CPI Maoist Devji Surrender: माओवादी संगठन में बड़ी बगावत? देवजी के सरेंडर पर नक्सलियों की चिट्ठी में क्या है?

क्या भारत में भूमिगत माओवादी आंदोलन अपने सबसे बड़े वैचारिक संकट से गुजर रहा है। यह सवाल इन दिनों इसलिए उठ रहा है क्योंकि नॉर्थ कोऑर्डिनेशन कमेटी ने एक बेहद अहम प्रेस विज्ञप्ति जारी की है । दरअसल इस विज्ञप्ति में पार्टी के बड़े नेता रहे देवजी के सरेंडर को सीधे तौर पर क्रांति के साथ गद्दारी घोषित कर दिया गया है । सत्रह अप्रैल दो हज़ार छब्बीस को जारी इस पत्र में देवजी की तुलना प्राचंड के रास्ते पर चलने वाले अवसरवादियों से की गई है । इसके अलावा कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया माओवादी ने स्पष्ट किया है कि वे अपने हथियारबंद संघर्ष के रास्ते से पीछे नहीं हटेंगे ।
देवजी बने संगठन के सबसे बड़े दुश्मन
माओवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने यह बिल्कुल साफ कर दिया है कि देवजी अब उनके संगठन का हिस्सा नहीं रहे हैं । हालांकि उन्होंने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है जिसे पार्टी ने दुनिया भर के सर्वहारा वर्ग के साथ बहुत बड़ा धोखा माना है । पत्र में मुख्य रूप से कहा गया है कि देवजी ने एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में पार्टी को कानूनी दायरे में लाने और प्रतिबंध हटाने की वकालत की थी ।
इसके परिणामस्वरूप इसे लेनिन के मूल सिद्धांतों के बिल्कुल खिलाफ बताते हुए पार्टी ने उन्हें अपना कट्टर दुश्मन घोषित कर दिया है । संगठन का मानना है कि जो लोग अंडरग्राउंड पार्टी को खुला और कानूनी बनाना चाहते हैं वे असल में संगठन को खत्म करना चाहते हैं । इसलिए देवजी को उच्च स्तर का गद्दार और अवसरवादी करार दिया गया है ।
क्या सच में पार्टी के अंदर कोई टूट हुई है
मीडिया में आ रही पार्टी के भारी विभाजन की खबरों को इस प्रेस रिलीज में सिरे से खारिज किया गया है । संगठन का साफ तौर पर कहना है कि यह कोई टूट नहीं है बल्कि अवसरवादी और संशोधनवादी तत्वों के खिलाफ एक कड़ा वैचारिक संघर्ष है । इसके अलावा कोबाद बलराज और वेणुगोपाल उर्फ सोनू जैसे पुराने नेताओं को भी दुश्मन का एजेंट करार दिया गया है । पार्टी के अनुसार ये लोग क्रांतिकारियों के भेष में छुपे हुए गद्दार हैं ।
अंततः पार्टी ने यह भी साफ किया है कि वे हथियारबंद संघर्ष का रास्ता कभी नहीं छोड़ेंगे । उनका कहना है कि वे शुरू से ही हथियारबंद और भूमिगत रहकर अपना अभियान जारी रखेंगे । इसके साथ ही उन्होंने उन्नीस सौ सत्तर के दशक में चारू मजूमदार की शहादत के बाद हुए पतन का भी जिक्र किया और कहा कि वे इस बार भी हर झटके से उबरकर वापस खड़े होंगे।



