BRICS Summit 2026: दिल्ली में विदेशी मेहमानों को परोसा जा रहा बिहार का ‘सत्तू और मखाना’, पढ़ें ₹30 हजार की नौकरी छोड़ ‘Sattuz’ बनाने वाले सचिन की कहानी

BRICS Summit 2026: दिल्ली में आयोजित हो रहे 18वें BRICS शिखर सम्मेलन (BRICS Summit) में दुनिया भर से विदेशी मेहमानों का आगमन शुरू हो गया है। इस बार विदेशी मेहमानों का स्वागत बिहार (Bihar) के पारंपरिक जायके के साथ किया जा रहा है। सम्मेलन की ‘वेलकम किट’ (Welcome Kit) में बिहार के दो खास प्रोडक्ट्स— सत्तू (Sattu) और मखाना (Makhana) को शामिल किया गया है।
इन दोनों प्रोडक्ट्स को ग्लोबल प्लेटफॉर्म मिलने पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “नए बिहार की नई पहचान, बिहार का स्वाद अब दुनिया के सामने। इससे ‘लोकल टू ग्लोबल’ (Local to Global) के संकल्प को मजबूती मिलेगी।”
विदेशी मेहमानों की वेलकम किट में जो सत्तू दिया जा रहा है, वह बिहार के स्टार्टअप ‘SATTUZ’ का है। इसके फाउंडर मधुबनी (Madhubani) जिले के सचिन कुमार हैं। आइए जानते हैं, कैसे 30 हजार की नौकरी छोड़ने वाले सचिन ने ठेले पर मिलने वाले सत्तू को इंटरनेशनल ब्रांड बना दिया।
मुंबई की नौकरी छोड़ी, गांव लौटकर ढूंढा अवसर
सचिन कुमार ने 2008 में सेल्स और मार्केटिंग में MBA किया था और वे मुंबई में 30,000 रुपये महीने की सैलरी पर बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर के रूप में काम कर रहे थे। कारोबारियों से मुलाकात के दौरान उनके मन में अपना खुद का बिजनेस (Startup) शुरू करने का विचार आया। 2009 में वे अपनी नौकरी छोड़कर मधुबनी लौट आए। काफी रिसर्च के बाद सचिन को महसूस हुआ कि बिहार की पहचान मखाना (Makhana) की पैकेजिंग और मार्केटिंग पर तो काम हो चुका है, लेकिन ‘सत्तू’ के क्षेत्र में कोई बड़ा प्रयोग नहीं हुआ है।
सड़क किनारे मिलने वाले सत्तू को बनाया ‘मॉडर्न ड्रिंक’
सचिन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि सड़क किनारे मिलने वाले सत्तू को किस रूप में बाजार में उतारा जाए कि लोग इसे आसानी से और सफाई के साथ इस्तेमाल कर सकें। उन्होंने अपनी मां की रेसिपी को आधार बनाया और लैब टेस्ट के बाद FSSAI से मंजूरी ली।
- अप्रैल 2018 में ‘Sattuz’ की शुरुआत: सचिन ने रेडी-टू-मिक्स सत्तू को सैशे (Sachet) में लॉन्च किया। शुरुआती ट्रैवल पैक की कीमत मात्र 30 रुपये रखी गई, जिसमें दो पेपर ग्लास, दो सैशे और स्टिरर शामिल थे।
- तीन फ्लेवर्स: Sattuz को मीठा, जलजीरा और चॉकलेट फ्लेवर में लॉन्च किया गया।
Shark Tank और IAN से मिला निवेशकों का साथ
2019 में कंपनी को इंडियन एंजल नेटवर्क (IAN), IIM कलकत्ता इनोवेशन पार्क और बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (BIA) से फंडिंग (Funding) हासिल हुई। दिसंबर 2021 में Sattuz ने मशहूर शो ‘शार्क टैंक इंडिया’ (Shark Tank India) के पहले सीजन में भी हिस्सा लिया। इसके बाद सचिन की पत्नी रिचा ने रेसिपी डेवलपमेंट की कमान संभाली और सत्तू का रेडी-टू-कुक स्टफिंग मिक्स (लिट्टी-पराठे के लिए) भी बाजार में उतारा।
अमेरिका और सिंगापुर तक पहुंचा सत्तू
आज Sattuz का बाजार सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है। अमेजन (Amazon), फ्लिपकार्ट (Flipkart) और अपनी वेबसाइट के जरिए वे अमेरिका और सिंगापुर जैसे देशों में भी सत्तू एक्सपोर्ट कर रहे हैं। कोविड लॉकडाउन के बाद हेल्दी फूड की बढ़ती मांग ने उनके बिजनेस को नई उड़ान दी।
फतुहा में लग रहा नया प्लांट: सचिन पटना के फतुहा (Fatuha) में 5,000 वर्गफुट का एक नया फूड प्रोसेसिंग प्लांट (BIADA की मदद से) लगा रहे हैं। इसके लिए केंद्र सरकार की PMFME योजना के तहत यूनियन बैंक से उन्हें 77 लाख रुपये का फाइनेंस भी मिला है।
2.5 लाख से शुरू किया था, आज करोड़ों का टर्नओवर
BRICS तक पहुंचने के सफर पर सचिन ने कहा, “BIADA के जरिए ही मुझे BRICS के बारे में पता चला और आज हमारा सत्तू विदेशी मेहमान भी चख रहे हैं।”
सचिन ने बताया कि उन्होंने यह कारोबार महज 2.5 लाख रुपये के निवेश से शुरू किया था। आज उनकी कंपनी का टर्नओवर लगभग 5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वर्तमान में उनका सबसे लोकप्रिय प्रोडक्ट ‘जलजीरा सत्तू’ है, जिसके रोजाना करीब 1,500 पैकेट तैयार किए जाते हैं।






