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Jaggi Murder Case Amit Jogi: जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को झटका! सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल राहत देने से किया इनकार

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड (Jaggi Murder Case) में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को इस मामले में तत्काल राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने इस प्रकरण से जुड़े दो अहम मामलों की संयुक्त सुनवाई आगामी 23 अप्रैल 2026 को तय की है।

अमित जोगी ने दी थी दो आदेशों को चुनौती

अमित जोगी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दो अलग-अलग आदेशों को चुनौती दी गई थी, जिन पर कोर्ट ने एक साथ सुनवाई करने का फैसला किया है।

  • पहला मामला उस आदेश से जुड़ा है जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को अपील करने की अनुमति दी गई थी।
  • दूसरा मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस अहम फैसले से जुड़ा है, जिसमें हाईकोर्ट ने अमित जोगी को हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
  • सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों मामलों को एक साथ क्लब करके सुनने का निर्णय लिया है, ताकि इस पूरे हाई-प्रोफाइल प्रकरण की व्यापक समीक्षा की जा सके।

क्या है 2003 का रामावतार जग्गी हत्याकांड?

इस मामले की जड़ें आज से दो दशक से भी ज्यादा पुरानी हैं।

  • 4 जून 2003 को रामावतार जग्गी की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज हत्याकांड ने उस समय पूरे प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया था।
  • जांच के दौरान पुलिस और सीबीआई ने कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया था। इनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह बाद में सरकारी गवाह बन गए थे।
  • लंबी सुनवाई के बाद 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी, लेकिन अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था।
  • 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत ने पर्याप्त साक्ष्य न होने के आधार पर अमित जोगी को दोषमुक्त कर दिया था।
  • इस फैसले को रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जहां से मामला आगे की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेज दिया गया था और हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी माना।

‘सरकार की प्रायोजित साजिश थी हत्या’

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सतीश जग्गी की ओर से उनके वकील बीपी शर्मा ने बेहद गंभीर आरोप लगाए थे।

  • उन्होंने अदालत में तर्क दिया था कि रामावतार जग्गी की हत्या तत्कालीन राज्य सरकार की “प्रायोजित साजिश” का हिस्सा थी।
  • वकील के अनुसार, जब सीबीआई ने अपनी जांच शुरू की, तब कथित तौर पर राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करके सबूतों को नष्ट कर दिया गया था।
  • ऐसे में उन्होंने अदालत से आग्रह किया था कि सिर्फ प्रत्यक्ष सबूतों के अभाव को आधार बनाकर आरोपियों को बरी नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसके पीछे रचे गए पूरे षड्यंत्र को ध्यान में रखते हुए कड़ा निर्णय लिया जाना चाहिए।

अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा 23 अप्रैल को दोनों मामलों की संयुक्त सुनवाई तय किए जाने के बाद इस केस पर एक बार फिर सबकी नजरें टिक गई हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि अमित जोगी को सर्वोच्च अदालत से राहत मिलती है या हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रहता है।

यह भी पढ़ें: जग्गी हत्याकांड में अमित जोगी को उम्रक़ैद, 3 हफ़्ते में करना होगा सरेंडर

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