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Fuel Conservation in Chhattisgarh: ईंधन बचत की दिशा में छत्तीसगढ़ का बड़ा कदम: सरकारी गाड़ियों के पेट्रोल-डीजल पर ‘कोटा’ लागू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वैश्विक ईंधन संकट को देखते हुए की गई बचत की अपील का असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है। छत्तीसगढ़ सरकार ने फिजूलखर्ची रोकने और संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए सरकारी वाहनों के ईंधन आवंटन में कटौती के संकेत दिए हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री के संदेश को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही सरकारी विभागों में ईंधन कटौती पर बड़ा फैसला लिया जाएगा।

रायपुर नगर निगम की नई व्यवस्था

नगर निगम प्रशासन ने इस दिशा में सबसे पहले सख्ती दिखाई है:

  • ईंधन की सीमा: अधिकारियों के लिए पेट्रोल-डीजल के उपयोग की अधिकतम सीमा 108 लीटर प्रति माह तय कर दी गई है।
  • रिकवरी का प्रावधान: यदि कोई अधिकारी इस निर्धारित सीमा से अधिक ईंधन खर्च करता है, तो अतिरिक्त राशि की वसूली सीधे संबंधित अधिकारी से की जाएगी।
  • विभागवार तैयारी: निगम अब हर विभाग के लिए अलग-अलग सीमा तय करने की योजना बना रहा है ताकि उपयोग को और अधिक नियंत्रित किया जा सके।

आंकड़ों में ईंधन की खपत

प्रशासन द्वारा जोनों की समीक्षा में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:

  • जोन-नौ: यहां सबसे ज्यादा डीजल की खपत दर्ज की गई है, जो अब जांच के दायरे में है।
  • जोन-एक: इस क्षेत्र में सबसे कम ईंधन का उपयोग हुआ है, जिसे एक सकारात्मक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी की अपील के मुख्य बिंदु

संभावित वैश्विक संकट को भांपते हुए प्रधानमंत्री ने नागरिकों और प्रशासन के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:

  • सार्वजनिक परिवहन: निजी वाहनों के स्थान पर बस और मेट्रो (जहां उपलब्ध हो) का अधिक उपयोग करें।
  • कारपूलिंग: ईंधन बचाने के लिए साझा यात्रा यानी कारपूलिंग को बढ़ावा दें।
  • इलेक्ट्रिक वाहन (EV): भविष्य की जरूरतों के लिए ईवी को अपनाने पर जोर दिया गया है।

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