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CG Politics News: अमित जोगी को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उम्रकैद के फैसले पर लगाई रोक

छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की राजनीति से जुड़ी एक बेहद बड़ी और अहम कानूनी खबर सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत अजीत जोगी के बेटे और पूर्व विधायक अमित जोगी को बड़ी राहत दी है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने अमित जोगी की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के 2 अप्रैल के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उन्हें उम्रकैद (Life Imprisonment) की सजा सुनाई गई थी।
बिना सुने सजा कैसे? सुप्रीम कोर्ट ने उठाया सवाल
जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और विजय बिश्नोई की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।
- अमित जोगी की तरफ से दलील दी गई थी कि हाई कोर्ट ने 2007 के ट्रायल कोर्ट के बरी करने के फैसले को पलटते हुए उनकी बात नहीं सुनी।
- सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस पर हैरानी जताते हुए सवाल किया कि “आरोपी की बात सुने बिना सजा कैसे सुनाई जा सकती है?”
- कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि हाई कोर्ट के फैसले का असर और अमल फिलहाल रुका रहेगा।
- गौरतलब है कि हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक, अमित जोगी को गुरुवार को ही पुलिस के सामने सरेंडर (Surrender) करना था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस ‘स्टे’ (Stay Order) से उन्हें फौरी तौर पर एक बहुत बड़ी राहत मिल गई है।
क्या है 2003 का चर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड?
यह पूरा मामला 21 साल पुराना है, जब छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक सनसनीखेज राजनीतिक हत्या हुई थी।
- जून 2003 में नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के कद्दावर नेता रामावतार जग्गी की हत्या कर दी गई थी।
- इस मामले की जांच पहले छत्तीसगढ़ पुलिस कर रही थी, लेकिन जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने जांच पर असंतोष जताया, जिसके बाद जनवरी 2004 में यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया गया।
- CBI ने अपनी जांच में अमित जोगी को मुख्य आरोपियों में शामिल किया। सीबीआई का दावा था कि जग्गी को निशाना बनाने की साजिश रची गई थी और मई 2003 में मुख्यमंत्री आवास पर एक बैठक में इस योजना को अंतिम रूप दिया गया था।
ट्रायल कोर्ट से बरी, हाई कोर्ट से मिली थी उम्रकैद
इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानूनी लड़ाई काफी लंबी चली।
- साल 2007 में ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में 28 लोगों को दोषी ठहराया था, लेकिन सबूतों की कमी का हवाला देते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था।
- छत्तीसगढ़ सरकार और मृतक के परिजनों ने इस फैसले के खिलाफ अपील की थी।
- कई सालों की सुनवाई के बाद, हाल ही में 2 अप्रैल को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को ‘गैर-कानूनी, गलत और मनमाना’ बताते हुए अमित जोगी को दोषी करार दिया और उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी है।



