Ambikapur PM Awas Yojana: 4.25 लाख में खरीदे फ्लैट्स में पड़ी ‘भ्रष्टाचार की दरार’, सीपेज से लोग बेहाल; रहने से कर रहे इनकार

Ambikapur PM Awas Yojana: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के अंबिकापुर (Ambikapur) में गरीबों के पक्के मकान का सपना टूटता हुआ नजर आ रहा है। शहरी प्रधानमंत्री आवास योजना (Urban PM Awas Yojana) और ‘मोर जमीन मोर मकान’ योजना के तहत बनाए गए फ्लैट्स की गुणवत्ता इतनी खराब है कि अब हितग्राही वहां रहने से इनकार कर रहे हैं।
ठेकेदार की लापरवाही और भ्रष्टाचार के चलते लाखों रुपये देकर खरीदे गए इन नए फ्लैट्स की दीवारों में अभी से दरारें (Cracks) पड़ गई हैं और सीपेज (Seepage) की समस्या ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।
खबर की मुख्य बातें (Highlights)
- योजना का हाल: अंबिकापुर में शहरी प्रधानमंत्री आवास और ‘मोर जमीन मोर मकान’ योजना के फ्लैट्स जर्जर।
- गरीबों से लिए पैसे: लोगों ने 4.25 लाख रुपये में नगर निगम (Municipal Corporation) से खरीदे हैं ये फ्लैट्स।
- निर्माण में भ्रष्टाचार: फ्लैट्स की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें, छतों से रिस रहा है बरसात का पानी।
- लोगों में आक्रोश: घटिया निर्माण देखकर कई हितग्राही मकान वापस करने की कर रहे मांग।
बाहर से चमकते घर, अंदर भ्रष्टाचार की दरार
करीब 10 साल पहले इन फ्लैट्स के निर्माण के लिए भूमिपूजन किया गया था। वादा किया गया था कि गरीबों को बेहतर क्वालिटी (Good Quality) के मकान और पूरी सुविधाएं दी जाएंगी। बजट की कमी के चलते बीच में काम रुका, लेकिन पिछले 2 सालों से काम फिर से चल रहा है। 1200 में से 493 फ्लैट्स का निर्माण पूरा हो चुका है, जिसके लिए 22 करोड़ रुपये जारी किए गए थे।
बाहर से देखने पर तो ये करोड़ों के फ्लैट्स खूब चमक रहे हैं, लेकिन अंदर से इनकी हालत बेहद जर्जर हो चुकी है।
- कमरों की दीवारों पर बड़ी-बड़ी दरारें (Cracks) उभर आई हैं।
- सीपेज की समस्या इतनी ज्यादा है कि बरसात का पानी छतों से रिसकर कमरों में आ रहा है।
“पैसे पूरे दे दिए, अब वापस करना चाहते हैं फ्लैट”
हितग्राहियों का कहना है कि उन्होंने बड़ी उम्मीदों के साथ 4.25 लाख रुपये नगर निगम को देकर ये फ्लैट्स खरीदे थे। लेकिन गृह प्रवेश के कुछ दिन बाद ही ‘भ्रष्टाचार की दरारें’ देखकर उनकी नींद उड़ गई। वहां रहने वाले लोगों का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि इतना घटिया निर्माण (Poor Construction) किया जाएगा। परेशान लोग अब ठेकेदार और नगर निगम के अधिकारियों से समस्याओं को ठीक करने की गुहार लगा रहे हैं। वहीं, कुछ लोग तो इतने हताश हैं कि वे आवंटित फ्लैट को वापस तक करना चाहते हैं।
महापौर का आश्वासन, पर सिस्टम पर उठे सवाल
इस गंभीर मामले पर अंबिकापुर नगर निगम की महापौर (Mayor) मंजूषा भगत का कहना है कि जो निर्माण कार्य अधूरे हैं या ठेकेदार ने सही से पूरे नहीं किए हैं, उन्हें दुरुस्त कराया जाएगा। इसके अलावा, बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी फ्लैट्स में उपलब्ध कराई जाएंगी।
लेकिन इस पूरे मामले ने सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं:
- आखिर 22 करोड़ के इस बड़े प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग (Monitoring) कौन कर रहा था?
- क्या इंजीनियरों और अधिकारियों ने क्वालिटी चेक (Quality Check) किए बिना ही ठेकेदार को काम पास कर दिया?
- गरीबों की गाढ़ी कमाई से बने इन फ्लैट्स में हुए भ्रष्टाचार (Corruption) की जिम्मेदारी कौन लेगा?






