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Bijapur Digital Education: गोंडी में बच्चों से संवाद, डिजिटल पढ़ाई और करियर काउंसलिंग पर जोर

बीजापुर। बस्तर के दूरस्थ इलाकों में स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए (Bijapur Digital Education) केवल भवन और कक्षाओं पर नहीं, बल्कि डिजिटल संसाधन, करियर मार्गदर्शन, स्वास्थ्य और रचनात्मक गतिविधियों को भी प्राथमिकता देने की बात सामने आई है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने बीजापुर प्रवास के दौरान पुसनार स्थित पोटा केबिन आवासीय विद्यालय का निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों से गोंडी भाषा में संवाद किया और स्कूलों में डिजिटल शिक्षा तथा करियर काउंसलिंग की व्यवस्था प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

पुसनार पोटा केबिन में पढ़ाई से भोजन तक की जांच, Bijapur Digital Education

शिक्षा मंत्री ने पुसनार पोटा केबिन में बच्चों की कक्षाओं, शयनकक्ष, भोजन कक्ष और स्वच्छता व्यवस्था का निरीक्षण किया। ब्रिज कोर्स के विद्यार्थियों से बातचीत कर उनकी पढ़ाई और दिनचर्या की जानकारी ली।

विशेष बात यह रही कि मंत्री ने विद्यार्थियों से गोंडी भाषा में संवाद किया। (Bijapur Digital Education) बस्तर के आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय भाषा में बातचीत बच्चों और प्रशासन के बीच दूरी कम करने का माध्यम बन सकती है। निरीक्षण के दौरान प्रार्थना, प्रेरणा गीत, योग, खेल और अन्य नियमित गतिविधियों की भी जानकारी ली गई।

Digital Education के संसाधन सिर्फ कमरे में न पड़े रहें

विभागीय समीक्षा बैठक में हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में उपलब्ध डिजिटल संसाधनों का वास्तविक कक्षा शिक्षण में उपयोग सुनिश्चित करने को कहा गया। इसमें LED स्क्रीन, लर्निंग बोर्ड, प्रोजेक्टर और स्मार्ट टीवी शामिल हैं।

निर्देश दिया गया कि डिजिटल उपकरण खराब होने की स्थिति में उनकी मरम्मत स्थानीय स्तर पर उपलब्ध निधि से कराई जाए, ताकि उपकरण लंबे समय तक बंद न रहें और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

यह निर्देश विशेष रूप से दूरस्थ जिलों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां डिजिटल उपकरण उपलब्ध होने के बावजूद तकनीकी खराबी या रखरखाव की कमी के कारण उनका नियमित उपयोग चुनौती बन सकता है।

हाईस्कूल से ही करियर काउंसलिंग

बैठक में हाई और हायर सेकेंडरी स्तर पर करियर काउंसलिंग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। विद्यार्थियों को उनकी रुचि, क्षमता और प्रतिभा के अनुसार उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं तथा रोजगार के विकल्पों की जानकारी उपलब्ध कराने की बात कही गई।

दूरस्थ क्षेत्रों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के सामने अक्सर सूचना तक पहुंच की कमी बड़ी बाधा बनती है। ऐसे में नियमित करियर काउंसलिंग से उन्हें 10वीं या 12वीं के बाद उपलब्ध पाठ्यक्रमों, प्रवेश परीक्षाओं और सरकारी-निजी क्षेत्र के रोजगार विकल्पों की बेहतर जानकारी मिल सकती है।

U-DISE एंट्री सितंबर तक पूरी करने का निर्देश

मंत्री ने सभी विद्यार्थियों की U-DISE कोड के तहत प्रविष्टियां सितंबर महीने में पूरी करने को कहा है। छात्र डेटा सही और समय पर दर्ज होना कई सरकारी योजनाओं और शिक्षा से जुड़ी सुविधाओं की योजना बनाने के लिए आवश्यक है।

जिले के अधिकारियों को उपलब्ध संसाधनों का पारदर्शी और निर्धारित उद्देश्य के अनुसार इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया गया। जिला प्रशासन ने निर्देशों के समयबद्ध पालन की बात कही है।

हर बच्चे को खेल और नियमित स्वास्थ्य जांच

शैक्षणिक समीक्षा में खेल गतिविधियों को भी स्कूल शिक्षा का जरूरी हिस्सा बताया गया। निर्देश दिया गया कि हर विद्यार्थी को किसी न किसी खेल से जोड़ा जाए।

इसके साथ आवासीय विद्यालयों में विद्यार्थियों का हर महीने स्वास्थ्य परीक्षण कराने पर जोर दिया गया। आवासीय संस्थानों में बच्चे लंबे समय तक परिसर में रहते हैं, इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच, साफ-सफाई और भोजन व्यवस्था की निगरानी विशेष महत्व रखती है।

चार स्कूलों में तैयार होंगे बैंड दल

बीजापुर जिले के चार स्कूलों में बैंड दल तैयार करने की योजना भी सामने आई है। इसके लिए विभाग सामग्री उपलब्ध कराएगा और स्काउट तथा रेडक्रॉस गतिविधियों में शामिल विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने की तैयारी है।

चुनौती अब निर्देशों को जमीन पर उतारने की

बैठक में डिजिटल शिक्षा, करियर काउंसलिंग, खेल, स्वास्थ्य और स्कूल संसाधनों से जुड़े कई निर्देश दिए गए हैं। इनका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि स्कूल स्तर पर उपकरण चालू रहते हैं या नहीं, काउंसलिंग नियमित होती है या नहीं और स्वास्थ्य परीक्षण की निगरानी किस तरह की जाती है।

बीजापुर जैसे दूरस्थ जिले में यदि ये व्यवस्थाएं नियमित रूप से लागू होती हैं तो यह केवल परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के आगे के शैक्षणिक और करियर विकल्पों को भी प्रभावित कर सकती हैं।

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