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CG Nursing Crisis: 7751 में से केवल 4460 सीटों को INC की मान्यता, हजारों छात्राओं के भविष्य पर मंडराया संकट

CG Nursing Seats Crisis:छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में नर्सिंग की पढ़ाई कर रही हजारों छात्राओं के भविष्य और नौकरी पर एक बड़ा संकट गहरा गया है। जिन छात्राओं ने लाखों रुपये खर्च कर निजी कॉलेजों (Private Nursing Colleges) से बीएससी नर्सिंग (BSc Nursing) की पढ़ाई की है, अब उन्हें दूसरे राज्यों में नौकरी पाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस पूरी परेशानी की असली वजह कॉलेजों की लापरवाही और इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) से ‘उपयुक्तता प्रमाणपत्र’ यानी मान्यता का न होना है।

46 से ज्यादा कॉलेजों के पास नहीं है INC की मान्यता

आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक है।

  • प्रदेश में बीएससी नर्सिंग की कुल 7751 से ज्यादा सीटें हैं, लेकिन इनमें से महज 4460 सीटों को ही आईएनसी (INC) की तरफ से मान्यता मिली हुई है।
  • अधिकारियों के मुताबिक, राज्य में 46 से ज्यादा ऐसे निजी नर्सिंग कॉलेज चल रहे हैं जिनके पास आईएनसी का उपयुक्तता प्रमाणपत्र नहीं है।
  • सबसे बड़ी विडंबना यह है कि मान्यता न होने के बावजूद छत्तीसगढ़ नर्सिंग काउंसिल (SNC) और पंडित दीनदयाल उपाध्याय हैल्थ साइंस एंड आयुष विश्वविद्यालय इन कॉलेजों को हर साल छात्रों के एडमिशन की अनुमति दे रहे हैं।

6 नोटिसों के बावजूद कॉलेजों की लापरवाही

आईएनसी ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जिन सरकारी और निजी कॉलेजों को नई दिल्ली से मान्यता नहीं मिली है, वे जल्द से जल्द अपनी मान्यता प्रक्रिया पूरी कर लें। लेकिन निजी कॉलेज इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

  • पिछले 2 सालों के भीतर हैल्थ साइंस विवि, कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन और स्टेट नर्सिंग काउंसिल द्वारा इन कॉलेजों को कुल 6 नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
  • पहला नोटिस अप्रैल 2024 में दिया गया था और आखिरी 2 अप्रैल 2026 को दिया गया है, लेकिन कॉलेजों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी है।
  • हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद सीटों की बढ़ोतरी का काम स्टेट काउंसिल करती है, लेकिन दूसरे राज्यों में या केंद्रीय संस्थानों में नौकरी पाने के लिए आईएनसी की मान्यता होना अनिवार्य है।

2329 सीटें रह गईं खाली (लैप्स)

इस साल नर्सिंग कॉलेजों की स्थिति एडमिशन के मामले में भी काफी खराब रही है।

  • प्रदेश में 10 परसेंटाइल तक छूट देकर एडमिशन देने के बावजूद बीएससी नर्सिंग की 2329 सीटें लैप्स हो गई हैं (यानी खाली रह गईं)।
  • इस साल केवल 5422 सीटों पर ही प्रवेश हो सका है।
  • राज्य ने आईएनसी से जीरो परसेंटाइल पर एडमिशन की मांग की थी, जिसे आईएनसी ने सिरे से खारिज कर दिया था। कुल मिलाकर प्रदेश की लगभग 30 फीसदी सीटें इस बार खाली रह गई हैं।

क्या आप या आपके परिवार में कोई नर्सिंग की पढ़ाई कर रहा है? इन बिना मान्यता वाले कॉलेजों की कार्यप्रणाली पर आप क्या सोचते हैं? अपना अनुभव हमारे साथ जरूर साझा करें।

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