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Chhattisgarh Elephant Conservation: हाथियों को डराया या पत्थर मारा तो सीधे FIR; 3 साल की जेल और 1 लाख का जुर्माना, वन विभाग का सख्त आदेश

State News (Raipur): छत्तीसगढ़ में जंगली हाथियों के संरक्षण (Chhattisgarh Elephant Conservation) और मानव-हाथी द्वंद्व को रोकने के लिए राज्य के वन विभाग ने अब तक का सबसे सख्त कदम उठाया है।

अब अगर किसी ने जंगली हाथियों को उकसाने, डराने या परेशान करने की कोशिश की, तो उसे सीधे जेल की हवा खानी पड़ेगी। वन विभाग ने निर्देश दिए हैं कि हाथियों के साथ क्रूरता करने वालों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी सजा दी जाएगी।

खबर की मुख्य बातें (Highlights)

  • सीधी FIR: हाथियों पर पत्थर फेंकने, पटाखे फोड़ने या आवाज कर डराने वालों पर सीधे मुकदमा दर्ज होगा।
  • सजा का प्रावधान: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत 3 से 7 साल तक की जेल हो सकती है।
  • भारी जुर्माना: दोषियों पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
  • आदेश जारी: पीसीसीएफ (वन्यप्राणी) ने सभी क्षेत्रीय वन अधिकारियों और टाइगर रिजर्व को निगरानी के निर्देश दिए हैं।

क्या हैं वन विभाग के नए निर्देश?

नए निर्देशों के मुताबिक, हाथियों के झुंड पर पत्थर फेंकने, पटाखे फोड़कर उन्हें डराने, तेज आवाज कर उकसाने या किसी भी तरह से प्रताड़ित करने वालों के खिलाफ अब तत्काल प्रभाव से एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी।

वन विभाग का स्पष्ट मानना है कि हाथियों को लगातार डराने या प्रताड़ित करने से उनका स्वभाव आक्रामक हो जाता है। इससे हाथी भड़क जाते हैं, जिससे मानव-हाथी संघर्ष (Human-Elephant Conflict) बढ़ता है और बेगुनाह ग्रामीणों की जन-धन की हानि का खतरा पैदा होता है।

Chhattisgarh Elephant Conservation: कितनी होगी सजा?

अगर कोई व्यक्ति हाथियों को परेशान करते हुए पाया जाता है, तो उसके खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act 1972) के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी:

  • पहली बार अपराध: दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की जेल, 1 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं।
  • दोबारा अपराध: अगर कोई व्यक्ति दोबारा यही अपराध करता है, तो उसकी सजा बढ़ाकर 7 साल तक की जा सकती है।

किन जिलों और रिजर्व के लिए जारी हुआ आदेश?

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) एवं मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक ने 17 जून 2026 को इस संबंध में कड़े निर्देश जारी किए हैं। यह आदेश सरगुजा, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग और कांकेर जिले के क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षकों को दिया गया है।

इसके साथ ही राज्य के प्रमुख टाइगर रिजर्व, उदंती-सीतानदी, अचानकमार और गुरु घासीदास-तमोर पिंगला के अधिकारियों को भी विशेष निगरानी रखने को कहा गया है। यह फैसला ‘प्रोजेक्ट एलिफेंट’ की स्टीयरिंग कमेटी के सदस्य मंसूर खान के अभ्यावेदन और केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के निर्देशों के आधार पर लिया गया है।

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