की शुरुआत, उत्पादन क्षमता और रोजगार के वास्तविक आंकड़ों के आधार पर मापना ज्यादा उपयोगी होगा।

6 अक्टूबर तक कई दौर की बैठकें

दौरे का कार्यक्रम 6 अक्टूबर तक निर्धारित है। इस दौरान उद्योग और संस्थागत प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग स्तर की बातचीत प्रस्तावित है।

दौरा पूरा होने के बाद सरकार की ओर से यदि निवेश प्रस्तावों, समझौतों या कंपनियों के नामों की औपचारिक जानकारी जारी की जाती है तो उसके आधार पर यह साफ होगा कि किन क्षेत्रों में बातचीत ठोस प्रस्ताव तक पहुंची है।

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