Chhattisgarh rakshabandhan business records: छत्तीसगढ़ में रक्षाबंधन व्यापार के टूटे सभी ऐतिहासिक रिकॉर्ड

बाजारों में हुआ 820 करोड़ रुपये का बंपर टर्नओवर
छत्तीसगढ़ (Raipur): इस वर्ष का रक्षाबंधन त्योहार छत्तीसगढ़ के ( chhattisgarh rakshabandhan business records )खुदरा और थोक व्यापारियों के लिए लक्ष्मी की अपार कृपा लेकर आया है। राज्य के प्रमुख व्यापारिक संगठनों और चैंबर ऑफ कॉमर्स से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल chhattisgarh rakshabandhan business records पूरी तरह से ध्वस्त हो गए हैं। पूरे प्रदेश के बाजारों में रक्षाबंधन के पावन पर्व पर लगभग 820 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक कारोबार दर्ज किया गया है। पिछले तीन से चार वर्षों से छाई आर्थिक सुस्ती को पछाड़ते हुए इस बार बाजारों में ऐसी जबरदस्त रौनक दिखी कि राजधानी रायपुर, दुर्ग, भिलाई, बिलासपुर और जगदलपुर जैसे बड़े शहरों के प्रमुख व्यापारिक इलाके ग्राहकों की भीड़ से सराबोर रहे।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लागू की गई विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के कदमों के कारण आम जनता की क्रय शक्ति (Purchasing Power) में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। यही मुख्य वजह है कि इस बार मध्यम और लघु उद्योगों को उम्मीद से दोगुना व्यापार मिला है, जिससे राज्य की आंतरिक अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व गति मिली है।
पारंपरिक राखी, कपड़ा और मिठाई बाजार ने पार किया 650 करोड़ का आंकड़ा
यदि हम इस साल के व्यापारिक समीकरणों का बारीकी से विश्लेषण करें, तो chhattisgarh rakshabandhan business records को इस नए मुकाम पर पहुंचाने में सबसे बड़ा योगदान पारंपरिक राखी बाजार, कपड़ा उद्योग और मिठाई निर्माताओं का रहा है। अकेले फैंसी और रेशमी राखियों का थोक व खुदरा कारोबार ही पूरे राज्य में लगभग 350 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया।
इसके साथ ही, बहनों को दिए जाने वाले विशेष उपहारों जैसे फैशनेबल कपड़े, चमकीले सोने-चांदी के आभूषण, ट्रेंडी फुटवियर और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के मार्केट में भी 300 करोड़ रुपये से अधिक की रिकॉर्डतोड़ बिक्री दर्ज की गई है। त्योहार के अंतिम दो दिनों में मिठाई और ड्राई फ्रूट्स के आउटलेट्स पर पैर रखने की भी जगह नहीं थी, जिससे इस सेक्टर ने भी लगभग 120 करोड़ का मुनाफा कमाया।
मार्केट टर्नओवर का मुख्य विभाजन:
राखी बाजार: ₹350 करोड़
कपड़ा व उपहार: ₹300 करोड़
मिठाई व ड्राई फ्रूट्स: ₹120 करोड़
अन्य खुदरा व्यापार: ₹50 करोड़
चीनी सामानों का पूर्ण बहिष्कार और ‘वोकल फॉर लोकल’ की बड़ी जीत
इस बार के रक्षाबंधन बाजार की सबसे अनूठी और गौरवशाली बात यह रही कि चीन निर्मित प्लास्टिक राखियों और फैंसी लाइट्स का बाजार से पूरी तरह सफाया देखा गया। छत्तीसगढ़ की जनता ने स्थानीय और स्वदेशी उत्पादों पर अपना पूरा भरोसा जताया। राज्य के विभिन्न ग्रामीण अंचलों में सक्रिय महिला स्व-सहायता समूहों (Self Help Groups) द्वारा विशेष रूप से तैयार की गई गोबर की पवित्र राखियां, धान की राखियां, बस्तर के पारंपरिक बांस से बनी इको-फ्रेंडली राखियां और सुकमा के जंगलों से एकत्रित वनोपज आधारित राखियों की मांग शहरी बाजारों में सबसे ज्यादा रही।
इस देशव्यापी ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान ने न केवल छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कुटीर उद्योगों को नई संजीवनी प्रदान की है, बल्कि करोड़ों रुपये के राजस्व को चीन जाने से रोककर राज्य के भीतर ही चक्रित किया है, जिससे सीधे तौर पर हमारे ग्रामीण कारीगरों के घरों में खुशहाली आई है।






